संदर्भ:
हाल ही में, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने भारत के छह राज्यों में राज्यपालों की नियुक्तियों की घोषणा की। राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर को तमिलनाडु का राज्यपाल नियुक्त किया गया, जबकि ओम प्रकाश माथुर को सिक्किम से केरलम स्थानांतरित किया गया। कर्नाटक, ओडिशा, उत्तराखंड और सिक्किम में भी चार नए राज्यपाल नियुक्त किए गए। ये नियुक्तियाँ उस तिथि से प्रभावी होंगी, जिस दिन संबंधित नियुक्त व्यक्ति पदभार ग्रहण करेंगे।
नए राज्यपालों की सूची:
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राज्य |
नियुक्त राज्यपाल |
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तमिलनाडु |
राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर |
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केरलम (केरल) |
ओम प्रकाश माथुर |
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कर्नाटक |
डॉ. सुधा यादव |
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ओडिशा |
ब्रज मोहन राम |
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उत्तराखंड |
डॉ. धल सिंह बिसेन |
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सिक्किम |
दुष्यंत गौतम |
पृष्ठभूमि:
राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर मार्च 2026 से केरलम के राज्यपाल के रूप में कार्य कर रहे थे और तमिलनाडु का अतिरिक्त प्रभार भी संभाल रहे थे। नवीनतम नियुक्ति के बाद उन्हें तमिलनाडु की पूर्णकालिक जिम्मेदारी मिल गई है। ओम प्रकाश माथुर, जिन्होंने जुलाई 2024 में सिक्किम के राज्यपाल के रूप में कार्यभार संभाला था, केरलम में आर्लेकर का स्थान लेंगे। अन्य चार नियुक्तियों के माध्यम से संबंधित राज्यों को नए राज्यपाल मिले हैं।
संवैधानिक प्रावधान:
राज्यपाल का पद भारतीय संविधान के भाग VI के अंतर्गत शासित होता है।
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- अनुच्छेद 153: प्रत्येक राज्य के लिए एक राज्यपाल का प्रावधान करता है। एक ही व्यक्ति को दो या दो से अधिक राज्यों का राज्यपाल नियुक्त किया जा सकता है।
- अनुच्छेद 155: राज्यपाल की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा अपने हस्ताक्षर और मुहर सहित अधिपत्र के माध्यम से की जाती है।
- अनुच्छेद 156: राज्यपाल राष्ट्रपति के प्रसादपर्यंत पद धारण करता है और सामान्यतः उसका कार्यकाल पाँच वर्ष का होता है, जो संवैधानिक प्रावधानों के अधीन है।
- अनुच्छेद 157: राज्यपाल के रूप में नियुक्ति के लिए योग्यताएँ निर्धारित करता है। व्यक्ति का भारत का नागरिक होना और कम-से-कम 35 वर्ष की आयु का होना आवश्यक है।
- अनुच्छेद 158: राज्यपाल के पद की शर्तों को निर्धारित करता है, जिसमें लाभ का अन्य पद धारण करने पर प्रतिबंध भी शामिल हैं।
- अनुच्छेद 163: मुख्यमंत्री के नेतृत्व में मंत्रिपरिषद का प्रावधान करता है, जो राज्यपाल को सहायता और सलाह देती है, सिवाय उन मामलों के जहाँ संविधान राज्यपाल को विवेकाधिकार का प्रयोग करने की आवश्यकता देता है।
- अनुच्छेद 200: राज्य विधानमंडल द्वारा पारित किसी विधेयक को स्वीकृति के लिए प्रस्तुत किए जाने पर राज्यपाल के विकल्पों से संबंधित है।
- अनुच्छेद 153: प्रत्येक राज्य के लिए एक राज्यपाल का प्रावधान करता है। एक ही व्यक्ति को दो या दो से अधिक राज्यों का राज्यपाल नियुक्त किया जा सकता है।
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राज्यपाल की भूमिका एवं शक्तियाँ:
राज्यपाल राज्य का संवैधानिक प्रमुख होता है और केंद्र तथा राज्य सरकारों के बीच एक कड़ी के रूप में कार्य करता है। राज्यपाल मुख्यमंत्री की नियुक्ति करता है और मुख्यमंत्री की सलाह पर अन्य मंत्रियों की नियुक्ति करता है; राज्य विधानमंडल के सत्र बुलाता है और सत्रावसान करता है; तथा संविधान के प्रावधानों के अनुसार विधेयकों को स्वीकृति प्रदान करता है। राज्यपाल संवैधानिक सीमाओं के भीतर कुछ न्यायिक, विधायी और विवेकाधीन कार्य भी करता है।
निष्कर्ष:
छह राज्यों में राज्यपालों की नियुक्ति भारत के संवैधानिक प्रशासन के क्षेत्र में एक महत्त्वपूर्ण घटनाक्रम है। राज्यपाल का पद संवैधानिक शासन की रक्षा करता है, लेकिन इसका कामकाज लोकतांत्रिक जवाबदेही, सहकारी संघवाद और संविधान के सिद्धांतों के अनुरूप होना चाहिए।

