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Blog / 15 Jul 2026

केंद्र सरकार ने पैराक्वाट पर लगाया प्रतिबंध

संदर्भ:

हाल ही में केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय ने पैराक्वाट डाइक्लोराइड (Paraquat Dichloride) पर देशभर में प्रतिबंध लगाने की अधिसूचना जारी की है। यह एक अत्यधिक विषैला खरपतवारनाशी (शाकनाशी) है, जो भारत में आत्महत्या, आकस्मिक विषाक्तता तथा हत्या के हजारों मामलों से जुड़ा रहा है।

पैराक्वाट क्या है?

      • पैराक्वाट डाइक्लोराइड एक अचयनात्मक (Non-selective) तथा तीव्र प्रभाव वाला संपर्क शाकनाशी (Contact Herbicide) है, जिसका व्यापक रूप से खरपतवारों और घासों को नष्ट करने के लिए उपयोग किया जाता है।
      • इसका छिड़काव सामान्यतः फसल की कटाई के बाद खेतों को अगली बुवाई के लिए तैयार करने हेतु किया जाता है। इसके अतिरिक्त कपास जैसी फसलों में कटाई से पहले पौधों को सुखाने (फसल शुष्कीकरण) के लिए भी इसका उपयोग किया जाता है।
      • पैराक्वाट मुक्त मूलकों (Free Radicals) का निर्माण करके पौधों की कोशिका झिल्लियों को क्षतिग्रस्त करता है तथा प्रकाश-संश्लेषण की प्रक्रिया को बाधित कर देता है, जिससे पौधे नष्ट हो जाते हैं। यद्यपि मिट्टी के संपर्क में आने पर यह निष्क्रिय हो जाता है और मिट्टी में इसके अवशेष बहुत कम रहते हैं, फिर भी इसके उपयोग एवं संचालन के दौरान यह अत्यंत खतरनाक होता है।

पैराक्वाट पर प्रतिबंध क्यों लगाया गया?

      • पैराक्वाट कृषि में प्रयुक्त सबसे अधिक विषैले शाकनाशियों में से एक है। इसकी थोड़ी-सी मात्रा भी फेफड़ों को अपूरणीय क्षति, गुर्दों की विफलता, अनेक अंगों के काम करना बंद कर देने तथा मृत्यु का कारण बन सकती है। विशेष रूप से, पैराक्वाट विषाक्तता का कोई प्रभावी प्रतिविष (Antidote) उपलब्ध नहीं है।
      • चिकित्सा विशेषज्ञों तथा जनस्वास्थ्य से जुड़े विशेषज्ञ लंबे समय से इस पर देशव्यापी प्रतिबंध की मांग कर रहे थे, क्योंकि यह आत्महत्या, आकस्मिक विषाक्तता तथा किसानों एवं कृषि श्रमिकों के व्यावसायिक संपर्क (Occupational Exposure) के अनेक मामलों के लिए उत्तरदायी रहा है।

भारत में शाकनाशियों का विनियमन:

      • भारत में शाकनाशियों का नियमन कीटनाशक अधिनियम, 1968 के अंतर्गत किया जाता है। यह अधिनियम कीटनाशकों के आयात, निर्माण, विक्रय, परिवहन, वितरण तथा उपयोग को नियंत्रित करता है।
      • किसी भी शाकनाशी को बाजार में बिक्री से पूर्व केंद्रीय कीटनाशक बोर्ड एवं पंजीकरण समिति (CIB&RC) में पंजीकृत कराना अनिवार्य है।
      • नियामक व्यवस्था को आधुनिक बनाने के लिए प्रस्तावित कीटनाशक प्रबंधन विधेयक, 2025 (PMB) लाया गया है। इसका उद्देश्य 1968 के अधिनियम का स्थान लेना है। इसमें अधिक कठोर निगरानी, डिजिटल अनुरेखण (Digital Traceability), कीटनाशक विषाक्तता के मामलों की अनिवार्य रिपोर्टिंग तथा प्रभावित व्यक्तियों के लिए क्षतिपूर्ति की व्यवस्था का प्रावधान किया गया है।

केंद्र एवं राज्यों की नियामक शक्तियाँ:

वर्तमान कानून के अनुसार, राज्य सरकारें जनस्वास्थ्य के हित में अपने-अपने राज्यों में खतरनाक शाकनाशियों की बिक्री एवं उपयोग पर अस्थायी प्रतिबंध या रोक लगा सकती हैं। इससे पहले केरल, तेलंगाना तथा आंध्र प्रदेश पैराक्वाट पर प्रतिबंध लगाने वाले राज्यों में शामिल रहे हैं।

प्रतिबंध का महत्व:

      • इस निर्णय से किसानों, कृषि श्रमिकों तथा ग्रामीण समुदायों की सुरक्षा में सुधार होने की संभावना है, क्योंकि उन्हें अत्यधिक विषैले रसायन के संपर्क से बचाया जा सकेगा। यह सुरक्षित कृषि पद्धतियों को बढ़ावा देने तथा कीटनाशक विनियमन को सुदृढ़ करने की भारत की प्रतिबद्धता को भी दर्शाता है।
      • इस प्रतिबंध से जानबूझकर तथा आकस्मिक विषाक्तता से होने वाली मृत्यु के मामलों में कमी आने की संभावना है। साथ ही, सुरक्षित खरपतवार प्रबंधन उपायों तथा समेकित कीट प्रबंधन  जैसी तकनीकों को अपनाने को भी प्रोत्साहन मिलेगा।

निष्कर्ष:

पैराक्वाट पर लगाया गया प्रतिबंध किसानों, जनस्वास्थ्य तथा पर्यावरण की सुरक्षा की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इसकी सफलता प्रभावी क्रियान्वयन, किसानों में जागरूकता तथा सुरक्षित विकल्पों को अपनाने पर निर्भर करेगी।

 

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