संदर्भ:
हाल ही में, केंद्रीय श्रम एवं रोजगार मंत्रालय ने दो वैधानिक निकायों के गठन की अधिसूचना जारी की है। इनमें 40 सदस्यों वाला असंगठित श्रमिकों के लिए राष्ट्रीय सामाजिक सुरक्षा बोर्ड तथा 22 सदस्यों वाला गिग और प्लेटफॉर्म श्रमिकों के लिए राष्ट्रीय सामाजिक सुरक्षा बोर्ड शामिल हैं। इन बोर्डों का उद्देश्य विभिन्न श्रेणियों के श्रमिकों के लिए लक्षित कल्याणकारी योजनाओं को तैयार करना, उनकी सिफारिश करना और उनकी निगरानी करना है।
राष्ट्रीय सामाजिक सुरक्षा बोर्डों के बारे में:
दोनों बोर्डों का गठन सामाजिक सुरक्षा संहिता, 2020 के वैधानिक ढाँचे के तहत किया गया है। इनके प्रमुख कार्यों में शामिल हैं:
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- असंगठित, गिग और प्लेटफॉर्म श्रमिकों के लिए उपयुक्त सामाजिक सुरक्षा योजनाओं की सिफारिश करना।
- सामाजिक सुरक्षा संहिता के प्रशासन के संबंध में केंद्र सरकार को सलाह देना।
- कल्याणकारी योजनाओं के कार्यान्वयन की निगरानी करना।
- राज्य स्तर पर रिकॉर्ड रखने की व्यवस्था तथा संबंधित निधियों से किए गए व्यय की समीक्षा करना।
- सामाजिक सुरक्षा के दायरे को बढ़ाने के लिए उपायों की सिफारिश करना।
- दोनों बोर्डों की बैठक वर्ष में कम-से-कम तीन बार आयोजित करना अनिवार्य है। केंद्रीय श्रम एवं रोजगार मंत्री मनसुख मांडविया दोनों बोर्डों के अध्यक्ष होंगे, जबकि केंद्रीय श्रम सचिव उपाध्यक्ष होंगे। इन बोर्डों में केंद्र और राज्य सरकारों, एग्रीगेटर कंपनियों, नियोक्ताओं, ट्रेड यूनियनों तथा नागरिक समाज संगठनों के प्रतिनिधि शामिल हैं।
- असंगठित, गिग और प्लेटफॉर्म श्रमिकों के लिए उपयुक्त सामाजिक सुरक्षा योजनाओं की सिफारिश करना।
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सामाजिक सुरक्षा संहिता, 2020 के बारे में:
सामाजिक सुरक्षा संहिता, 2020 मौजूदा सामाजिक सुरक्षा कानूनों को एकीकृत और सरल बनाती है। इसका उद्देश्य संगठित और असंगठित दोनों क्षेत्रों के श्रमिकों तक सामाजिक सुरक्षा का विस्तार करना है।
इसके प्रमुख प्रावधानों में शामिल हैं:
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- धारा 6: असंगठित श्रमिकों के लिए राष्ट्रीय सामाजिक सुरक्षा बोर्ड तथा राज्य स्तरीय बोर्डों के गठन का प्रावधान करती है।
- धारा 109: केंद्र सरकार को असंगठित श्रमिकों के लिए सामाजिक सुरक्षा योजनाएँ बनाने का अधिकार देती है।
- धारा 113: कल्याणकारी लाभों तक पहुँच सुनिश्चित करने के लिए असंगठित, गिग और प्लेटफॉर्म श्रमिकों के पंजीकरण का प्रावधान करती है।
- धारा 114: केंद्र सरकार को गिग और प्लेटफॉर्म श्रमिकों के लिए सामाजिक सुरक्षा योजनाएँ बनाने का अधिकार देती है। इनमें जीवन एवं दिव्यांगता बीमा, दुर्घटना बीमा, स्वास्थ्य एवं मातृत्व लाभ, वृद्धावस्था सुरक्षा तथा शिशु देखभाल केंद्र (क्रेच) की सुविधाएँ शामिल हैं।
- धारा 6: असंगठित श्रमिकों के लिए राष्ट्रीय सामाजिक सुरक्षा बोर्ड तथा राज्य स्तरीय बोर्डों के गठन का प्रावधान करती है।
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गिग और प्लेटफॉर्म श्रमिकों के बारे में:
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- गिग श्रमिक (Gig Workers): ऐसे व्यक्ति जो पारंपरिक नियोक्ता-कर्मचारी संबंधों से बाहर काम करते हैं। उदाहरण के लिए, फ्रीलांसर और स्वतंत्र सेवा प्रदाता।
- प्लेटफॉर्म श्रमिक (Platform Workers): ऐसे व्यक्ति जो ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के माध्यम से काम करते हैं। उदाहरण के लिए, खाद्य वितरण भागीदार और ऐप आधारित ड्राइवर।
- असंगठित श्रमिक (Unorganised Workers): ऐसे श्रमिक जो असंगठित क्षेत्र में घरेलू स्तर पर काम करने, स्वरोजगार या मजदूरी आधारित गतिविधियों में संलग्न होते हैं।
- गिग श्रमिक (Gig Workers): ऐसे व्यक्ति जो पारंपरिक नियोक्ता-कर्मचारी संबंधों से बाहर काम करते हैं। उदाहरण के लिए, फ्रीलांसर और स्वतंत्र सेवा प्रदाता।
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इस विकास का महत्त्व:
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- सामाजिक सुरक्षा का विस्तार: ऐसे श्रमिकों को संस्थागत सहायता प्रदान करना, जिनके पास अक्सर स्वास्थ्य बीमा, पेंशन और दुर्घटना सुरक्षा जैसी सुविधाएँ उपलब्ध नहीं होती हैं।
- गिग अर्थव्यवस्था को मान्यता: रोजगार के बदलते स्वरूप और डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम करने वाले श्रमिकों की कल्याण संबंधी आवश्यकताओं को मान्यता प्रदान करना।
- संस्थागत समन्वय: सरकारों, नियोक्ताओं, एग्रीगेटर कंपनियों और श्रमिक संगठनों को एक साझा मंच पर लाना।
- साझा जिम्मेदारी: श्रमिकों की सामाजिक सुरक्षा में योगदान देने के लिए एग्रीगेटर कंपनियों को प्रोत्साहित करना।
- कल्याणकारी योजनाओं का बेहतर क्रियान्वयन: कल्याणकारी योजनाओं की निगरानी और समीक्षा से पारदर्शिता तथा जवाबदेही को मजबूत किया जा सकता है।
- सामाजिक सुरक्षा का विस्तार: ऐसे श्रमिकों को संस्थागत सहायता प्रदान करना, जिनके पास अक्सर स्वास्थ्य बीमा, पेंशन और दुर्घटना सुरक्षा जैसी सुविधाएँ उपलब्ध नहीं होती हैं।
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निष्कर्ष:
इन बोर्डों का गठन भारत के बदलते श्रम बाजार में समावेशी सामाजिक सुरक्षा सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्त्वपूर्ण कदम है। हालाँकि, इनकी सफलता प्रभावी कार्यान्वयन, पर्याप्त वित्तीय संसाधनों और श्रमिकों तक वास्तविक रूप से लाभ पहुँचाने पर निर्भर करेगी।

