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Blog / 18 Sep 2026

तीसरा बिम्सटेक पारंपरिक चिकित्सा सम्मेलन

संदर्भ:

हाल ही में, पारंपरिक चिकित्सा ज्ञान, आनुवंशिक संसाधनों और बौद्धिक संपदा अधिकारों पर तीसरा बिम्सटेक सम्मेलन तथा दूसरी बिम्सटेक नोडल समूह की बैठक 17 सितंबर 2026 को गोवा में संपन्न हुई, जिसमें सभी सात बिम्सटेक सदस्य देशों ने भाग लिया।

प्रमुख परिणाम:

      • बैठक में सहयोग के चार प्राथमिक क्षेत्रों की पहचान की गई:
        • संस्थागत और नीतिगत सहयोग
        • मानक और व्यापार
        • दस्तावेजीकरण और क्षमता निर्माण
        • कार्यान्वयन तंत्र
      • सदस्य देशों ने पारंपरिक चिकित्सा ज्ञान, आनुवंशिक संसाधनों और बौद्धिक संपदा अधिकारों (IPR) के क्षेत्र में एक-दूसरे का समर्थन करने पर सहमति व्यक्त की।
      • इसके परिणामस्वरूप तैयार किए गएगोवा निष्कर्ष (Goa Conclusions)” भविष्य में क्षेत्रीय सहयोग के लिए एक रूपरेखा प्रदान करते हैं।

तीसरा बिम्सटेक पारंपरिक चिकित्सा सम्मेलन

पारंपरिक चिकित्सा क्या है?

पारंपरिक चिकित्सा स्वास्थ्य से जुड़ी उन पुरानी पद्धतियों और ज्ञान को कहते हैं जो पीढ़ियों से किसी समाज या संस्कृति में चले आ रहे हैं। पारंपरिक चिकित्सा में स्वास्थ्य बनाए रखने और बीमारी के उपचार के लिए विभिन्न संस्कृतियों द्वारा उपयोग किए जाने वाले ज्ञान, कौशल और प्रथाएँ शामिल हैं। स्वास्थ्य सेवा के अलावा भी इसका महत्व है, क्योंकि पारंपरिक ज्ञान औषधि खोज और फार्मास्यूटिकल अनुसंधान में योगदान दे सकता है।

मुख्य बातें:

      • प्राकृतिक चीजें: इसमें पौधों, जड़ी-बूटियों, जानवरों और खनिजों से बनी दवाओं का उपयोग होता है।
      • समग्र दृष्टिकोण: यह केवल एक बीमारी के लक्षण को नहीं, बल्कि पूरे शरीर, मन और आत्मा के संतुलन को ठीक करने पर ध्यान देती है।
      • प्रमुख उदाहरण: भारत में आयुर्वेद, योग और यूनानी, तथा चीन में एक्यूपंक्चर इसकी प्रसिद्ध प्रणालियाँ हैं।
      • उचित दस्तावेजीकरण और IPR संरक्षण जैव-पायरेसी (Biopiracy) तथा अनधिकृत व्यावसायिक शोषण को रोकने में मदद कर सकते हैं, जबकि वैज्ञानिक सत्यापन इसे आधुनिक स्वास्थ्य सेवा के साथ जिम्मेदारीपूर्वक एकीकृत करने में सहायता कर सकता है।

बिम्सटेक के बारे में:

बिम्सटेक का पूरा नाम बे ऑफ बंगाल इनिशिएटिव फॉर मल्टी-सेक्टोरल टेक्निकल एंड इकोनॉमिक कोऑपरेशन है।

पहलू

विवरण

स्थापना

6 जून 1997, बैंकॉक घोषणा

मुख्यालय

ढाका, बांग्लादेश

सदस्य

भारत, बांग्लादेश, भूटान, नेपाल, श्रीलंका, म्यांमार, थाईलैंड

क्षेत्रीय स्वरूप

दक्षिण एशिया और दक्षिण-पूर्व एशिया को जोड़ता है

स्थलरुद्ध सदस्य

नेपाल और भूटान

भारत के लिए महत्व:

      • एक्ट ईस्ट पालिसी: BIMSTEC भारत के दक्षिण एशियाई पड़ोस को दक्षिण-पूर्व एशिया से जोड़ता है।
      • पड़ोसी प्रथम (Neighbourhood First): यह भारत के पड़ोसी देशों के साथ क्षेत्रीय सहयोग को मजबूत करता है।
      • कनेक्टिविटी: यह कलादान मल्टीमॉडल ट्रांजिट ट्रांसपोर्ट परियोजना और भारतम्यांमारथाईलैंड त्रिपक्षीय राजमार्ग जैसी परियोजनाओं का पूरक है।
      • स्वास्थ्य कूटनीति (Health Diplomacy): पारंपरिक चिकित्सा भारत को अपनी AYUSH विशेषज्ञता साझा करने का एक माध्यम प्रदान करती है।
      • IPR और जैव विविधता: क्षेत्रीय सहयोग पारंपरिक ज्ञान और आनुवंशिक संसाधनों की रक्षा करते हुए वैध अनुसंधान और व्यापार को बढ़ावा दे सकता है।

भारत और पारंपरिक चिकित्सा:

भारत के AYUSH ढाँचे में आयुर्वेद, योग एवं प्राकृतिक चिकित्सा, यूनानी, सिद्ध और होम्योपैथी शामिल हैं। जामनगर, गुजरात में WHO ग्लोबल सेंटर फॉर ट्रेडिशनल मेडिसिन साक्ष्य-आधारित पारंपरिक चिकित्सा को बढ़ावा देने में भारत की भूमिका को और मजबूत करता है।

प्रमुख चुनौतियाँ:

      • सत्यापन: कई पारंपरिक उपचारों के लिए अधिक मजबूत वैज्ञानिक और नैदानिक साक्ष्य की आवश्यकता है।
      • मानकीकरण: विनियमों, फॉर्मूलेशन और गुणवत्ता मानकों में अंतर सहयोग में बाधा डाल सकता है।
      • IPR और जैव-पायरेसी : पारंपरिक ज्ञान के लिए प्रभावी दस्तावेजीकरण और कानूनी संरक्षण आवश्यक है।
      • स्थिरता: औषधीय पौधों का अस्थिर दोहन जैव विविधता के लिए खतरा पैदा कर सकता है।
      • अनुसंधान और क्षमता: असमान बुनियादी ढाँचा और सीमित निवेश सहयोगात्मक अनुसंधान को बाधित कर सकते हैं।

निष्कर्ष:

पारंपरिक चिकित्सा बिम्सटेक के भीतर स्वास्थ्य सहयोग, जैव विविधता संरक्षण, आर्थिक एकीकरण और सांस्कृतिक कनेक्टिविटी का एक महत्वपूर्ण माध्यम बन सकती है। गोवा निष्कर्ष साझा पारंपरिक ज्ञान को संरचित क्षेत्रीय सहयोग में बदलने के लिए एक आधार प्रदान करते हैं।

 

Aliganj Gomti Nagar Prayagraj