संदर्भ:
हाल ही में ईरान की नौसेना के फ्रिगेट आईरिस डेना (IRIS Dena) को संयुक्त राज्य अमेरिका की नौसेना की एक पनडुब्बी द्वारा टॉरपीडो से निशाना बनाकर हिंद महासागर में श्रीलंका के दक्षिणी तट के पास, श्रीलंका के क्षेत्रीय जल से बाहर डुबो दिया गया। यह युद्धपोत भारत द्वारा आयोजित बहुपक्षीय नौसैनिक अभ्यास मिलान (MILAN)-2026 में भाग लेने के बाद ईरान लौट रहा था, उसी दौरान यह हमला हुआ।
रणनीतिक पृष्ठभूमि:
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- यह हमला वर्ष 2026 में ईरान के साथ चल रहे व्यापक अमेरिका–इज़राइल संघर्ष के बीच हुआ, जो मध्य पूर्व से आगे बढ़कर समुद्री क्षेत्रों तक फैल गया है।
- अमेरिकी अधिकारियों ने इसे ईरान के खिलाफ व्यापक सैन्य अभियानों का हिस्सा बताया, जबकि ईरान ने इस हमले को अवैध और उकसाने वाला करार दिया।
- यह हमला वर्ष 2026 में ईरान के साथ चल रहे व्यापक अमेरिका–इज़राइल संघर्ष के बीच हुआ, जो मध्य पूर्व से आगे बढ़कर समुद्री क्षेत्रों तक फैल गया है।
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हिंद महासागर क्षेत्र (IOR) के लिए प्रभाव:
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- हिंद महासागर क्षेत्र रणनीतिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण है क्योंकि:
- यह वैश्विक समुद्री व्यापार मार्गों का प्रमुख केंद्र है।
- वैश्विक समुद्री तेल व्यापार का लगभग 80% इसी क्षेत्र से होकर गुजरता है।
- यह वैश्विक समुद्री व्यापार मार्गों का प्रमुख केंद्र है।
- यह घटना दर्शाती है कि क्षेत्रीय संघर्षों के बाहर के विवाद भी हिंद महासागर क्षेत्र में फैल सकते हैं, जिससे क्षेत्रीय सुरक्षा संतुलन प्रभावित हो सकता है।
- हिंद महासागर क्षेत्र रणनीतिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण है क्योंकि:
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प्रमुख अंतरराष्ट्रीय समुद्री संधियाँ:
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- संयुक्त राष्ट्र समुद्री कानून सम्मेलन (UNCLOS)
- 1982 में अपनाया गया और 1994 में लागू UNCLOS महासागरों में देशों के अधिकारों और दायित्वों को परिभाषित करता है।
- UNCLOS के अंतर्गत समुद्री क्षेत्र:
- क्षेत्रीय सागर (Territorial Sea)
- तट से 12 समुद्री मील तक विस्तृत
- इस क्षेत्र पर तटीय राज्य का पूर्ण संप्रभुत्व होता है।
- क्षेत्रीय सागर (Territorial Sea)
- 1982 में अपनाया गया और 1994 में लागू UNCLOS महासागरों में देशों के अधिकारों और दायित्वों को परिभाषित करता है।
- विशेष आर्थिक क्षेत्र (Exclusive Economic Zone - EEZ)
- 200 समुद्री मील तक विस्तृत
- राज्य को जीवित और अजीव संसाधनों के दोहन का अधिकार होता है।
- 200 समुद्री मील तक विस्तृत
- उच्च समुद्र (High Seas)
- राष्ट्रीय अधिकार क्षेत्र से बाहर के क्षेत्र
- यहाँ नौवहन, अनुसंधान, मछली पकड़ने और समुद्री केबल बिछाने की स्वतंत्रता होती है।
- UNCLOS नौवहन की स्वतंत्रता, समुद्री जैव विविधता के संरक्षण और विवाद समाधान को बढ़ावा देता है। हालांकि, यह मुख्यतः शांतिपूर्ण समुद्री गतिविधियों को नियंत्रित करता है और नौसैनिक युद्ध को स्पष्ट रूप से विनियमित नहीं करता।
