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Blog / 20 Jan 2026

सोमनाथ स्वाभिमान पर्व

संदर्भ:

हाल ही में गुजरात के गिर सोमनाथ जिले में सोमनाथ स्वाभिमान पर्व (1026–2026) का आयोजन किया गया। यह पर्व गुजरात स्थित ऐतिहासिक सोमनाथ मंदिर पर हुए पहले प्रमुख आक्रमण की 1,000वीं वर्षगांठ के अवसर पर मनाया गया।

सोमनाथ मंदिर के बारे में:

        • सोमनाथ मंदिर भगवान शिव को समर्पित एक अत्यंत प्राचीन और प्रमुख हिंदू तीर्थस्थल है, जो गुजरात के गिर सोमनाथ जिले में वेरावल के निकट प्रभास पाटन में, भारत के पश्चिमी तट पर स्थित है।
        • इसे बारह ज्योतिर्लिंगों (द्वादश ज्योतिर्लिंग) में प्रथम माना जाता है, जहाँ भगवान शिव की आराधना प्रकाश के दिव्य स्तंभ अर्थात् ज्योतिर्लिंग के रूप में की जाती है।
        • सोमनाथका शाब्दिक अर्थ है चंद्रमा के अधिपति। यह नाम एक प्राचीन पौराणिक कथा से जुड़ा है, जिसके अनुसार चंद्रदेव ने अपने क्षीण हुए तेज को पुनः प्राप्त करने के लिए इसी स्थल पर भगवान शिव की तपस्या और उपासना की थी।

Press Note Details: Press Information Bureau

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि:

        • यह स्थल प्राचीन काल से ही एक प्रमुख तीर्थ और धार्मिक केंद्र रहा है, जिसका उल्लेख स्कंद पुराण, भागवत पुराण सहित अनेक प्राचीन धार्मिक ग्रंथों में मिलता है।
        • सोमनाथ मंदिर का इतिहास बार-बार हुए ध्वंस और पुनर्निर्माण से जुड़ा हुआ है। पहला प्रमुख ऐतिहासिक आक्रमण 1026 ईस्वी में महमूद ग़ज़नवी द्वारा किया गया, जिसके बाद मंदिर के विनाश और पुनर्स्थापना का क्रम आरंभ हुआ।
        • मध्यकालीन कालखंड में विभिन्न शासकों और वंशों द्वारा इस मंदिर को कई बार नष्ट किया गया, किंतु प्रत्येक बार इसका पुनर्निर्माण हुआ, जिससे सोमनाथ मंदिर आस्था, अदम्य संकल्प और सांस्कृतिक निरंतरता का एक सशक्त प्रतीक बनकर उभरा।

आधुनिक पुनर्निर्माण:

        • भारत की स्वतंत्रता के पश्चात सरदार वल्लभभाई पटेल के प्रेरणादायी नेतृत्व और पहल पर सोमनाथ मंदिर के आधुनिक पुनर्निर्माण का कार्य आरंभ किया गया।
        • पुनर्निर्मित सोमनाथ मंदिर का निर्माण कार्य पूर्ण होने के बाद मई 1951 में इसका विधिवत प्राण-प्रतिष्ठा एवं लोकार्पण संपन्न हुआ।

वास्तुकला:

        • सोमनाथ मंदिर का निर्माण चालुक्य (मारु-गुर्जर) स्थापत्य शैली में किया गया है, जो गुजरात की पारंपरिक एवं समृद्ध मंदिर वास्तुकला की विशिष्ट पहचान मानी जाती है।
        • मंदिर की संरचना में उत्कृष्ट और सूक्ष्म पत्थर की नक्काशी, लगभग 155 फीट ऊँचा भव्य शिखर, तथा गर्भगृह और मंडप जैसे आवश्यक वास्तु अंग सम्मिलित हैं।
        • मंदिर परिसर अरब सागर की ओर उन्मुख है और त्रिवेणी संगम के समीप स्थित है, जहाँ कपिला, हिरण और सरस्वती नदियों का संगम होता है, जिससे इसकी पवित्रता और तीर्थीय महत्व और अधिक बढ़ जाता है।

हजार वर्षीय स्मृति उत्सव का महत्व

        • सभ्यतागत प्रतीकात्मकता:
          • स्वाभिमान पर्व भारतीय सभ्यता की अडिग और अटूट आत्मा का प्रतीक है। यह दर्शाता है कि बार-बार विनाश के बावजूद एक पवित्र स्थल को सामूहिक संकल्प, आस्था और श्रद्धा के बल पर पुनः स्थापित किया जाता रहा है।
          • यह गाथा आध्यात्मिक दृढ़ता, सांस्कृतिक स्वाभिमान और राष्ट्रीय पहचान जैसे व्यापक विषयों से जुड़ी हुई है, जिससे यह आयोजन केवल धार्मिक न रहकर गहरे सभ्यतागत महत्व को भी अभिव्यक्त करता है।
        • राष्ट्रीय एकता:
          • शौर्य यात्रा जैसे आयोजनों तथा देशभर से लोगों की व्यापक सहभागिता यह स्पष्ट करती है कि यह पर्व किसी एक क्षेत्र या समुदाय तक सीमित नहीं है, बल्कि यह राष्ट्रीय एकता, सांस्कृतिक चेतना और सामूहिक गौरव का सशक्त प्रतीक बनकर उभरा है।

निष्कर्ष:

सोमनाथ स्वाभिमान पर्व एक हजार वर्षों से चली आ रही अटूट आस्था, सांस्कृतिक दृढ़ता और आध्यात्मिक निरंतरता का सशक्त प्रतीक है। अपनी भव्य वास्तुकला से परे, सोमनाथ मंदिर भारत की उस शाश्वत सभ्यतागत शक्ति को अभिव्यक्त करता है, जिसके बल पर देश ने प्रत्येक विपत्ति का सामना किया, आस्था को बार-बार पुनर्जीवित किया और सदियों से अपनी सांस्कृतिक विरासत को सुरक्षित व जीवंत बनाए रखा।