संदर्भ:
हाल ही में, तमिलनाडु वन विभाग ने मद्रास उच्च न्यायालय को सूचना दी कि राज्य के भीतर 'गिद्ध सुरक्षित क्षेत्र' (Vulture Safe Zones) स्थापित करने की औपचारिक प्रक्रिया प्रारंभ कर दी गई है। इस पहल का उद्देश्य गिद्धों के लिए एक सुरक्षित वातावरण बनाना है, जो प्रमुख खतरों विशेष रूप से पशु चिकित्सा में उपयोग होने वाली विषाक्त गैर-स्टेरॉयडल एंटी-इंफ्लेमेटरी दवाओं जैसे 'डाइक्लोफेनाक' से मुक्त हो। ये दवाएं गिद्धों की सामूहिक मृत्यु के लिए जिम्मेदार रही हैं।
पृष्ठभूमि:
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- गिद्ध मांस खाने वाले पक्षी हैं जो मृत शरीरों को तेजी से खाकर महत्वपूर्ण पारिस्थितिक कार्य करते हैं, जिससे बीमारियों के प्रसार को रोका जाता है और पोषक चक्रण में मदद मिलती है। दुनिया की 23 गिद्ध प्रजातियों में से भारत में 9 प्रजातियाँ पाई जाती हैं, जिनमें से कई गंभीर संरक्षण खतरों का सामना कर रही हैं:
- अति संकटापन्न (Critically Endangered): व्हाइट-रम्प्ड (सफेद पीठ वाले), स्लेंडर-बिल्ड, लॉन्ग-बिल्ड और रेड-हेडेड (लाल सिर वाले) गिद्ध।
- संकटापन्न (Endangered): मिस्र के गिद्ध (Egyptian Vulture)।
- संकट के करीब (Near Threatened): हिमालयन ग्रिफॉन, सिनेरियस वल्चर, दाढ़ी वाले गिद्ध (Bearded Vulture)।
- अति संकटापन्न (Critically Endangered): व्हाइट-रम्प्ड (सफेद पीठ वाले), स्लेंडर-बिल्ड, लॉन्ग-बिल्ड और रेड-हेडेड (लाल सिर वाले) गिद्ध।
- गिद्धों की आबादी में गिरावट के मुख्य कारणों में डाइक्लोफेनाक विषाक्तता, सीसा संदूषण, विद्युत् लाइनों से करंट लगना, आवास का नुकसान और जानबूझकर जहर देना शामिल है।
- गिद्ध मांस खाने वाले पक्षी हैं जो मृत शरीरों को तेजी से खाकर महत्वपूर्ण पारिस्थितिक कार्य करते हैं, जिससे बीमारियों के प्रसार को रोका जाता है और पोषक चक्रण में मदद मिलती है। दुनिया की 23 गिद्ध प्रजातियों में से भारत में 9 प्रजातियाँ पाई जाती हैं, जिनमें से कई गंभीर संरक्षण खतरों का सामना कर रही हैं:
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पहल की मुख्य विशेषताएं:
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- पहला गिद्ध सुरक्षित क्षेत्र (VSZ):
- नीलगिरी बायोस्फीयर रिजर्व में मोयार नदी घाटी को पहले VSZ के रूप में पहचाना गया है।
- यह पहल गिद्ध संरक्षण विजन दस्तावेज (VDVC) 2025–2030 के तहत लागू की जा रही है।
- नीलगिरी बायोस्फीयर रिजर्व में मोयार नदी घाटी को पहले VSZ के रूप में पहचाना गया है।
- निगरानी और कार्यान्वयन समिति:
- समिति की अध्यक्षता मुदुमलई टाइगर रिजर्व के फील्ड निदेशक करेंगे। सदस्यों में नीलगिरी, गुडलूर, कोयंबटूर और इरोड के जिला वन अधिकारी; मुदुमलई, अन्नामलाई और सत्यमंगलम टाइगर रिजर्व के उप निदेशक; और AIWC (वंडालूर) का एक प्रतिनिधि शामिल होगा।
- समिति की अध्यक्षता मुदुमलई टाइगर रिजर्व के फील्ड निदेशक करेंगे। सदस्यों में नीलगिरी, गुडलूर, कोयंबटूर और इरोड के जिला वन अधिकारी; मुदुमलई, अन्नामलाई और सत्यमंगलम टाइगर रिजर्व के उप निदेशक; और AIWC (वंडालूर) का एक प्रतिनिधि शामिल होगा।
- वैज्ञानिक और कानूनी उपाय:
- गिद्धों के घोंसले के शिकार स्थलों और मृत शरीरों के हॉटस्पॉट की मैपिंग।
- प्रतिबंधित NSAIDs के अंशों का पता लगाने के लिए दो साल की निगरानी अवधि में 800 मृत शरीरों के नमूने लेना। प्रतिबंधित पशु चिकित्सा दवाओं की बिक्री और उपयोग को रोकने के लिए औषधि नियंत्रण विभाग के साथ संयुक्त निरीक्षण।
- पड़ोसी राज्यों, विशेष रूप से कर्नाटक और केरल के साथ सहयोग, ताकि क्षेत्रीय संरक्षण प्रयासों में समन्वय बना रहे।
- गिद्धों के घोंसले के शिकार स्थलों और मृत शरीरों के हॉटस्पॉट की मैपिंग।
- पहला गिद्ध सुरक्षित क्षेत्र (VSZ):
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महत्व:
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- पारिस्थितिक: यह उन 'मार्जनक' (Scavenger) प्रजातियों का संरक्षण करता है जो प्रकृति में रोग नियंत्रण और पारिस्थितिकी तंत्र की स्थिरता बनाए रखने के लिए अपरिहार्य हैं।
- संरक्षण: यह पहल राष्ट्रीय वन्यजीव कानूनों और अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलनों के अंतर्गत संरक्षित 'अति संकटापन्न' गिद्ध प्रजातियों की संख्या के पुनरुद्धार में सहायक है।
- वैज्ञानिक: यह संरक्षण नीतियों और आवास प्रबंधन की भावी रणनीतियों के निर्माण हेतु सटीक एवं ठोस क्षेत्रीय डेटा (Data) उपलब्ध कराता है।
- अंतर-राज्यीय सहयोग: यह गिद्धों के व्यापक विचरण क्षेत्र को देखते हुए, दक्षिण भारत के राज्यों के मध्य एक समन्वित और साझा संरक्षण दृष्टिकोण को बढ़ावा देता है।
- पारिस्थितिक: यह उन 'मार्जनक' (Scavenger) प्रजातियों का संरक्षण करता है जो प्रकृति में रोग नियंत्रण और पारिस्थितिकी तंत्र की स्थिरता बनाए रखने के लिए अपरिहार्य हैं।
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निष्कर्ष:
तमिलनाडु में 'गिद्ध सुरक्षित क्षेत्र' की स्थापना वैज्ञानिक और नीति-आधारित एक महत्वपूर्ण कदम है। क्षेत्र की निगरानी, कानूनी प्रवर्तन और अंतर-राज्यीय सहयोग को एकीकृत करके, यह कार्यक्रम गिद्धों की आबादी को पुनर्जीवित करने और पारिस्थितिक संतुलन को बनाए रखने का प्रयास करता है।

