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Blog / 18 May 2026

भारत और नीदरलैंड के बीच 'रणनीतिक साझेदारी' की घोषणा

भारत और नीदरलैंड के बीच 'रणनीतिक साझेदारी' की घोषणा

चर्चा में क्यों?

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 16-17 मई 2026 को नीदरलैंड की आधिकारिक यात्रा पर रहे। इस दौरान दोनों देशों ने अपने द्विपक्षीय संबंधों को 'रणनीतिक साझेदारी' (Strategic Partnership) के स्तर पर उन्नत किया है। दोनों देशो ने भविष्य की सुरक्षित आपूर्ति श्रृंखला और बुनियादी ढांचे के विकास के लिए 17 महत्वपूर्ण समझौतों पर हस्ताक्षर किए गए।

प्रमुख रणनीतिक समझौते:

      • उच्च-प्रौद्योगिकी और सेमीकंडक्टर संप्रभुता:

        • ASML-टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स समझौता: भारत की टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स ने नीदरलैंड की वैश्विक सेमीकंडक्टर दिग्गज कंपनी ASML के साथ एक महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए। ASML उन्नत लिथोग्राफी मशीनों के निर्माण में वैश्विक एकाधिकार रखती है। यह साझेदारी गुजरात के धोलेरा में भारत के पहले वाणिज्यिक सेमीकंडक्टर फैब प्लांट को मजबूत करेगी।
        • रणनीतिक रोडमैप (2026–2030): दोनों देशों ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), क्वांटम कंप्यूटिंग, अंतरिक्ष अन्वेषण और महत्वपूर्ण खनिजों (Critical Minerals) के क्षेत्र में संयुक्त अनुसंधान के लिए एक पांच वर्षीय खाका जारी किया।
      • जल प्रबंधन और जलवायु अनुकूलन:

        • कल्पसर परियोजना (Kalpasar Project): भारत के जल शक्ति मंत्रालय और डच बुनियादी ढांचा मंत्रालय ने गुजरात की कल्पसर परियोजना के लिए तकनीकी सहयोग के 'लेटर ऑफ इंटेंट' पर हस्ताक्षर किए। इसके तहत खंभात की खाड़ी में मीठे पानी का जलाशय बनाने के लिए डच बाढ़-नियंत्रण और भूमि पुनर्प्राप्ति (Land Reclamation) तकनीकों का उपयोग किया जाएगा।
        • IIT दिल्ली में उत्कृष्टता केंद्र: सतत जल विज्ञान और अपशिष्ट जल प्रबंधन की चुनौतियों से निपटने के लिए IIT दिल्ली में एक 'Centre of Excellence on Water' की स्थापना की गई।
      • सांस्कृतिक कूटनीति और रक्षा सहयोग:

        • चोल-कालीन पुरावशेषों की वापसी: नीदरलैंड सरकार ने 11वीं शताब्दी के चोल-कालीन तांबे के अभिलेख (Copper Plates) औपचारिक रूप से भारत को सौंपे। इन्हें 1712 में नागापट्टिनम से यूरोप ले जाया गया था। यह भारत की 'सॉफ्ट पावर' की एक बड़ी सफलता है।
        • रक्षा सह-उत्पादन: रक्षा उपकरणों के संयुक्त निर्माण, प्रौद्योगिकी हस्तांतरण (ToT) और संयुक्त उद्यम स्थापित करने के लिए एक रक्षा रोडमैप पर सहमति बनी।

आर्थिक और द्विपक्षीय व्यापारिक सम्बन्ध:

नीदरलैंड वर्तमान में यूरोपीय संघ (EU) में भारत के सबसे महत्वपूर्ण आर्थिक स्तंभों में से एक है:

      • FDI निवेश: नीदरलैंड भारत में चौथा सबसे बड़ा विदेशी प्रत्यक्ष निवेशक (FDI) है, जिसका संचयी निवेश $55.6 बिलियन से अधिक है।
      • द्विपक्षीय व्यापार: वित्तीय वर्ष 2024-25 में दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार $27.8 बिलियन तक पहुंच गया है।
      • व्यापारिक प्रवेश द्वार: नीदरलैंड का रॉटरडैम बंदरगाह (Port of Rotterdam) यूरोपीय महाद्वीप में भारतीय माल के प्रवेश के लिए मुख्य 'गेटवे' का काम करता है।

भारत के लिए प्रमुख लाभ:

      • तकनीकी आत्मनिर्भरता: सेमीकंडक्टर और AI में डच सहयोग भारत की आत्मनिर्भर भारतऔर डिजिटल इंडियापहलों के लिए एक महत्वपूर्ण आधार बनेगा।
      • जलवायु सुदृढ़ता: नीदरलैंड की जल-निकासी और तटीय प्रबंधन तकनीकें मुंबई और चेन्नई जैसे तटीय शहरों को जलवायु परिवर्तन के जोखिमों से सुरक्षित रखने में सहायक होंगी।
      • हिंद-प्रशांत सुरक्षा: दोनों देश एक मुक्त, खुले और नियम-आधारित हिंद-प्रशांत (Indo-Pacific) क्षेत्र का समर्थन करते हैं, जो वैश्विक समुद्री व्यापार और सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण है।

निष्कर्ष:

भारत-नीदरलैंड संबंधों का यह नया चरण केवल व्यापारिक लेनदेन तक सीमित नहीं है, बल्कि यह भविष्य के लिए तैयार (Future-Ready) तकनीकी और पर्यावरणीय साझेदारी का निर्माण है। सेमीकंडक्टर संप्रभुता, खाद्य सुरक्षा और जलवायु सुदृढ़ता जैसे साझा लक्ष्यों के साथ यह रणनीतिक साझेदारी वैश्विक भू-राजनीति में एक मजबूत धुरी बनकर उभर रही है।

 

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