चर्चा में क्यों?
हाल ही में विकसित भारत – रोजगार एवं आजीविका मिशन (ग्रामीण) [VB-G RAM G] अधिनियम, 2025 पूरे भारत में 1 जुलाई से लागू हो गया है। इस अधिनियम ने महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) (MGNREGA) का स्थान ले लिया है।
अधिनियम के बारे में:
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- VB-G RAM G अधिनियम, 2025 एक व्यापक ग्रामीण रोजगार कानून है, जिसका उद्देश्य भारत की मजदूरी आधारित ग्रामीण रोजगार व्यवस्था का आधुनिकीकरण करना है। यह अधिनियम आजीविका सुरक्षा को सुदृढ़ करने, टिकाऊ ग्रामीण परिसंपत्तियों का निर्माण करने, डिजिटल शासन के माध्यम से पारदर्शिता बढ़ाने तथा जलवायु-अनुकूल ग्रामीण विकास को प्रोत्साहित करने पर केंद्रित है।
- यह अधिनियम कल्याण-आधारित रोजगार सृजन की अवधारणा से आगे बढ़ते हुए उत्पादकता-आधारित ग्रामीण विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण परिवर्तन का प्रतीक है। यह "रोजगार भी, सम्मान भी" के मार्गदर्शक सिद्धांत के साथ "विकसित भारत @2047" के लक्ष्य के अनुरूप तैयार किया गया है।
- VB-G RAM G अधिनियम, 2025 एक व्यापक ग्रामीण रोजगार कानून है, जिसका उद्देश्य भारत की मजदूरी आधारित ग्रामीण रोजगार व्यवस्था का आधुनिकीकरण करना है। यह अधिनियम आजीविका सुरक्षा को सुदृढ़ करने, टिकाऊ ग्रामीण परिसंपत्तियों का निर्माण करने, डिजिटल शासन के माध्यम से पारदर्शिता बढ़ाने तथा जलवायु-अनुकूल ग्रामीण विकास को प्रोत्साहित करने पर केंद्रित है।
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प्रमुख विशेषताएँ:
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- बढ़ी हुई रोजगार गारंटी: प्रत्येक पात्र ग्रामीण परिवार को प्रतिवर्ष 100 दिनों के स्थान पर अब 125 दिनों के गारंटीकृत मजदूरी रोजगार का प्रावधान किया गया है।
- संशोधित मजदूरी संरचना: न्यूनतम अधिसूचित दैनिक मजदूरी ₹300 निर्धारित की गई है, जबकि राष्ट्रीय औसत दैनिक मजदूरी बढ़कर ₹327.4 हो गई है।
- डिजिटल शासन: पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण, जियो-टैगिंग, GIS आधारित योजना, राष्ट्रीय मोबाइल मॉनिटरिंग प्रणाली (NMMS), रियल-टाइम डैशबोर्ड तथा प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (DBT) की व्यवस्था की गई है।
- विकेंद्रीकृत योजना निर्माण: ग्राम सभाओं की भागीदारी से ग्राम पंचायतों द्वारा विकसित ग्राम पंचायत योजना (VGPP) तैयार की जाएगी।
- समयबद्ध मजदूरी भुगतान: मजदूरी का भुगतान 15 दिनों के भीतर किया जाएगा। विलंब होने पर प्रतिदिन 0.05% की दर से मुआवजा दिया जाएगा।
- श्रमिक कल्याण: कार्यस्थलों पर पीने के पानी, छाया, प्राथमिक उपचार तथा बच्चों की देखभाल (चाइल्डकेयर) जैसी सुविधाएँ अनिवार्य रूप से उपलब्ध कराई जाएँगी।
- पारदर्शिता के उपाय: अनिवार्य सामाजिक अंकेक्षण (Social Audit) तथा मोबाइल आधारित निगरानी की व्यवस्था की गई है।
- मौसम के अनुसार लचीलापन: राज्य सरकारें कृषि के व्यस्त मौसम के दौरान अधिकतम 60 दिनों तक कार्यों को अस्थायी रूप से स्थगित कर सकती हैं।
- बढ़ी हुई रोजगार गारंटी: प्रत्येक पात्र ग्रामीण परिवार को प्रतिवर्ष 100 दिनों के स्थान पर अब 125 दिनों के गारंटीकृत मजदूरी रोजगार का प्रावधान किया गया है।
