संदर्भ:
3 जनवरी 2026 को, “ऑपरेशन एब्सोल्यूट रिज़ॉल्व” के तहत अमेरिकी सैन्य बलों और विशेष बलों ने कराकस के निकट समन्वित हवाई और ज़मीनी कार्रवाई की। इस अभियान में वेनेज़ुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी को गिरफ़्तार करके, उन पर मादक पदार्थ की तस्करी व नार्को-आतंकवाद से जुड़े आरोपों पर मुकदमा के लिए न्यूयॉर्क ले जाया गया है। यह कार्रवाई 1989 में पनामा पर अमेरिकी आक्रमण के बाद लैटिन अमेरिका में सबसे प्रत्यक्ष अमेरिकी सैन्य हस्तक्षेप मानी जा रही है।
हालिया सैन्य तनाव:
2025 के उत्तरार्ध में तनाव तेज़ी से बढ़ा, जिसके प्रमुख घटनाक्रम निम्नलिखित रहे:
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- ऑपरेशन सदर्न स्पीयर (सितंबर 2025): कैरेबियन और प्रशांत क्षेत्र में अमेरिकी “मादक पदार्थ विरोधी” समुद्री अभियान, जिसमें कथित तस्करी में संलिप्त जहाज़ों के विरुद्ध घातक कार्रवाइयाँ की गईं।
- हवाई क्षेत्र प्रतिबंध (29 नवंबर 2025): अमेरिका ने वेनेज़ुएला के हवाई क्षेत्र को सभी नागरिक विमानों के लिए बंद घोषित कर दिया।
- नौसैनिक नाकाबंदी (दिसंबर 2025): वेनेज़ुएला के तेल टैंकरों पर “पूर्ण नौसैनिक नाकाबंदी”, जिसे अमेरिका ने “नार्को-आतंकवादी शासन” के विरुद्ध कार्रवाई के रूप में उचित ठहराया।
- ऑपरेशन सदर्न स्पीयर (सितंबर 2025): कैरेबियन और प्रशांत क्षेत्र में अमेरिकी “मादक पदार्थ विरोधी” समुद्री अभियान, जिसमें कथित तस्करी में संलिप्त जहाज़ों के विरुद्ध घातक कार्रवाइयाँ की गईं।
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संबंधों का विकास और विवाद की पृष्ठभूमि:
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- बीसवीं सदी के उत्तरार्ध में अमेरिका–वेनेज़ुएला संबंध अपेक्षाकृत सहयोगपूर्ण रहे, जिनका आधार तेल व्यापार और शीत युद्धकालीन रणनीतिक संरेखण था। यह स्थिति 1999 में ह्यूगो चावेज़ के सत्ता में आने के बाद तेज़ी से बदली, जब उन्होंने वेनेज़ुएला को समाजवादी राज्य घोषित किया और खुली “साम्राज्यवाद-विरोधी” विदेश नीति अपनाई।
- तनाव तब और गहराया जब वेनेज़ुएला ने 2002 में चावेज़ के विरुद्ध असफल तख्तापलट के प्रयास में अमेरिका की भूमिका का आरोप लगाया हालाँकि बाद में इन आरोपों को आंशिक रूप से वापस ले लिया गया। 2008 और फिर 2014 में राजनयिकों के निष्कासन से कूटनीतिक तनाव और बढ़ गया, जब कराकस ने अमेरिकी राजनयिकों पर आंतरिक अस्थिरता फैलाने का आरोप लगाया।
- हालाँकि 2009 में राष्ट्रपति बराक ओबामा के प्रयासों के बाद संबंधों में थोड़े समय के लिए सुधार हुआ, लेकिन यह जल्द ही समाप्त हो गया। 2019 के राष्ट्रपति संकट के दौरान स्थिति निर्णायक रूप से बिगड़ गई, जब अमेरिका ने विपक्षी नेता जुआन गुआइदो को अंतरिम राष्ट्रपति के रूप में मान्यता दी, जिसके बाद मादुरो सरकार ने अमेरिका से कूटनीतिक संबंध तोड़ दिए।
