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Blog / 12 Feb 2026

अमेरिका-बांग्लादेश व्यापार समझौता

संदर्भ:

हाल ही में हस्ताक्षरित अमेरिका-बांग्लादेश पारस्परिक व्यापार समझौते ने भारतीय वस्त्र और परिधान निर्यातकों के बीच चिंता पैदा कर दी है। यह समझौता बांग्लादेशी वस्त्र और परिधान निर्यात के लिए अमेरिकी बाजार में शून्य पारस्परिक शुल्क (Zero Tariff) पहुँच प्रदान करता है, बशर्ते कि इसमें अमेरिकी मूल के कच्चे माल (जैसे कपास और मानव निर्मित फाइबर - MMF) का उपयोग किया गया हो। 

भारत पर प्रभाव:

      • सूत (Yarn) पर निर्भरता: वित्त वर्ष 2024-25 में भारत ने बांग्लादेश को 1.47 बिलियन डॉलर मूल्य के सूती धागे (570 मिलियन किलोग्राम) का निर्यात किया, जिससे बांग्लादेश भारत का सबसे बड़ा धागा निर्यात गंतव्य बन गया। 
      • अमेरिकी बाजार का जोखिम: बांग्लादेश के परिधान निर्यात का लगभग 20% और भारत के सूती परिधान निर्यात का 26% अमेरिका जाता है।
      • बाजार विस्थापन: यदि बांग्लादेश शून्य-शुल्क पहुंच का लाभ उठाने के लिए अमेरिकी कपास की खरीद बढ़ाता है, तो भारतीय धागे और कपास की मांग गिर सकती है। भारतीय उद्योग जगत ने ट्रेसेबिलिटी (नजर रखने की प्रणाली) तंत्र पर भी चिंता जताई है, जिससे मूल देश के दावों के दुरुपयोग का डर है।

प्रतिस्पर्धा पर प्रभाव:

      • बांग्लादेश वैश्विक स्तर पर परिधान, विशेष रूप से टी-शर्ट और महिलाओं के पहनावे जैसे सूती वस्त्रों का एक प्रमुख निर्यातक है। वरीयता शुल्क से निम्नलिखित प्रभाव हो सकते हैं:
        • ​100% सूती कपड़ों में भारत की मूल्य प्रतिस्पर्धात्मकता कम होना।
        • आपूर्ति श्रृंखला (Supply Chain) का अमेरिकी कपास की ओर स्थानांतरित होना।
        • भारत की कीमत पर बांग्लादेश के परिधान निर्यात में वृद्धि होना।

भारतीय परिधान क्षेत्र की स्थिति:

      • वैश्विक रैंक: कपड़ा और परिधान का छठा सबसे बड़ा निर्यातक।
      • निर्यात: वित्त वर्ष 2023-24 में 35.9 बिलियन डॉलर (जिसमें परिधान का हिस्सा 42% है)
      • प्रमुख बाजार: अमेरिका (25%), यूरोपीय संघ, संयुक्त अरब अमीरात, ब्रिटेन और जर्मनी।
      • रोजगार: 4.5 करोड़ प्रत्यक्ष और 10 करोड़ अप्रत्यक्ष रोजगारकृषि के बाद दूसरा सबसे बड़ा नियोक्ता।

संरचनात्मक चुनौतियां:

      • विखंडन: 80% से अधिक एमएसएमई (MSME) बांग्लादेश की मेगा-फैक्ट्रियों की तुलना में पैमाने (Scale) की कमी का सामना कर रहे हैं।
      • सिंथेटिक अंतर: वैश्विक मांग मानव निर्मित फाइबर (MMF) की ओर बढ़ रही है, जबकि भारत अभी भी कपास पर अधिक निर्भर है।
      • पूंजी की उच्च लागत: वियतनाम में ~4.5% की तुलना में भारत में यह ~9% है।
      • शुल्क नुकसान: बांग्लादेश को प्रमुख बाजारों में शुल्क-मुक्त पहुंच प्राप्त है।

सरकारी पहल:

      • पीएम मित्र (PM MITRA) पार्क: एकीकृत कपड़ा बुनियादी ढांचा।
      • PLI योजना (कपड़ा): MMF और तकनीकी वस्त्रों को बढ़ावा।
      • AEPC: निर्यात सुविधा।
      • समर्थ (Samarth) योजना: कौशल विकास।

आगे की राह:

भारत को अमेरिकी बाजार में प्रतिस्पर्धा बनाए रखने के लिए बांग्लादेश की तरह ही अमेरिका के साथ पारस्परिक शुल्क प्रावधानों पर बातचीत करनी चाहिए। साथ ही, वैश्विक मांग के अनुरूप मानव निर्मित फाइबर (MMF) और मूल्यवर्धित कपड़ों में विविधता लाने की प्रक्रिया को तेज करने की आवश्यकता है। भारतीय कपास की ब्रांडिंग और ट्रेसेबिलिटी तंत्र को मजबूत करने से बाजार में विश्वसनीयता बढ़ेगी। इसके अलावा, क्लस्टर एकीकरण के माध्यम से उत्पादन क्षमता बढ़ाना और पूंजी की लागत कम करना वैश्विक प्रतिस्पर्धा के लिए महत्वपूर्ण होगा।

निष्कर्ष:

अमेरिका-बांग्लादेश व्यापार समझौता भारत की निर्यात प्रतिस्पर्धा की संवेदनशीलता को दर्शाता है। हालांकि तत्काल व्यवधान सीमित हो सकता है, लेकिन वैश्विक परिधान बाजार में भारत की स्थिति सुरक्षित करने के लिए व्यापार कूटनीति, उत्पाद विविधीकरण और आपूर्ति श्रृंखला दक्षता में निरंतर रणनीतिक सुधार आवश्यक हैं।