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Blog / 23 Oct 2026

संयुक्त राष्ट्र के जलवायु क्षति एवं हानि कोष ने नेपाल के लिए आवंटित किए 20 मिलियन डॉलर

संदर्भ:

हाल ही में, संयुक्त राष्ट्र के हानि एवं क्षति प्रतिक्रिया कोष (Fund for Responding to Loss and Damage—FRLD) ने अगस्त 2026 में आई विनाशकारी बाढ़ के बाद नेपाल के लिए 2 करोड़ डॉलर निर्धारित करने पर सहमति व्यक्त की है। यह निर्णय अंतरराष्ट्रीय जलवायु वित्त के क्षेत्र में एक महत्त्वपूर्ण उपलब्धि है, क्योंकि पहली बार इस कोष ने अचानक घटित होने वाली आपदा के लिए विशेष रूप से संसाधन निर्धारित किए हैं। हालाँकि, इस राशि का वितरण होने से पहले नेपाल को एक औपचारिक परियोजना प्रस्ताव प्रस्तुत करना होगा।

पृष्ठभूमि:

      • 26 अगस्त, 2026 को चीन के तिब्बत के निकट हिमालयी सीमावर्ती क्षेत्र में बर्फ और चट्टानों के हिमस्खलन के बाद नेपाल के भोटेकोशी–त्रिशूली क्षेत्र में भीषण बाढ़ आई।
      • इस आपदा से 15,000 परिवारों के लगभग 60,000 लोग प्रभावित हुए।
      • आधिकारिक रिपोर्टों के अनुसार, 1,400 से अधिक लोगों की मृत्यु हुई, जबकि हजारों लोग अब भी लापता हैं।
      • प्रत्यक्ष आर्थिक नुकसान लगभग 2.7 अरब डॉलर होने का अनुमान है, जबकि पुनर्प्राप्ति और पुनर्निर्माण की आवश्यकताएँ 4.7 अरब डॉलर से अधिक हो सकती हैं।
      • यह आपदा बाढ़, हिमनदीय खतरों और जलवायु परिवर्तन से संबंधित अन्य जोखिमों के प्रति हिमालयी समुदायों की संवेदनशीलता को उजागर करती है।

UN Loss and Damage Fund Earmarks $20 Million for Nepal

हानि एवं क्षति कोष क्या है?

वर्ष 2022 में COP27 के दौरान स्थापित और वर्ष 2023 में COP28 के दौरान परिचालित किया गया हानि एवं क्षति प्रतिक्रिया कोष (FRLD), उन विकासशील देशों को सहायता प्रदान करता है जो जलवायु परिवर्तन के ऐसे आर्थिक और गैर-आर्थिक परिणामों का सामना कर रहे हैं, जिन्हें केवल शमन या अनुकूलन के माध्यम से टाला नहीं जा सकता।

इसके प्रमुख उद्देश्यों में शामिल हैं:

      • जलवायु संबंधी आपदाओं के बाद पुनर्प्राप्ति और पुनर्निर्माण में सहायता प्रदान करना।
      • आर्थिक हानियों, जैसे क्षतिग्रस्त बुनियादी ढाँचे, और गैर-आर्थिक हानियों, जैसे जनहानि, सांस्कृतिक विरासत की क्षति तथा आजीविका के नुकसान, दोनों का समाधान करना।
      • जलवायु प्रभावों से निपटने के लिए सीमित संसाधनों वाले संवेदनशील देशों की सहायता करके जलवायु न्याय को मजबूत करना।
      • इस कोष की मेजबानी विश्व बैंक द्वारा की जाती है।

निर्णय का महत्त्व:

      • जलवायु न्याय: नेपाल का वैश्विक ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में अपेक्षाकृत कम योगदान है, लेकिन वह जलवायु संबंधी गंभीर जोखिमों का सामना करता है। यह साझा लेकिन विभेदित उत्तरदायित्वों और संबंधित क्षमताओं (CBDR-RC) के सिद्धांत को रेखांकित करता है।
      • संस्थागत विश्वसनीयता: यह आवंटन दर्शाता है कि यह कोष केवल लंबी परियोजना-आधारित प्रक्रियाओं पर निर्भर रहने के बजाय अचानक आने वाली आपदाओं पर भी प्रतिक्रिया देने की क्षमता रखता है।
      • संवेदनशील देशों को सहायता: यह निर्णय अल्प विकसित देशों (LDCs), लघु द्वीपीय विकासशील राज्यों (SIDS) और जलवायु परिवर्तन के प्रति संवेदनशील अन्य देशों के लिए एक महत्त्वपूर्ण उदाहरण प्रस्तुत करता है।
      • हिमालयी लचीलापन: यह आपदा प्रारंभिक चेतावनी प्रणालियों, जलवायु-अनुकूल बुनियादी ढाँचे और हिमनदीय तथा बाढ़ संबंधी जोखिमों पर क्षेत्रीय सहयोग की आवश्यकता को रेखांकित करती है।

चुनौतियाँ और चिंताएँ:

      • अपर्याप्त वित्तपोषण: 2 करोड़ डॉलर का आवंटन नेपाल के अनुमानित आपदा नुकसान के 1% से भी कम है।
      • वितरण में देरी: धनराशि निर्धारित करने का अर्थ तत्काल भुगतान नहीं है; नेपाल को आवश्यक प्रस्ताव और अनुमोदन की प्रक्रिया पूरी करनी होगी।
      • वित्तपोषण की कमी: इस कोष के लिए की गई वित्तीय प्रतिबद्धताएँ विकासशील देशों की आवश्यकताओं के व्यापक स्तर की तुलना में अपर्याप्त बनी हुई हैं।
      • जवाबदेही: यह सुनिश्चित करने के लिए पारदर्शी आवंटन, प्रभावी उपयोग और निगरानी आवश्यक हैं कि सहायता प्रभावित समुदायों तक पहुँचे।

निष्कर्ष:

नेपाल के लिए किया गया यह आवंटन जलवायु न्याय को व्यावहारिक रूप देने की दिशा में एक महत्त्वपूर्ण कदम है, लेकिन इसका सीमित आकार वैश्विक प्रतिबद्धताओं और वास्तविक आवश्यकताओं के बीच के अंतर को उजागर करता है। यह सुनिश्चित करने के लिए कि संवेदनशील विकासशील देशों को जलवायु आपदाओं से उबरने के दौरान असमान रूप से बड़े आर्थिक बोझ का सामना न करना पड़े, पर्याप्त वित्तपोषण वाला, सुलभ और त्वरित प्रतिक्रिया देने में सक्षम हानि एवं क्षति कोष आवश्यक है।

 

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