- कराकस में समाजवादी नेतृत्व के उदय के बाद से अमेरिका–वेनेज़ुएला संबंध तनावपूर्ण रहे हैं। वॉशिंगटन ने मादुरो शासन पर सत्तावादी शासन, चुनावी हेरफेर, व्यापक भ्रष्टाचार और अंतरराष्ट्रीय मादक पदार्थ तस्करी नेटवर्क से संबंधों के आरोप लगाए हैं। इसके प्रत्युत्तर में, संयुक्त राज्य अमेरिका ने व्यक्तिगत, वित्तीय और क्षेत्रीय स्तर पर व्यापक प्रतिबंध लगाए, विशेष रूप से राज्य-स्वामित्व वाली तेल कंपनी PDVSA पर। इन प्रतिबंधों ने वेनेज़ुएला की अर्थव्यवस्था को गंभीर रूप से कमजोर किया और देश को चीन व रूस जैसे रणनीतिक साझेदारों के और करीब ला दिया।
- बीसवीं सदी के उत्तरार्ध में अमेरिका–वेनेज़ुएला संबंध अपेक्षाकृत सहयोगपूर्ण रहे, जिनका आधार तेल व्यापार और शीत युद्धकालीन रणनीतिक संरेखण था। यह स्थिति 1999 में ह्यूगो चावेज़ के सत्ता में आने के बाद तेज़ी से बदली, जब उन्होंने वेनेज़ुएला को समाजवादी राज्य घोषित किया और खुली “साम्राज्यवाद-विरोधी” विदेश नीति अपनाई।
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अमेरिकी सैन्य हस्तक्षेप से जुड़े अंतरराष्ट्रीय क़ानूनी मुद्दे:
अंतरराष्ट्रीय क़ानून के दृष्टिकोण से अमेरिकी कार्रवाई कई गंभीर प्रश्न खड़े करती है:
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- संयुक्त राष्ट्र चार्टर के अनुच्छेद 2(4) का उल्लंघन: किसी संप्रभु राज्य की क्षेत्रीय अखंडता और राजनीतिक स्वतंत्रता के विरुद्ध बल प्रयोग निषिद्ध है।
- संप्रभुता और गैर-हस्तक्षेप का सिद्धांत: संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की अनुमति के बिना किसी मौजूदा राष्ट्राध्यक्ष की गिरफ़्तारी राज्य संप्रभुता के स्थापित मानकों को चुनौती देती है।
- आत्मरक्षा का अभाव: अमेरिका को किसी तात्कालिक सशस्त्र हमले का सामना नहीं था, जिससे अनुच्छेद 51 (आत्मरक्षा) के तहत दावे कमजोर पड़ते हैं।
- सीमापार क़ानून प्रवर्तन: मादुरो को जबरन ले जाना अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार क़ानून और प्रत्यर्पण से जुड़े स्थापित मानदंडों पर प्रश्न खड़े करता है।
- संयुक्त राष्ट्र चार्टर के अनुच्छेद 2(4) का उल्लंघन: किसी संप्रभु राज्य की क्षेत्रीय अखंडता और राजनीतिक स्वतंत्रता के विरुद्ध बल प्रयोग निषिद्ध है।
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निष्कर्ष:
जनवरी 2026 का अमेरिका–वेनेज़ुएला टकराव समकालीन अंतरराष्ट्रीय संबंधों की कई प्रमुख बहसों को उजागर करता है, जिनमें सैन्य हस्तक्षेप की सीमाएँ, राज्य संप्रभुता का सम्मान और ऊर्जा सुरक्षा की भू-राजनीति शामिल हैं। आंतरिक राजनीतिक अनिश्चितता और बाहरी दबावों के बीच वेनेज़ुएला जिस मार्ग पर आगे बढ़ेगा, उसके प्रभाव पश्चिमी गोलार्ध में कूटनीतिक मानदंडों और शक्ति संतुलन पर दूरगामी होंगे।

