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Blog / 03 Feb 2026

हीलियम गैस के रिसाव का पता लगाने के लिए ध्वनि तरंगों का उपयोग

संदर्भ:

चीन के नानजिंग विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं की एक टीम ने एक नया सेंसर विकसित किया है, जो हीलियम का पता लगाने के लिए रासायनिक प्रतिक्रियाओं के बजाय ध्वनि तरंगों का उपयोग करता है। यह शोध दिसंबर 2025 में 'एप्लाइड फिजिक्स लेटर्स' (Applied Physics Letters) में  द्वि-आयामी ध्वनिक टोपोलॉजिकल सामग्री पर आधारित हीलियम रिसाव का पता लगाने और दिशा निर्धारण हेतु एक सेंसर (A sensor for helium leakage detection and orientation based on a two-dimensional acoustic topological material) शीर्षक के तहत प्रकाशित हुआ था। 

हीलियम के बारे में:

      • हीलियम एक रंगहीन, गंधहीन और अक्रिय  गैस है। इसका उपयोग उद्योगों में व्यापक रूप से किया जाता है, जैसे एमआरआई (MRI) मशीनों को ठंडा रखने से लेकर एयरोस्पेस इंजीनियरिंग और सेमीकंडक्टर निर्माण तक। उच्च-तकनीकी अनुप्रयोगों में इसकी उपयोगिता के बावजूद, हीलियम वैश्विक स्तर पर एक दुर्लभ और महंगा संसाधन है।
      • इसकी बर्बादी को रोकने, सुरक्षा सुनिश्चित करने और औद्योगिक दक्षता बनाए रखने के लिए छोटे से छोटे रिसाव का पता लगाना और उसका स्थान जानना अत्यंत महत्वपूर्ण है। पारंपरिक गैस सेंसर, जो रासायनिक प्रतिक्रियाओं पर निर्भर करते हैं, हीलियम का पता लगाने में संघर्ष करते हैं क्योंकि यह रासायनिक रूप से स्थिर है और आमतौर पर सेंसर सामग्री के साथ कोई प्रतिक्रिया नहीं करती है। 

Researchers use sound waves to detect elusive helium gas leaks - The Hindu

सेंसर कैसे काम करता है?

      • यह सेंसर ध्वनि को रोकने के लिए एक 'कागोम जाली' ( आपस में जुड़े त्रिकोण और षट्भुज) में ध्वनिक टोपोलॉजिकल सामग्री का उपयोग करता है।
      • ट्यूबों द्वारा जुड़े नौ सिलेंडर हवा और हीलियम को अंदर आने देते हैं। इसमें लगे स्पीकर ध्वनि उत्पन्न करते हैं, और तीन कोनों पर लगे माइक्रोफोन संकेतों को मापते हैं।
      • पता लगाना (Detection): हीलियम फंसी हुई ध्वनि तरंगों की गति और आवृत्ति को बदल देती है।

पारंपरिक सेंसरों की तुलना में लाभ:

      • मजबूती और स्थिरता
        • यह सेंसर रासायनिक प्रतिक्रियाओं पर निर्भर नहीं है, जो इसे हीलियम जैसी अक्रिय गैसों का पता लगाने के लिए आदर्श बनाता है।
        • यह बाहरी स्थितियों (तापमान, आर्द्रता) से अप्रभावित रहता है, जो आमतौर पर रासायनिक सेंसरों को अस्थिर कर देती हैं।
        • इसका टोपोलॉजिकल डिज़ाइन यह सुनिश्चित करता है कि संरचनात्मक खामियों के बावजूद ध्वनि को पकड़ने का तंत्र लचीला बना रहे। साथ ही, तेजी से माप लेने के लिए गैस इनपुट के रास्ते काफी बड़े रखे गए हैं।
      • दिशात्मक पहचान (Directional Detection)
        • त्रिभुजाकार विन्यास की एक अनोखी विशेषता यह है कि यह रिसाव के स्रोत की दिशा निर्धारित कर सकता है:
        • तीनों कोनों पर आवृत्ति में बदलाव की गति की तुलना करके हीलियम के प्रवेश की दिशा ज्ञात की जा सकती है।
        • यह क्षमता अधिकांश बिंदु-आधारित सेंसरों में उपलब्ध नहीं होती।

अनुप्रयोग (Applications):

      • एयरोस्पेस, स्वास्थ्य सेवा (MRI सिस्टम) और सेमीकंडक्टर निर्माण जैसे क्षेत्रों में हीलियम रिसाव का पता लगाना आवश्यक है।
      • यह नया उपकरण 'मास-स्पेक्ट्रोमेट्री' आधारित डिटेक्टरों का एक बहुत सस्ता और तेज़ विकल्प है, जो काफी महंगे और भारी होते हैं।

निष्कर्ष:

यह नवाचार गैस सेंसिंग को रासायनिक तरीकों से हटाकर 'ध्वनिक-टोपोलॉजिकल' (acoustic-topological) तरीकों की ओर ले जाता है। यह हीलियम की संवेदनशील, स्थिर और दिशात्मक पहचान को सक्षम बनाता है, जिसमें संसाधन संरक्षण और औद्योगिक सुरक्षा में सुधार करने की अपार संभावनाएं हैं।