संदर्भ:
जलवायु परिवर्तन, अनियमित मानसून, भूजल के अत्यधिक दोहन और बढ़ती जल मांग ने भारत के ग्रामीण क्षेत्रों में जल सुरक्षा को एक गंभीर चुनौती बना दिया है। इसी चुनौती से निपटने के लिए ग्राम पंचायत स्तर पर जल बजट (Water Budget) और जल सुरक्षा योजना तैयार करने की पहल की जा रही है। पंचायती राज मंत्रालय ने ग्राम पंचायतों द्वारा जल बजट एवं जल सुरक्षा योजना बनाने के लिए हाल ही में राष्ट्रीय स्तर पर मास्टर ट्रेनर्स प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू किया है।
जल बजट क्या है?
जल बजट किसी गांव में उपलब्ध जल संसाधनों और उसकी कुल मांग का वैज्ञानिक आकलन है, अर्थात गांव में कितना पानी आता है, कितना उपयोग होता है और कितना बचाया जा सकता है, इसका पूरा हिसाब जल बजट कहलाता है। इसमें मुख्य रूप से निम्न पहलुओं का अध्ययन किया जाता है-
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- वर्षा से प्राप्त जल की मात्रा
- भूजल एवं सतही जल की उपलब्धता
- घरेलू उपयोग के लिए पानी की आवश्यकता
- कृषि एवं पशुपालन में जल खपत
- जल संरक्षण एवं पुनर्भरण की संभावनाएं
- वर्षा से प्राप्त जल की मात्रा
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जल बजट की आवश्यकता:
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- भूजल संकट से निपटना: भारत के अनेक ग्रामीण क्षेत्रों में भूजल स्तर लगातार गिर रहा है। बिना योजना के सिंचाई और बढ़ती जनसंख्या के कारण जल संसाधनों पर दबाव बढ़ा है।
- जल उपयोग में संतुलन: जल बजट से गांव अपनी वास्तविक जरूरतों के अनुसार जल उपयोग की योजना बना सकता है। इससे अनावश्यक जल दोहन को रोका जा सकेगा।
- कृषि क्षेत्र में सुधार: कृषि भारत में जल का सबसे बड़ा उपभोक्ता है। जल बजट के आधार पर कम पानी वाली फसलों, सूक्ष्म सिंचाई और बेहतर फसल नियोजन को बढ़ावा दिया जा सकता है।
- जल संरक्षण को बढ़ावा: तालाबों का पुनर्जीवन, वर्षा जल संचयन, चेक डैम और भूजल पुनर्भरण जैसी गतिविधियों को वैज्ञानिक आधार मिलेगा।
- भूजल संकट से निपटना: भारत के अनेक ग्रामीण क्षेत्रों में भूजल स्तर लगातार गिर रहा है। बिना योजना के सिंचाई और बढ़ती जनसंख्या के कारण जल संसाधनों पर दबाव बढ़ा है।
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मास्टर ट्रेनर्स प्रशिक्षण कार्यक्रम के बारे में:
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- यह कार्यक्रम राज्य, जिला और ब्लॉक स्तर पर मास्टर ट्रेनर्स का एक राष्ट्रीय पूल तैयार करने के लिए देशव्यापी क्षमता निर्माण पहल की शुरुआत है। ये प्रशिक्षक ग्राम पंचायतों को:
- तकनीकी रूप से मजबूत,
- साक्ष्य आधारित,
- समुदाय संचालित
- तकनीकी रूप से मजबूत,
- यह कार्यक्रम राज्य, जिला और ब्लॉक स्तर पर मास्टर ट्रेनर्स का एक राष्ट्रीय पूल तैयार करने के लिए देशव्यापी क्षमता निर्माण पहल की शुरुआत है। ये प्रशिक्षक ग्राम पंचायतों को:
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जल सुरक्षा योजनाएं तैयार करने में सहायता करेंगे।
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- इस पहल का उद्देश्य जल बजट के माध्यम से ग्राम पंचायतों की जल प्रबंधन क्षमता को मजबूत करना और दीर्घकालिक जल सुरक्षा सुनिश्चित करना है।
- इस अवसर पर पंचायती राज मंत्रालय ने “जल-पर्याप्त पंचायत प्रशिक्षण नियमावली (चरण-1 और चरण-2)” भी जारी की। यह नियमावली ग्राम पंचायतों को सहभागी, वैज्ञानिक और जलवायु-अनुकूल जल सुरक्षा योजनाएं तैयार करने के लिए व्यावहारिक मार्गदर्शन प्रदान करेगी।
- इस पहल का उद्देश्य जल बजट के माध्यम से ग्राम पंचायतों की जल प्रबंधन क्षमता को मजबूत करना और दीर्घकालिक जल सुरक्षा सुनिश्चित करना है।
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प्रशिक्षण कार्यक्रम की प्रमुख विशेषताएं:
मास्टर ट्रेनर्स का राष्ट्रीय प्रशिक्षण निम्नलिखित क्षेत्रों पर केंद्रित है:
वैज्ञानिक जल प्रबंधन
· जल बजट तैयार करना।
· जल संसाधनों और मांग का मूल्यांकन।
· जल संरक्षण उपायों की पहचान।
तकनीकी नवाचार
· डेटा आधारित योजना निर्माण।
· जल संसाधनों की निगरानी।
· जलवायु-अनुकूल रणनीतियों का विकास।
समुदाय आधारित योजना
· स्थानीय लोगों की भागीदारी सुनिश्चित करना।
· समावेशी जल सुरक्षा योजनाएं बनाना।
· ग्राम स्तर पर कार्यान्वयन रणनीति विकसित करना।
कार्यक्रम का प्रथम चरण:
इस पहल के पहले चरण में 10 राज्यों के:
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- 100 जिले,
- 100 ब्लॉक,
- 1,000 ग्राम पंचायतें
- 100 जिले,
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शामिल की जाएंगी।
इन राज्यों में शामिल हैं:
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- बिहार,
- छत्तीसगढ़,
- झारखंड,
- कर्नाटक,
- मध्य प्रदेश,
- महाराष्ट्र,
- ओडिशा,
- राजस्थान,
- तमिलनाडु,
- पश्चिम बंगाल।
- बिहार,
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पहले बैच में बिहार, छत्तीसगढ़, झारखंड, मध्य प्रदेश और पश्चिम बंगाल के प्रतिभागी शामिल हुए। ये प्रशिक्षक आगामी जन योजना अभियान (PPC) के दौरान पंचायतों को जल सुरक्षा योजनाएं तैयार करने में सहायता देंगे।
निष्कर्ष:
प्रत्येक गांव का जल बजट तैयार करने की पहल भारत में विकेंद्रीकृत, वैज्ञानिक और सहभागी जल प्रबंधन प्रणाली स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। यह ग्राम पंचायतों को जल संरक्षण और प्रबंधन में सक्रिय भागीदार बनाएगी तथा जल-पर्याप्त एवं जलवायु-अनुकूल ग्रामीण भारत के निर्माण में योगदान देगी।

