संदर्भ:
हाल ही में, संयुक्त राष्ट्र व्यापार एवं विकास सम्मेलन (UNCTAD) ने अपनी व्यापार एवं विकास रिपोर्ट 2026 जारी की, जिसमें वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भू-राजनीतिक तनावों, व्यापार विखंडन और तकनीकी बदलावों के प्रभाव को उजागर किया गया है। रिपोर्ट में विकसित क्षेत्रों में रणनीतिक निवेश के बढ़ते संकेंद्रण की ओर भी ध्यान आकर्षित किया गया है।
रिपोर्ट के प्रमुख निष्कर्ष:
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- वैश्विक आर्थिक मंदी: वर्ष 2026 में वैश्विक जीडीपी वृद्धि दर 2.6% रहने का अनुमान है, जबकि वर्ष 2025 में यह 2.9% थी।
- व्यापार में वृद्धि: वर्ष 2025 में वस्तुओं और सेवाओं का वैश्विक व्यापार लगभग 35 ट्रिलियन डॉलर के रिकॉर्ड स्तर पर पहुँच गया।
- भू-अर्थव्यवस्थात्मक विखंडन: व्यापार नीतियाँ राष्ट्रीय सुरक्षा, रणनीतिक प्रतिस्पर्धा और भू-राजनीतिक गठबंधनों से तेजी से प्रभावित हो रही हैं।
- AI के असमान लाभ: कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) से प्राप्त होने वाले लाभ कुछ सीमित देशों और कंपनियों तक केंद्रित हैं।
- वित्तीय संवेदनशीलता: उच्च उधार लागत, ऋण का बोझ और ऊर्जा की कीमतों में झटके विकासशील अर्थव्यवस्थाओं को असमान रूप से अधिक प्रभावित करते हैं।
- वैश्विक आर्थिक मंदी: वर्ष 2026 में वैश्विक जीडीपी वृद्धि दर 2.6% रहने का अनुमान है, जबकि वर्ष 2025 में यह 2.9% थी।
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भू-अर्थशास्त्र क्या है?
भू-अर्थशास्त्र से तात्पर्य भू-राजनीतिक उद्देश्यों को प्राप्त करने के लिए टैरिफ, निर्यात नियंत्रण, निवेश प्रतिबंध और सब्सिडी जैसे आर्थिक साधनों के उपयोग से है। यह वैश्विक आपूर्ति शृंखलाओं और अंतरराष्ट्रीय आर्थिक संबंधों को नया स्वरूप दे रहा है।
वैश्विक ग्रीनफील्ड निवेश में भारत की स्थिति:
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- रिपोर्ट में उल्लिखित निवेश संबंधी निष्कर्षों के अनुसार, वर्ष 2020–2025 के दौरान वैश्विक ग्रीनफील्ड निवेश में भारत की हिस्सेदारी 5.7% रही, जबकि चीन की हिस्सेदारी 2.8%, मलेशिया की 4% और इंडोनेशिया की 3.8% थी।
- ग्रीनफील्ड निवेश से तात्पर्य किसी दूसरे देश में नया व्यावसायिक परिचालन या नई औद्योगिक सुविधा स्थापित करने से है।
- वैश्विक ग्रीनफील्ड निवेश में रणनीतिक क्षेत्रों की हिस्सेदारी वर्ष 2020 के 16% से बढ़कर वर्ष 2025 में 44% हो गई। AI अवसंरचना और संबंधित प्रौद्योगिकियों, सेमीकंडक्टर तथा ऊर्जा संक्रमण से जुड़ी प्रौद्योगिकियों में पर्याप्त निवेश आकर्षित हुआ।
- हालाँकि, रणनीतिक निवेश अभी भी यूरोप और उत्तरी अमेरिका में केंद्रित है, जो पूँजी और उन्नत प्रौद्योगिकियों तक पहुँच प्राप्त करने में विकासशील देशों के सामने आने वाली चुनौतियों को उजागर करता है।
- प्रमुख चुनौतियाँ:
- व्यापार विखंडन: टैरिफ, निर्यात प्रतिबंध और भू-राजनीतिक तनाव वैश्विक आपूर्ति शृंखलाओं को बाधित करते हैं।
