संदर्भ:
15 अक्टूबर 2026 को चंडीगढ़ की सुखना आर्द्रभूमि तथा उत्तर प्रदेश की सौज झील को अंतरराष्ट्रीय महत्त्व की आर्द्रभूमियों की रामसर सूची में शामिल किया गया। जिससे भारत में रामसर स्थलों की कुल संख्या बढ़कर 103 हो गई। यह उपलब्धि भारत में जैव विविधता संरक्षण और आर्द्रभूमियों के सतत प्रबंधन की दृष्टि से महत्त्वपूर्ण है।
सुखना झील (Sukhna Wetland):
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- भौगोलिक स्थिति: सुखना झील चंडीगढ़ में बाह्य हिमालय की शिवालिक पर्वतमाला की तलहटी में स्थित है। लगभग 565 एकड़ में फैली यह आर्द्रभूमि शहरी क्षेत्र के निकट एक महत्त्वपूर्ण पारिस्थितिक तंत्र है।
- पारिस्थितिक महत्त्व:
- यह मध्य एशियाई फ्लाईवे (Central Asian Flyway) से होकर आने वाले प्रवासी पक्षियों के लिए भोजन, प्रजनन, विश्राम और शीतकालीन आवास उपलब्ध कराती है।
- यहाँ संकटग्रस्त कॉमन पोचार्ड (Aythya ferina), पैलस फिश ईगल (Haliaeetus leucoryphus) और ब्लैक पॉन्ड टर्टल (Geoclemys hamiltonii) जैसी प्रजातियाँ पाई जाती हैं।
- यह आसपास के जलग्रहण क्षेत्र से आने वाले जल और तलछट के प्रवाह को नियंत्रित करने में सहायता करती है।
- यह चंडीगढ़ के निवासियों के लिए मनोरंजन, पर्यावरणीय शिक्षा और प्राकृतिक संसाधनों से जुड़ाव का महत्त्वपूर्ण केंद्र है।
- यह मध्य एशियाई फ्लाईवे (Central Asian Flyway) से होकर आने वाले प्रवासी पक्षियों के लिए भोजन, प्रजनन, विश्राम और शीतकालीन आवास उपलब्ध कराती है।
- भौगोलिक स्थिति: सुखना झील चंडीगढ़ में बाह्य हिमालय की शिवालिक पर्वतमाला की तलहटी में स्थित है। लगभग 565 एकड़ में फैली यह आर्द्रभूमि शहरी क्षेत्र के निकट एक महत्त्वपूर्ण पारिस्थितिक तंत्र है।
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सौज झील (Sauj Jheel):
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- भौगोलिक स्थिति: सौज झील उत्तर प्रदेश में गंगा नदी के बाढ़ के मैदान में स्थित एक उथली झील है। इसके आसपास कृषि भूमि फैली हुई है। यह आर्द्रभूमियों के व्यापक नेटवर्क का हिस्सा है और रामसर स्थल समान पक्षी विहार के निकट स्थित है।
- पारिस्थितिक महत्त्व:
- यहाँ कमल (Nelumbo nucifera) और जंगली गन्ना (Saccharum spontaneum) जैसी वनस्पतियाँ पाई जाती हैं।
- यह झील नियमित रूप से 30,000 से अधिक जलपक्षियों को आश्रय प्रदान करती है।
- इसे बर्डलाइफ इंटरनेशनल द्वारा महत्त्वपूर्ण पक्षी एवं जैव विविधता क्षेत्र (Important Bird and Biodiversity Area-IBA) के रूप में मान्यता प्राप्त है।
- यहाँ सुभेद्य सारस क्रेन (Grus antigone) और ग्रेटर स्पॉटेड ईगल (Clanga clanga) जैसी पक्षी प्रजातियाँ पाई जाती हैं।
- यहाँ कमल (Nelumbo nucifera) और जंगली गन्ना (Saccharum spontaneum) जैसी वनस्पतियाँ पाई जाती हैं।
- भौगोलिक स्थिति: सौज झील उत्तर प्रदेश में गंगा नदी के बाढ़ के मैदान में स्थित एक उथली झील है। इसके आसपास कृषि भूमि फैली हुई है। यह आर्द्रभूमियों के व्यापक नेटवर्क का हिस्सा है और रामसर स्थल समान पक्षी विहार के निकट स्थित है।
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रामसर कन्वेंशन क्या है?
