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Blog / 16 Feb 2026

यूनाइटेड संगतम लिखम पुमजी द्वारा पैंगोलिन शिकार पर प्रतिबंध

संदर्भ:

हाल ही में यूनाइटेड संगतम लिखम पुमजी (USLP), जो नागालैंड के संगतम नागा समुदाय की सर्वोच्च जनजातीय संस्था है, ने अपने अधिकार क्षेत्र में पैंगोलिन के शिकार पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया है। यह समुदाय-आधारित संरक्षण पहल अवैध वन्यजीव व्यापार पर रोक लगाने और इंडोम्यांमार जैव विविधता क्षेत्र में गंभीर रूप से संकटग्रस्त पैंगोलिन प्रजातियों की रक्षा के उद्देश्य से की गई है।

पैंगोलिन के बारे में:

      • पैंगोलिन विश्व के सबसे अधिक तस्करी किए जाने वाले गैर-मानव स्तनधारी जीव हैं। भारत में इन्हें वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 की अनुसूची–I के अंतर्गत सर्वोच्च कानूनी संरक्षण प्राप्त है। अंतरराष्ट्रीय प्रकृति संरक्षण संघ (IUCN) के अनुसार भारतीय पैंगोलिन संकटग्रस्तऔर चीनी पैंगोलिन गंभीर रूप से संकटग्रस्तश्रेणी में आते हैं।
      • ये रात्रिचर और कीटभक्षी स्तनधारी होते हैं, जो मुख्य रूप से चींटियों और दीमकों का भोजन करते हैं। खतरे की स्थिति में ये अपने शरीर को गेंद की तरह गोल कर लेते हैं, जिसे वोल्वेशनकहा जाता है। इनके शरीर पर मौजूद केराटिन से बनी शल्क (स्केल्स) पारंपरिक औषधि और मांस के लिए (विशेषकर एशियाई बाजारों में अत्यधिक मांग में रहती हैं।

United Sangtam Likhum Pumji Bans Pangolin Hunting in Nagaland - The  Frontier Manipur

भारत में प्रजातियाँ और निवास क्षेत्र:

      • भारतीय पैंगोलिन (Manis crassicaudata): यह शुष्क क्षेत्रों, ऊँचे हिमालयी क्षेत्रों और पूर्वोत्तर भारत में छोड़कर भारत के अधिकांश भागों में पाया जाता है। यह विश्व की आठों पैंगोलिन प्रजातियों में आकार में सबसे बड़ा है।
      • चीनी पैंगोलिन (Manis pentadactyla): यह मुख्य रूप से हिमालय की तराई और पूर्वोत्तर भारत के सीमित क्षेत्रों में पाया जाता है।

संरक्षण स्थिति:

      • IUCN रेड लिस्ट: भारतीय पैंगोलिन संकटग्रस्त; चीनी पैंगोलिन गंभीर रूप से संकटग्रस्त।
      • वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972: अनुसूची–I
      • CITES: परिशिष्ट–I (अंतरराष्ट्रीय व्यावसायिक व्यापार पर पूर्ण प्रतिबंध)

मुख्य विशेषताएँ:

      • रात्रिचर तथा बिल बनाने वाले जीव
      • शल्क से ढके हुए एकमात्र स्तनधारी
      • मुख्य भोजन चींटियाँ और दीमक
      • प्रवास न करने वाले
      • आत्मरक्षा के लिए गोल होकर सिकुड़ जाना

यूनाइटेड संगतम लिखम पुमजी के प्रतिबंध का महत्व:

      • यह अनुच्छेद 371(ए) के अंतर्गत संवैधानिक स्वायत्तता वाले जनजातीय क्षेत्र में समुदाय-आधारित संरक्षण का प्रभावी उदाहरण प्रस्तुत करता है।
      • यह इंडोम्यांमार गलियारे में अवैध वन्यजीव व्यापार के विरुद्ध प्रयासों को सशक्त बनाता है।
      • यह राष्ट्रीय कानूनों, CITES प्रतिबद्धताओं तथा वैश्विक पैंगोलिन संरक्षण रणनीतियों जैसे वैधानिक कानूनों का पूरक है।

आगे की चुनौतियाँ:

      • दूरस्थ और घने वन क्षेत्रों में प्रतिबंध का प्रभावी क्रियान्वयन और निरंतर निगरानी करना।
      • पारंपरिक रूप से वन संसाधनों पर निर्भर समुदायों के लिए स्थायी आजीविका के विकल्प विकसित करना।
      • चीन और वियतनाम से जुड़े सीमा-पार तस्करी नेटवर्क पर प्रभावी नियंत्रण।

निष्कर्ष:

यूनाइटेड संगतम लिखम पुमजी (USLP) द्वारा पैंगोलिन शिकार पर लगाया गया प्रतिबंध जमीनी स्तर पर संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण और सराहनीय पहल है। पारंपरिक जनजातीय अधिकारों को कानूनी ढांचे के साथ जोड़ते हुए यह कदम न केवल जैव विविधता संरक्षण को मजबूती देता है, बल्कि भारत के एक अत्यंत संवेदनशील पारिस्थितिक क्षेत्र में अवैध वन्यजीव व्यापार पर अंकुश लगाने में भी सहायक सिद्ध होगा।