- प्रौद्योगिकी विभाजन: विकासशील देशों को उन्नत प्रौद्योगिकियों, अनुसंधान और कुशल श्रमिकों तक सीमित पहुँच जैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ता है।
- निवेश का संकेंद्रण: मजबूत अवसंरचना और स्थापित औद्योगिक पारिस्थितिकी तंत्र वाली अर्थव्यवस्थाओं में पूँजी केंद्रित रहती है।
- वित्तीय बाधाएँ: उच्च उधार लागत और ऋण का बोझ विकास संबंधी व्यय को सीमित करते हैं।
- असमान विकास: अल्पविकसित देशों के उच्च मूल्यवर्धित वैश्विक उत्पादन नेटवर्क से बाहर रह जाने का जोखिम है।
- रिपोर्ट में उल्लिखित निवेश संबंधी निष्कर्षों के अनुसार, वर्ष 2020–2025 के दौरान वैश्विक ग्रीनफील्ड निवेश में भारत की हिस्सेदारी 5.7% रही, जबकि चीन की हिस्सेदारी 2.8%, मलेशिया की 4% और इंडोनेशिया की 3.8% थी।
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भारत के लिए महत्त्व:
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- भारत को विनिर्माण के विस्तार, रोजगार सृजन, प्रौद्योगिकी हस्तांतरण, निर्यात वृद्धि और रणनीतिक वस्तुओं के आयात पर निर्भरता कम करने के माध्यम से लाभ मिल सकता है। मेक इन इंडिया, उत्पादन-आधारित प्रोत्साहन (PLI) योजनाएँ, इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन और राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन जैसी पहलें इन उद्देश्यों को प्राप्त करने में सहायता कर सकती हैं।
- हालाँकि, निवेश आकर्षित करने के साथ-साथ घरेलू मूल्यवर्धन, कौशल विकास और अनुसंधान क्षमताओं को मजबूत करना भी आवश्यक है।
- भारत को विनिर्माण के विस्तार, रोजगार सृजन, प्रौद्योगिकी हस्तांतरण, निर्यात वृद्धि और रणनीतिक वस्तुओं के आयात पर निर्भरता कम करने के माध्यम से लाभ मिल सकता है। मेक इन इंडिया, उत्पादन-आधारित प्रोत्साहन (PLI) योजनाएँ, इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन और राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन जैसी पहलें इन उद्देश्यों को प्राप्त करने में सहायता कर सकती हैं।
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आगे की राह:
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- अवसंरचना, लॉजिस्टिक्स और व्यवसाय करने में सुगमता में सुधार करना।
- अनुसंधान एवं विकास तथा उन्नत विनिर्माण को बढ़ावा देना।
- MSME को मजबूत करना और उन्हें वैश्विक मूल्य शृंखलाओं में एकीकृत करना।
- उद्योगोन्मुख कौशल और तकनीकी शिक्षा का विकास करना।
- निवेश संबंधी नीतियों को स्थिर और पूर्वानुमान योग्य बनाए रखना।
- क्षेत्रीय सहयोग और सतत औद्योगिक विकास को बढ़ावा देना।
- अवसंरचना, लॉजिस्टिक्स और व्यवसाय करने में सुगमता में सुधार करना।
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निष्कर्ष:
UNCTAD की रिपोर्ट इस बात को उजागर करती है कि भू-राजनीति वैश्विक व्यापार, निवेश और विकास को नया स्वरूप दे रही है। भारत को अपनी निवेश क्षमता का लाभ उठाकर लचीली आपूर्ति शृंखलाओं का निर्माण करना चाहिए, तकनीकी आत्मनिर्भरता को मजबूत करना चाहिए और समावेशी आर्थिक विकास को बढ़ावा देना चाहिए।

