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Blog / 02 Mar 2026

फोर्टिफाइड चावल के वितरण पर अस्थायी रोक

संदर्भ:

हाल ही में केंद्र सरकार ने प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना (PMGKAY) तथा अन्य कल्याणकारी योजनाओं जैसे- लक्षित सार्वजनिक वितरण प्रणाली (TPDS), एकीकृत बाल विकास सेवाएँ (ICDS) और पीएम-पोषण (मिड-डे मील योजना) के अंतर्गत फोर्टिफाइड चावल के वितरण को अस्थायी रूप से निलंबित कर दिया है।

निलंबन के कारण:

      • यह निर्णय इस तथ्य के आधार पर लिया गया कि केंद्रीय भंडार में चावल का 2–3 वर्षों तक लंबे समय तक भंडारण, विभिन्न आर्द्रता, तापमान और नमी की परिस्थितियों में, पोषक तत्वों के क्षरण का कारण बनता है।
      • आईआईटी के एक अध्ययन में पाया गया कि इस प्रकार पोषक तत्वों की हानि से फोर्टिफिकेशन के अपेक्षित स्वास्थ्य लाभ कम हो जाते हैं।
      • सरकार ने स्पष्ट किया है कि खाद्यान्न की पात्रता में कोई परिवर्तन नहीं किया गया है; लाभार्थियों को बेहतर प्रणाली विकसित होने तक गैर-फोर्टिफाइड चावल उपलब्ध कराया जाएगा।

फोर्टिफाइड चावल क्या है?

      • फोर्टिफाइड चावल वह सामान्य चावल है जिसमें आवश्यक सूक्ष्म पोषक तत्व, लौह (Iron), फोलिक एसिड और विटामिन B12, मिलाए जाते हैं, ताकि इसके पोषण स्तर को बढ़ाया जा सके और विशेषकर महिलाओं एवं बच्चों में छिपी भूख (Hidden Hunger) की समस्या को कम किया जा सके।
      • इस प्रक्रिया में फोर्टिफाइड राइस कर्नेल्स’ (FRKs) तैयार किए जाते हैं। इसमें चावल के आटे को सूक्ष्म पोषक तत्वों के मिश्रण के साथ एक्सट्रूज़न तकनीक द्वारा दाने के आकार में ढाला जाता है। बाद में इन्हें पॉलिश किए गए सामान्य चावल में 1:100 के अनुपात में मिलाया जाता है। इससे स्वाद या स्वरूप में कोई परिवर्तन नहीं होता, लेकिन पोषण मूल्य बढ़ जाता है।

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संबंधित योजनाएँ:

फोर्टिफाइड चावल को प्रमुख खाद्य एवं पोषण कार्यक्रमों में शामिल किया गया था:

      • PMGKAYनिःशुल्क/रियायती दर पर खाद्यान्न उपलब्ध कराना।
      • लक्षित सार्वजनिक वितरण प्रणाली (TPDS)राशन दुकानों के माध्यम से सब्सिडी वाले अनाज की आपूर्ति।
      • पीएम-पोषणविद्यालयों में मध्याह्न भोजन उपलब्ध कराना।
      • एकीकृत बाल विकास सेवाएँ (ICDS)आंगनवाड़ी केंद्रों के माध्यम से पूरक पोषण प्रदान करना।

इसका राष्ट्रीय स्तर पर क्रियान्वयन मार्च 2024 तक पूरा कर लिया गया था। यह पूरी तरह केंद्र सरकार द्वारा वित्तपोषित है तथा इसकी अवधि दिसंबर 2028 तक बढ़ाई गई है।

फोर्टिफिकेशन पहल का उद्देश्य:

इस पहल का मुख्य उद्देश्य 2024 तक सूक्ष्म पोषक तत्वों की कमी तथा लौह-अल्पता एनीमिया को कम करना था। इसे एक किफायती और व्यापक सार्वजनिक स्वास्थ्य हस्तक्षेप के रूप में लागू किया गया, ताकि कमजोर वर्गों के पोषण स्तर में व्यवस्थित सुधार किया जा सके।

फोर्टिफिकेशन प्रक्रिया के चरण:

      • फोर्टिफाइड राइस कर्नेल्स (FRKs) का निर्माणचावल के आटे में सूक्ष्म पोषक तत्व मिलाकर दाने के आकार में तैयार करना।
      • मिश्रण (Blending) – 1:100 के अनुपात में सामान्य चावल में मिलाना।
      • वितरणपीडीएस से जुड़ी योजनाओं के माध्यम से देशभर में आपूर्ति।

वर्तमान चुनौतियाँ:

      • सरकारी गोदामों में लंबी अवधि तक भंडारण।
      • पर्यावरणीय परिस्थितियों के कारण पोषक तत्वों की अस्थिरता।
      • बड़े पैमाने पर खरीद एवं वितरण में लॉजिस्टिक बाधाएँ।
      • ये समस्याएँ नीति के उद्देश्य और जमीनी क्रियान्वयन के बीच की खाई को उजागर करती हैं।

आगे की राह:

फोर्टिफिकेशन हिडन हंगरसे निपटने का महत्वपूर्ण साधन है, लेकिन इसकी प्रभावशीलता सुनिश्चित करने के लिए भंडारण और वितरण प्रणाली को सुदृढ़ करना आवश्यक है। भविष्य में संभावित उपायों में बेहतर पैकेजिंग, वितरण केंद्रों के निकट विकेंद्रीकृत मिश्रण (ब्लेंडिंग), तथा पूरक पोषण हस्तक्षेप जैसे सप्लीमेंटेशन और आहार विविधीकरण शामिल हो सकते हैं।

निष्कर्ष:

फोर्टिफाइड चावल के वितरण पर अस्थायी रोक पोषण नीति में एक व्यावहारिक पुनर्संतुलन को दर्शाती है। यद्यपि यह सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए एक महत्वपूर्ण उपकरण है, लेकिन इसकी प्रभावशीलता सुनिश्चित करने हेतु मजबूत भंडारण एवं वितरण तंत्र अनिवार्य है। वर्तमान प्रयास पोषण लक्ष्यों और लॉजिस्टिक वास्तविकताओं के बीच संतुलन स्थापित करने की दिशा में केंद्रित हैं, ताकि कमजोर वर्गों की खाद्य सुरक्षा से समझौता न हो।