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Blog / 02 Nov 2026

भारतीय वायु सेना को मजबूत एवं आधुनिक बनाने के लिए ‘वायु’ (VAYU) विजन

संदर्भ:

हाल ही में, एयर चीफ मार्शल आशुतोष दीक्षित ने भारतीय वायु सेना के 29वें वायु सेना प्रमुख (Chief of Air Staff-CAS) का पदभार संभालने के बाद भारतीय वायु सेना (IAF) को मजबूत एवं आधुनिक बनाने के लिए ‘वायु’ (VAYU) विजन प्रस्तुत किया। यह रूपरेखा युद्धक क्षमता को बहाल करने, आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने, उभरती प्रौद्योगिकियों को अपनाने तथा तीनों सशस्त्र सेनाओं के बीच संयुक्तता (Jointness) बढ़ाने पर केंद्रित है।

पृष्ठभूमि:

      • क्षेत्रीय भू-राजनीतिक तनावों, दो-मोर्चों पर सुरक्षा की चुनौती तथा युद्ध की उभरती तकनीकों के कारण भारत के सामने एक जटिल सुरक्षा वातावरण है। भारतीय वायु सेना (IAF) स्वीकृत 42 स्क्वाड्रनों की संख्या की तुलना में लड़ाकू स्क्वाड्रनों की कमी का सामना कर रही है।
      • ड्रोन, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), साइबर युद्ध और सटीक निर्देशित हथियारों का बढ़ता उपयोग आधुनिक युद्ध की प्रकृति को बदल रहा है। इसके अतिरिक्त, विमान इंजनों और उन्नत प्रौद्योगिकियों के लिए विदेशी आपूर्तिकर्ताओं पर निर्भरता रणनीतिक स्वायत्तता को प्रभावित करती है।
      • मिग-21 स्क्वाड्रनों की सेवानिवृत्ति तथा वर्ष 2029–30 तक कुछ अन्य विमानों को चरणबद्ध तरीके से सेवा से हटाने की योजना ने क्षमता संबंधी कमियों को और बढ़ा दिया है। वहीं, LCA तेजस को शामिल करने में हो रही देरी ने इस चुनौती को और गंभीर बना दिया है।

भारतीय वायु सेना को मजबूत एवं आधुनिक बनाने के लिए ‘वायु’ (VAYU) विजन

वायु विजन के चार स्तंभ:

      • V – Vigilance and Readiness (सतर्कता एवं तत्परता)
        • प्रत्येक स्क्वाड्रन, रडार, वायु रक्षा इकाई और वायु योद्धा को तत्काल प्रतिक्रिया के लिए हमेशा तैयार रखना।
        • भारतीय वायु सेना की युद्धक क्षमता को स्वीकृत संख्या के स्तर तक बहाल करना।
      • A – Aatmanirbharta (आत्मनिर्भरता)
        • तेजस Mk1/Mk1A और एडवांस्ड मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (AMCA) जैसे स्वदेशी प्लेटफॉर्म को बढ़ावा देना।
        • स्वदेशी हथियारों, सेंसर और रक्षा प्रौद्योगिकियों को मजबूत करना।
        • विदेशी आपूर्तिकर्ताओं पर निर्भरता कम करना।
      • Y – Yukti (युक्ति: नवाचार एवं रचनात्मकता)
        • नेटवर्क आधारित, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) से सक्षम कमांड एवं नियंत्रण प्रणालियों का विकास करना।
        • बहुस्तरीय ड्रोन-रोधी रक्षा प्रणाली को मजबूत करना।
        • सैन्य सिद्धांत, रखरखाव, बल सुरक्षा और लचीलेपन के क्षेत्र में नवाचार को बढ़ावा देना।
        • निकट अंतरिक्ष (Near-space) को एक परिचालन क्षेत्र के रूप में विकसित करने की संभावनाओं का पता लगाना।
      • U – Unity of Effort (सामूहिक प्रयास एवं एकजुटता)
        • थल सेना, नौसेना और वायु सेना के बीच समन्वय को बढ़ाना।
        • एकीकृत सैन्य योजना और अभियानों को अपनाना।
        • JAI विजन के अनुरूप कार्य करना, जिसमें संयुक्तता (Jointness), आत्मनिर्भरता (Aatmanirbharta) और नवाचार (Innovation) शामिल हैं।

राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए महत्त्व:

      • रणनीतिक प्रतिरोधक क्षमता (Strategic Deterrence): विश्वसनीय वायु शक्ति संघर्षों को रोकने और बाहरी खतरों का जवाब देने में मदद करती है।
      • तकनीकी श्रेष्ठता (Technological Superiority): भारत को भविष्य के बहु-क्षेत्रीय युद्ध (Multi-domain Warfare) के लिए तैयार करती है।
      • रणनीतिक स्वायत्तता (Strategic Autonomy): स्वदेशी रक्षा विनिर्माण को मजबूत करती है।
      • संयुक्तता (Jointness): सशस्त्र सेनाओं के बीच समन्वय और परिचालन प्रभावशीलता में सुधार करती है।
      • आर्थिक विकास: रक्षा क्षेत्र के स्टार्टअप, सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (MSMEs) और घरेलू उद्योगों को बढ़ावा देती है।

चुनौतियाँ:

      • लड़ाकू स्क्वाड्रनों की कमी और विमान खरीद में देरी।
      • विदेशी प्रौद्योगिकी, विशेष रूप से उन्नत विमान इंजनों पर निर्भरता।
      • आधुनिकीकरण के लिए बड़ी वित्तीय आवश्यकताएँ।
      • स्टील्थ तकनीक और उन्नत एवियोनिक्स के क्षेत्र में सीमित स्वदेशी क्षमताएँ।
      • ड्रोन, इलेक्ट्रॉनिक युद्ध और सटीक निर्देशित हथियारों से बढ़ते खतरे।

आगे की राह:

      • तेजस Mk1A, तेजस Mk2 और AMCA जैसी स्वदेशी परियोजनाओं में तेजी लाना।
      • रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO), हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL), निजी उद्योगों और रक्षा स्टार्टअप के बीच सहयोग को मजबूत करना।
      • कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), साइबर सुरक्षा, अंतरिक्ष और ड्रोन-रोधी प्रौद्योगिकियों में निवेश करना।
      • विमान रखरखाव, स्पेयर पार्ट्स की उपलब्धता और परिचालन तत्परता में सुधार करना।
      • एकीकृत सैन्य योजना और अंतर-संचालनीयता (Interoperability) के माध्यम से संयुक्तता को बढ़ावा देना।

निष्कर्ष:

‘वायु’ विजन एक तकनीकी रूप से उन्नत, परिचालन की दृष्टि से तत्पर और आत्मनिर्भर वायु सेना विकसित करने की भारत की महत्त्वाकांक्षा को दर्शाता है। इसका सफल क्रियान्वयन राष्ट्रीय सुरक्षा, रणनीतिक स्वायत्तता और एक उभरते हुए रक्षा विनिर्माण केंद्र के रूप में भारत की स्थिति को मजबूत करेगा।

 

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