संदर्भ:
हाल ही में, तमिलनाडु सरकार ने 21 सितंबर 2026 को जारी अपने सरकारी आदेश (Government Order) को वापस ले लिया। इस आदेश के तहत लोक (कानून एवं व्यवस्था) विभाग को सूचना का अधिकार (RTI) अधिनियम, 2005 के दायरे से बाहर रखा गया था। राजनीतिक दलों, नागरिक समाज संगठनों और पारदर्शिता के लिए काम करने वाले कार्यकर्ताओं की आलोचना के बाद यह आदेश वापस लिया गया।
सरकारी आदेश क्या था?
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- पहली अधिसूचना RTI अधिनियम की धारा 24(4) के तहत जारी की गई थी। इसमें लोक (कानून एवं व्यवस्था) विभाग को राज्य सरकार द्वारा स्थापित एक “खुफिया एवं सुरक्षा संगठन” के रूप में वर्गीकृत किया गया था और उसे RTI अधिनियम से छूट देने का प्रयास किया गया था।
- यह विभाग कई संवेदनशील मामलों से संबंधित कार्य करता है, जैसे:
- पुलिस गोलीबारी और हिरासत में मौतें
- पुलिस यातना के आरोप
- सांप्रदायिक और जातीय संघर्ष
- निवारक निरोध
- राजनीतिक और छात्र आंदोलन
- कानून एवं व्यवस्था से संबंधित रिपोर्ट
- मानवाधिकार से संबंधित संदर्भ और जाँच
- पुलिस गोलीबारी और हिरासत में मौतें
- इस छूट को लेकर चिंता जताई गई क्योंकि पुलिसिंग, हिरासत में मौतों और मानवाधिकारों से जुड़े मामलों की जानकारी तक नागरिकों की पहुँच सीमित हो सकती थी।
- पहली अधिसूचना RTI अधिनियम की धारा 24(4) के तहत जारी की गई थी। इसमें लोक (कानून एवं व्यवस्था) विभाग को राज्य सरकार द्वारा स्थापित एक “खुफिया एवं सुरक्षा संगठन” के रूप में वर्गीकृत किया गया था और उसे RTI अधिनियम से छूट देने का प्रयास किया गया था।
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RTI अधिनियम, 2005 क्या है?
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- सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 नागरिकों को सार्वजनिक प्राधिकरणों के पास उपलब्ध जानकारी प्राप्त करने का कानूनी अधिकार प्रदान करता है। इसका उद्देश्य पारदर्शिता और जवाबदेही को बढ़ावा देना, लोकतंत्र को मजबूत करना तथा भ्रष्टाचार पर नियंत्रण में सहायता करना है। इस अधिनियम के तहत केंद्रीय सूचना आयोग और राज्य सूचना आयोगों की स्थापना की गई है।
- RTI अधिनियम इस सिद्धांत पर आधारित है कि लोकतांत्रिक शासन के लिए जागरूक और सूचित नागरिक आवश्यक हैं।
- सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 नागरिकों को सार्वजनिक प्राधिकरणों के पास उपलब्ध जानकारी प्राप्त करने का कानूनी अधिकार प्रदान करता है। इसका उद्देश्य पारदर्शिता और जवाबदेही को बढ़ावा देना, लोकतंत्र को मजबूत करना तथा भ्रष्टाचार पर नियंत्रण में सहायता करना है। इस अधिनियम के तहत केंद्रीय सूचना आयोग और राज्य सूचना आयोगों की स्थापना की गई है।
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RTI अधिनियम के महत्वपूर्ण प्रावधान:
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- धारा 3: नागरिकों को सूचना प्राप्त करने का अधिकार प्रदान करती है।
- धारा 4: सार्वजनिक प्राधिकरणों के लिए महत्वपूर्ण सूचनाओं का स्वतः प्रकटीकरण (Proactive Disclosure) करना अनिवार्य करती है।
- धारा 6: RTI आवेदन करने की प्रक्रिया निर्धारित करती है।
- धारा 7: RTI आवेदनों के निपटारे से संबंधित है और सामान्यतः 30 दिनों की समय-सीमा निर्धारित करती है।
- धारा 8: सूचना के प्रकटीकरण से छूट से संबंधित है। इसमें राष्ट्रीय सुरक्षा, जाँच, निजता और कुछ गोपनीय सूचनाओं से संबंधित मामले शामिल हैं।
- धारा 19: प्रथम और द्वितीय अपील की व्यवस्था प्रदान करती है।
- धारा 20: निर्धारित उल्लंघनों के लिए लोक सूचना अधिकारियों पर दंड का प्रावधान करती है।
- धारा 24: कुछ खुफिया और सुरक्षा संगठनों को वैधानिक सुरक्षा उपायों के अधीन RTI अधिनियम से छूट प्रदान करती है।
- धारा 3: नागरिकों को सूचना प्राप्त करने का अधिकार प्रदान करती है।
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धारा 24 और वर्तमान मुद्दे के बारे में:
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- धारा 24(4) के तहत, राज्य सरकार अपने द्वारा स्थापित किसी खुफिया या सुरक्षा संगठन को अधिसूचना के माध्यम से RTI अधिनियम से छूट प्रदान कर सकती है।
- हालाँकि, यह छूट पूर्ण नहीं है। भ्रष्टाचार और मानवाधिकार उल्लंघन के आरोपों से संबंधित जानकारी इस छूट के दायरे से बाहर रहती है। मानवाधिकार से जुड़े मामलों में संबंधित सूचना आयोग की स्वीकृति आवश्यक होती है और ऐसी जानकारी 45 दिनों के भीतर उपलब्ध कराई जानी होती है।
- इस प्रकार, यह प्रावधान राष्ट्रीय/सुरक्षा हितों और पारदर्शिता एवं जवाबदेही के बीच संतुलन स्थापित करने का प्रयास करता है।
- धारा 24(4) के तहत, राज्य सरकार अपने द्वारा स्थापित किसी खुफिया या सुरक्षा संगठन को अधिसूचना के माध्यम से RTI अधिनियम से छूट प्रदान कर सकती है।
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निष्कर्ष:
RTI अधिनियम भागीदारीपूर्ण लोकतंत्र और जवाबदेह शासन का एक महत्वपूर्ण साधन है। साथ ही, वैध सुरक्षा और गोपनीयता से जुड़ी चिंताओं को भी नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। तमिलनाडु का यह घटनाक्रम पारदर्शिता और सुरक्षा के बीच सावधानीपूर्वक संतुलन बनाए रखने की आवश्यकता को रेखांकित करता है। यह सुनिश्चित करना आवश्यक है कि RTI से संबंधित छूट कानूनी रूप से उचित हो और नागरिकों के जानने के अधिकार को अनावश्यक रूप से कमजोर न करे।

