संदर्भ:
भारत सरकार सड़क दुर्घटनाओं में होने वाली मौतों को कम करने और यातायात प्रबंधन को अधिक प्रभावी बनाने के उद्देश्य से वाहन-से-वाहन (V2V) सुरक्षा तकनीक शुरू करने की योजना बना रही है। संसदीय परामर्श समिति की हालिया बैठक में सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने जानकारी दी कि दूरसंचार विभाग ने इस प्रणाली के विकास हेतु विशेष रूप से 30 गीगाहर्ट्ज़ रेडियो फ़्रीक्वेंसी आवंटित की है।
महत्त्व:
वाहन-से-वाहन (V2V) एक उन्नत वायरलेस संचार तकनीक है, जो इंटेलिजेंट ट्रांसपोर्ट सिस्टम (आईटीएस) के अंतर्गत आती है। इसके माध्यम से वाहन आपस में वास्तविक समय में संवाद कर सकते हैं और गति, स्थान, त्वरण, मंदन तथा ब्रेकिंग जैसी महत्वपूर्ण जानकारियाँ साझा कर सकते हैं।
मुख्य लाभ:
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- टक्कर रोकथाम: यह तकनीक चालकों को दुर्घटना-संभावित स्थलों, सड़क पर मौजूद अवरोधों, खड़े वाहनों, घने कोहरे या पास के वाहन द्वारा अचानक ब्रेक लगाए जाने जैसी परिस्थितियों की समय रहते चेतावनी देती है।
- मृत्यु दर में कमी: भारत जैसे देश में, जहाँ सड़क दुर्घटनाओं से होने वाली मौतों की संख्या विश्व में सर्वाधिक है, यह तकनीक मृत्यु दर को कम करने में उल्लेखनीय रूप से सहायक हो सकती है।
- टक्कर रोकथाम: यह तकनीक चालकों को दुर्घटना-संभावित स्थलों, सड़क पर मौजूद अवरोधों, खड़े वाहनों, घने कोहरे या पास के वाहन द्वारा अचानक ब्रेक लगाए जाने जैसी परिस्थितियों की समय रहते चेतावनी देती है।
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पृष्ठभूमि:
इस तकनीकी हस्तक्षेप की आवश्यकता गंभीर आँकड़ों से स्पष्ट होती है:
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- वैश्विक हिस्सेदारी: वर्ष 2022 में भारत में 1,68,491 सड़क दुर्घटना मृत्यु दर्ज की गईं, जो वैश्विक कुल का लगभग 11 प्रतिशत हैं, जबकि भारत के पास विश्व के केवल 1 प्रतिशत वाहन हैं।
- मानवीय त्रुटि: लगभग 78 प्रतिशत सड़क दुर्घटनाएँ चालक की गलती के कारण होती हैं, जिससे जोखिम कम करने के लिए तकनीकी सहायता की आवश्यकता और अधिक बढ़ जाती है।
- वैश्विक हिस्सेदारी: वर्ष 2022 में भारत में 1,68,491 सड़क दुर्घटना मृत्यु दर्ज की गईं, जो वैश्विक कुल का लगभग 11 प्रतिशत हैं, जबकि भारत के पास विश्व के केवल 1 प्रतिशत वाहन हैं।
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कार्यान्वयन:
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- ऑन-बोर्ड इकाइयाँ: वाहनों में विशेष इलेक्ट्रॉनिक उपकरण लगाए जाएँगे, जो वाहन-से-वाहन (V2V) संचार को संभव बनाएँगे।
- चरणबद्ध शुरुआत: प्रारंभिक चरण में यह तकनीक नए वाहनों में अनिवार्य रूप से लागू की जाएगी, जबकि दीर्घकाल में पुराने वाहनों में इसे जोड़ने की योजना है।
- वैश्विक उदाहरण: अमेरिका, जर्मनी, जापान और चीन जैसे देशों में V2V आधारित प्रणालियाँ पहले से सफलतापूर्वक लागू की जा चुकी हैं।