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- रामसर कन्वेंशन आर्द्रभूमियों के संरक्षण और उनके विवेकपूर्ण उपयोग से संबंधित एक अंतरराष्ट्रीय संधि है। इसे 2 फरवरी 1971 को ईरान के रामसर शहर में अपनाया गया था तथा यह 1975 में प्रभावी हुई। भारत वर्ष 1982 में इसका पक्षकार बना।
- इसका उद्देश्य आर्द्रभूमियों के पारिस्थितिक स्वरूप को बनाए रखना, जैव विविधता का संरक्षण करना और प्राकृतिक संसाधनों के सतत उपयोग को बढ़ावा देना है।
- रामसर कन्वेंशन आर्द्रभूमियों के संरक्षण और उनके विवेकपूर्ण उपयोग से संबंधित एक अंतरराष्ट्रीय संधि है। इसे 2 फरवरी 1971 को ईरान के रामसर शहर में अपनाया गया था तथा यह 1975 में प्रभावी हुई। भारत वर्ष 1982 में इसका पक्षकार बना।
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प्रमुख चुनौतियाँ:
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- गाद का जमाव: सुखना झील में जलग्रहण क्षेत्र से आने वाली मिट्टी और तलछट जलधारण क्षमता को प्रभावित कर सकती है।
- आक्रामक प्रजातियाँ: बाहरी वनस्पतियों का प्रसार स्थानीय जैव विविधता के लिए खतरा है।
- मानवीय दबाव: शहरीकरण, पर्यटन, प्रदूषण और कृषि गतिविधियाँ प्राकृतिक आवासों को प्रभावित कर सकती हैं।
- आवासों का क्षरण एवं विनाश: शहरीकरण, भूमि पुनर्ग्रहण, अतिक्रमण और बुनियादी ढाँचे के विस्तार से आर्द्रभूमियों के प्राकृतिक आवास प्रभावित होते हैं।
- जैव विविधता पर दबाव: सौज झील में अनियंत्रित मत्स्य आखेट तथा मवेशियों की आवाजाही पक्षियों और अन्य जीवों के आवास को प्रभावित कर सकती है।
- प्रभावी प्रबंधन एवं निगरानी का अभाव: आर्द्रभूमियों की नियमित निगरानी, वैज्ञानिक आँकड़ों की उपलब्धता, विभिन्न विभागों के बीच समन्वय और संरक्षण योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन में कमी भी एक प्रमुख चुनौती है।
- गाद का जमाव: सुखना झील में जलग्रहण क्षेत्र से आने वाली मिट्टी और तलछट जलधारण क्षमता को प्रभावित कर सकती है।
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संरक्षण के लिए आवश्यक उपाय:
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- जलग्रहण क्षेत्रों में मृदा एवं नमी संरक्षण को बढ़ावा देना।
- जल गुणवत्ता और जैव विविधता की नियमित निगरानी करना।
- आक्रामक प्रजातियों को नियंत्रित करना तथा प्राकृतिक आवासों का पुनर्स्थापन करना।
- सौज झील में मौसमी मत्स्य आखेट प्रतिबंध और बारीक जालों के उपयोग पर नियंत्रण जैसे उपाय अपनाना।
- स्थानीय समुदायों की भागीदारी से संरक्षण एवं पर्यावरणीय जागरूकता बढ़ाना।
- जलग्रहण क्षेत्रों में मृदा एवं नमी संरक्षण को बढ़ावा देना।
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निष्कर्ष:
सुखना झील और सौज झील को रामसर स्थल का दर्जा मिलना भारत के आर्द्रभूमि संरक्षण प्रयासों की दिशा में महत्त्वपूर्ण उपलब्धि है। हालाँकि, अंतरराष्ट्रीय मान्यता तभी सार्थक होगी, जब वैज्ञानिक प्रबंधन, प्रभावी निगरानी और जनभागीदारी के माध्यम से इन आर्द्रभूमियों की पारिस्थितिक अखंडता बनाए रखी जाए। यह सतत विकास, जल सुरक्षा और जैव विविधता संरक्षण के लक्ष्यों को प्राप्त करने में सहायक होगा।