- राष्ट्रीय अधिकार क्षेत्र से बाहर के क्षेत्र
- नौसैनिक युद्ध का कानून (Law of Naval Warfare):
- यह समुद्र में होने वाले सशस्त्र संघर्षों के दौरान लागू होता है।
- यह UNCLOS के साथ-साथ कार्य करता है, लेकिन सैन्य अभियानों को नियंत्रित करता है।
- इस कानून के तहत दुश्मन के युद्धपोत वैध लक्ष्य माने जा सकते हैं, भले ही वे क्षेत्रीय जल के बाहर हों।
- यह समुद्र में होने वाले सशस्त्र संघर्षों के दौरान लागू होता है।
- संयुक्त राष्ट्र समुद्री कानून सम्मेलन (UNCLOS)
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भारत के लिए कूटनीतिक दुविधा:
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- भारत के सामने एक जटिल कूटनीतिक स्थिति उत्पन्न हो गई है क्योंकि:
- ईरानी युद्धपोत भारतीय नौसैनिक अभ्यास का आमंत्रित प्रतिभागी था।
- भारत के संयुक्त राज्य अमेरिका और ईरान दोनों के साथ रणनीतिक संबंध हैं।
- यह घटना भारत के समुद्री पड़ोस में हुई, जिससे हिंद महासागर क्षेत्र में “नेट सिक्योरिटी प्रोवाइडर” के रूप में भारत की भूमिका पर प्रश्न उठते हैं।
- ईरानी युद्धपोत भारतीय नौसैनिक अभ्यास का आमंत्रित प्रतिभागी था।
- भारत के सामने एक जटिल कूटनीतिक स्थिति उत्पन्न हो गई है क्योंकि:
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व्यापक रणनीतिक प्रभाव:
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- हिंद महासागर का सैन्यीकरण: संयुक्त राज्य अमेरिका, चीन और क्षेत्रीय शक्तियों की बढ़ती नौसैनिक उपस्थिति संकेत देती है कि हिंद महासागर भू-राजनीतिक प्रतिस्पर्धा का प्रमुख केंद्र बनता जा रहा है।
- बहुपक्षीय नौसैनिक अभ्यासों की सुरक्षा: यह घटना निम्न चिंताओं को जन्म देती है:
- भाग लेने वाले युद्धपोतों की सुरक्षा
- बहुराष्ट्रीय नौसैनिक अभ्यासों के दौरान सुरक्षा आश्वासन
- भाग लेने वाले युद्धपोतों की सुरक्षा
- वैश्विक समुद्री व्यापार के लिए जोखिम: हिंद महासागर ऊर्जा आपूर्ति और अंतरराष्ट्रीय व्यापार मार्गों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। किसी भी प्रकार का सैन्य तनाव समुद्री संचार मार्गों (Sea Lines of Communication- SLOCs) को प्रभावित कर सकता है।
- हिंद महासागर का सैन्यीकरण: संयुक्त राज्य अमेरिका, चीन और क्षेत्रीय शक्तियों की बढ़ती नौसैनिक उपस्थिति संकेत देती है कि हिंद महासागर भू-राजनीतिक प्रतिस्पर्धा का प्रमुख केंद्र बनता जा रहा है।
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निष्कर्ष:
श्रीलंका के निकट आईरिस डेना (IRIS Dena) को टॉरपीडो से डुबोने की घटना हिंद महासागर में समुद्री सुरक्षा से जुड़ी एक महत्वपूर्ण घटना है। यह दर्शाती है कि भू-राजनीतिक संघर्ष नए समुद्री क्षेत्रों में भी फैल सकते हैं और भारत जैसे क्षेत्रीय शक्तियों के लिए कूटनीतिक चुनौतियाँ उत्पन्न कर सकते हैं। क्षेत्रीय स्थिरता बनाए रखने के लिए बहुपक्षीय समुद्री सहयोग और अंतरराष्ट्रीय कानूनों के पालन को मजबूत करना आवश्यक होगा।