- ऑन-बोर्ड इकाइयाँ: वाहनों में विशेष इलेक्ट्रॉनिक उपकरण लगाए जाएँगे, जो वाहन-से-वाहन (V2V) संचार को संभव बनाएँगे।
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कार्यान्वयन में चुनौतियाँ:
हालाँकि वाहन-से-वाहन (V2V) तकनीक अत्यंत उपयोगी है, फिर भी इसके समक्ष कुछ प्रमुख चुनौतियाँ मौजूद हैं:
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- डेटा गोपनीयता और सुरक्षा: बड़ी मात्रा में वाहन और चालक से संबंधित डेटा के संग्रह से दुरुपयोग और साइबर हमलों का खतरा उत्पन्न होता है।
- तकनीकी पहुँच: भारत में वाहनों की विविधता, उपकरणों की लागत तथा फ़्रीक्वेंसी से जुड़ी सीमाओं के कारण इसका समान रूप से प्रसार करना चुनौतीपूर्ण है।
- नियामक ढाँचा: प्रणाली की विश्वसनीयता सुनिश्चित करने तथा तकनीकी त्रुटियों या गलत संकेतों से होने वाली दुर्घटनाओं को रोकने के लिए सशक्त दिशा-निर्देश आवश्यक हैं।
- डेटा गोपनीयता और सुरक्षा: बड़ी मात्रा में वाहन और चालक से संबंधित डेटा के संग्रह से दुरुपयोग और साइबर हमलों का खतरा उत्पन्न होता है।
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पूरक उपाय: चार-स्तंभीय (4E) दृष्टिकोण:
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- वाहन-से-वाहन (V2V) तकनीक को अकेले समाधान नहीं माना जा सकता; इसे सड़क सुरक्षा के मौजूदा चार-स्तंभीय दृष्टिकोण के साथ समन्वित करना आवश्यक है:
- शिक्षा: जन-जागरूकता अभियान, राष्ट्रीय सड़क सुरक्षा माह और विशेष ड्राइविंग प्रशिक्षण संस्थानों की स्थापना।
- अभियांत्रिकी: सड़क सुरक्षा ऑडिट, दुर्घटना-संभावित स्थलों का सुधार तथा एयरबैग, एंटी-लॉक ब्रेकिंग सिस्टम (एबीएस) और स्पीड लिमिटर की तरह अनिवार्य सुरक्षा सुविधाएँ।
- प्रवर्तन: मोटर वाहन (संशोधन) अधिनियम, 2019 का प्रभावी कार्यान्वयन और ई-चालान प्रणाली की निगरानी।
- आपातकालीन देखभाल: ‘गुड समैरिटन’ सुरक्षा, बेहतर मुआवज़ा व्यवस्था और राष्ट्रीय राजमार्गों पर एंबुलेंस सेवाओं का विस्तार।
- शिक्षा: जन-जागरूकता अभियान, राष्ट्रीय सड़क सुरक्षा माह और विशेष ड्राइविंग प्रशिक्षण संस्थानों की स्थापना।
- इसके अतिरिक्त, वाहन स्क्रैपिंग नीति, भारत नई कार आकलन कार्यक्रम (BNCAP) तथा स्वचालित फिटनेस प्रमाणन जैसी पहलें सड़क सुरक्षा ढाँचे को और अधिक सुदृढ़ बनाती हैं।
- वाहन-से-वाहन (V2V) तकनीक को अकेले समाधान नहीं माना जा सकता; इसे सड़क सुरक्षा के मौजूदा चार-स्तंभीय दृष्टिकोण के साथ समन्वित करना आवश्यक है:
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आगे की राह:
वाहन-से-वाहन (V2V) तकनीक सड़क दुर्घटनाओं में कमी लाने की दिशा में एक क्रांतिकारी पहल है, किंतु इसकी सफलता मज़बूत नियामक व्यवस्था, व्यापक तकनीकी अपनाव और जन-जागरूकता पर निर्भर करेगी। यदि इसे बुनियादी ढाँचे में सुधार और चार-स्तंभीय दृष्टिकोण के साथ प्रभावी ढंग से लागू किया जाए, तो यह भारतीय सड़कों को अधिक सुरक्षित बनाकर स्मार्ट परिवहन की दिशा में एक निर्णायक परिवर्तन ला सकती है।