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राज्यों में संशोधित मजदूरी दरें:
सरकार ने विभिन्न राज्यों की मजदूरी दरों में संशोधन करते हुए यह सुनिश्चित किया है कि किसी भी राज्य में अधिसूचित दैनिक मजदूरी ₹300 से कम न हो। इसके साथ ही राष्ट्रीय औसत मजदूरी ₹298.8 से बढ़कर ₹327.4 प्रतिदिन हो गई है, जो 10% से अधिक की वृद्धि को दर्शाती है।
यह संशोधित मजदूरी संरचना विशेष रूप से उन राज्यों के लिए लाभकारी है, जहाँ पहले मनरेगा के अंतर्गत मजदूरी ₹300 से कम थी। 21 राज्यों एवं केंद्रशासित प्रदेशों में मजदूरी बढ़ाकर कम-से-कम ₹300 प्रतिदिन कर दी गई है।
प्रमुख वृद्धि वाले राज्यों में शामिल हैं-
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- उत्तर प्रदेश: +₹48
- बिहार: +₹45
- मध्य प्रदेश: +₹39
- राजस्थान: +₹19
- उत्तर प्रदेश: +₹48
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इसके अतिरिक्त अरुणाचल प्रदेश, नागालैंड, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, झारखंड, असम, त्रिपुरा, सिक्किम तथा पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों में भी 15% से अधिक की मजदूरी वृद्धि दर्ज की गई है।
जिन राज्यों में पहले से ही दैनिक मजदूरी ₹300 से अधिक थी, वहाँ अपेक्षाकृत कम वृद्धि की गई है। हरियाणा में सबसे अधिक ₹409 प्रतिदिन की मजदूरी बनी हुई है, इसके बाद गोवा (₹406) और केरल (₹401) का स्थान है।
अधिनियम के लाभ:
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- अधिक रोजगार दिवस एवं उच्च मजदूरी के माध्यम से ग्रामीण परिवारों की आजीविका सुरक्षा को मजबूत करेगा।
- सिंचाई परियोजनाओं, ग्रामीण सड़कों तथा जल संरक्षण संरचनाओं जैसी टिकाऊ ग्रामीण परिसंपत्तियों के निर्माण को बढ़ावा देगा।
- जलवायु परिवर्तन के प्रति अनुकूल (Climate Resilient) ग्रामीण विकास को प्रोत्साहित करेगा।
- डिजिटल शासन के माध्यम से पारदर्शिता एवं जवाबदेही सुनिश्चित करेगा।
- महिलाओं के सशक्तिकरण को बढ़ावा देगा, क्योंकि कार्यस्थलों पर बच्चों की देखभाल एवं अन्य आवश्यक सुविधाएँ उपलब्ध कराई जाएँगी।
- ग्राम पंचायत आधारित योजना निर्माण के माध्यम से स्थानीय स्वशासन संस्थाओं को अधिक सशक्त बनाएगा।
- अधिक रोजगार दिवस एवं उच्च मजदूरी के माध्यम से ग्रामीण परिवारों की आजीविका सुरक्षा को मजबूत करेगा।
निष्कर्ष:
विकसित भारत – रोजगार एवं आजीविका मिशन (ग्रामीण) [VB-G RAM G] अधिनियम, 2025 भारत की ग्रामीण रोजगार नीति में एक महत्वपूर्ण परिवर्तन का प्रतीक है। यह अधिनियम बढ़ी हुई रोजगार गारंटी, उच्च मजदूरी, डिजिटल पारदर्शिता तथा सतत ग्रामीण विकास को एक साथ जोड़ता है। हालाँकि, इसके प्रभावी क्रियान्वयन के लिए पर्याप्त वित्तीय संसाधन, केंद्र एवं राज्य सरकारों के बीच प्रभावी समन्वय तथा पंचायती राज संस्थाओं का सशक्तिकरण अत्यंत आवश्यक होगा। यदि इन पहलुओं पर सफलतापूर्वक कार्य किया जाता है, तो यह अधिनियम ग्रामीण आजीविका में व्यापक सुधार लाने तथा समावेशी विकास के लक्ष्य को प्राप्त करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
