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Blog / 15 Jan 2026

सोमालिलैंड का रणनीतिक महत्व

संदर्भ

सोमालिया से अलग होकर 1991 में स्वयं को स्वतंत्र गणराज्य घोषित करने वाला सोमालिलैंड, दिसंबर 2025 में इज़राइल द्वारा मान्यता दिए जाने के बाद पुनः वैश्विक ध्यान के केंद्र में आ गया है। इज़राइल ऐसा करने वाला पहला संयुक्त राष्ट्र सदस्य देश है, जिसने औपचारिक रूप से सोमालिलैंड की स्वतंत्रता को मान्यता दी।
सोमालिलैंड को लंबे समय तक अंतरराष्ट्रीय मान्यता नहीं मिली, फिर भी इसकी रणनीतिक भौगोलिक स्थिति विशेषकर बाब-एल-मंदेब जलडमरूमध्य के निकटता ने इसे रेड सी और हॉर्न ऑफ़ अफ्रीका की उभरती भू-राजनीति में एक महत्वपूर्ण केंद्र बना दिया है।

सोमालिलैंड के बारे में

सोमालिलैंड, आधिकारिक रूप से रिपब्लिक ऑफ़ सोमालिलैंड, हॉर्न ऑफ़ अफ्रीका में स्थित एक स्वयं-घोषित संप्रभु राज्य है। यद्यपि इसकी अपनी सरकार, मुद्रा और सेना है तथा यह एक स्वतंत्र इकाई की तरह कार्य करता है, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इसे सोमालिया का एक स्वायत्त क्षेत्र ही माना जाता है।

सोमालिलैंड का महत्व

सोमालिलैंड अदन की खाड़ी के किनारे स्थित है और यह विश्व के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री चोक-पॉइंट्स में से एक, हिंद महासागर को रेड सी और स्वेज नहर से जोड़ने वाले मार्ग पर है। इस मार्ग से विश्व के लगभग 12% वैश्विक व्यापार का आवागमन होता है, जिससे ऊर्जा आपूर्ति, वाणिज्यिक नौवहन और नौसैनिक अभियानों के लिए इसकी स्थिरता और पहुँच अत्यंत महत्वपूर्ण हो जाती है।
यमन के हूती विद्रोहियों द्वारा रेड सी में जहाजों पर बढ़ते हमलों ने इस क्षेत्र के रणनीतिक महत्व को और अधिक बढ़ा दिया है।

बर्बेरा बंदरगाह और सैन्य अवसंरचना

सोमालिलैंड के रणनीतिक मूल्य के केंद्र में बर्बेरा बंदरगाह और हवाई पट्टी है, जिसे 2016 से संयुक्त अरब अमीरात (UAE) द्वारा दीर्घकालिक रियायत के तहत विकसित किया जा रहा है।
इस उन्नति के बाद यह बंदरगाह बड़े नौसैनिक जहाजों, ड्रोन और सैन्य विमानों की मेज़बानी करने में सक्षम हो गया है, जिससे यह एक प्रमुख वाणिज्यिक केंद्र से संभावित सैन्य लॉजिस्टिक्स बेस में परिवर्तित हो रहा है। विश्लेषकों के अनुसार, यहाँ व्यापार-केंद्रित हितों से हटकर व्यापक सुरक्षा और शक्ति-प्रक्षेपण उद्देश्यों की ओर क्रमिक झुकाव देखा जा रहा है।

इज़राइल और यूएई की रुचि

इज़राइल के लिए, सोमालिलैंड यमन में हूती गतिविधियों की निगरानी और संभावित प्रतिक्रिया हेतु एक रणनीतिक मंच प्रदान करता है, जिससे रेड सी क्षेत्र में उसकी निगरानी और परिचालन क्षमता का विस्तार होता है। यह कदम अब्राहम समझौते के तहत इज़राइल यूएई सुरक्षा सहयोग को भी पूरक करता है।
यूएई ने औपचारिक मान्यता से परहेज़ करते हुए भी इज़राइल के इस कदम का विरोध नहीं किया है, क्योंकि वह संभावित कूटनीतिक लागत की तुलना में रणनीतिक पहुँच और सुरक्षा हितों को प्राथमिकता देता है।

क्षेत्रीय और वैश्विक प्रतिक्रियाएँ

सोमालिया ने इस मान्यता को अपनी संप्रभुता का उल्लंघन बताया और यूएई के साथ समझौते रद्द कर दिए।
तुर्की, जो सोमालिया का प्रमुख सहयोगी है, ने चिंता व्यक्त की कि क्षेत्रीय विखंडन उसके सैन्य और आर्थिक निवेशों को कमजोर कर सकता है।
मिस्र ने ऐसे कदमों का विरोध किया जो रेड सी में उसके सुरक्षा हितों को प्रभावित कर सकते हैं।
चीन ने सोमालिलैंड के ताइवान से संबंधों और इज़राइल के साथ उसके झुकाव के कारण इस विकास का विरोध किया।
संयुक्त राज्य अमेरिका ने इज़राइल के मान्यता देने के अधिकार का समर्थन किया, लेकिन क्षेत्रीय गठबंधनों और व्यापक भू-राजनीतिक संतुलन को ध्यान में रखते हुए स्वयं ऐसा करने में सावधानी बरती।

निष्कर्ष

जैसे-जैसे रेड सी में असुरक्षा बढ़ती जा रही है और महाशक्तियों की प्रतिस्पर्धा गहराती जा रही है, सोमालिलैंड का भविष्य संभवतः उसके लोकतांत्रिक प्रमाण-पत्रों से कम और इस बात से अधिक तय होगा कि क्षेत्रीय और वैश्विक शक्तियाँ सुरक्षा आवश्यकताओं को संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता के मानकों के साथ कैसे संतुलित करती हैं।