संदर्भ:
हाल ही में केरल के साइलेंट वैली राष्ट्रीय उद्यान में किए गए एक पक्षी सर्वेक्षण में 192 पक्षी प्रजातियों को दर्ज किया गया, जो इस क्षेत्र की समृद्ध जैव विविधता और पारिस्थितिक महत्व को दर्शाता है। यह सर्वेक्षण 6–8 मार्च 2026 के बीच केरल वन विभाग और मालाबार नेचुरल हिस्ट्री सोसाइटी द्वारा संयुक्त रूप से किया गया, जिसमें केरल और तमिलनाडु से लगभग 85 पक्षी प्रेमियों (Birdwatchers) ने भाग लिया।
सर्वेक्षण के प्रमुख निष्कर्ष:
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- उच्च पक्षी विविधता:
- सर्वेक्षण में 192 पक्षी प्रजातियों का दस्तावेजीकरण किया गया, जो पार्क में पक्षियों की स्थिति का अब तक का सबसे व्यापक आकलन माना जा रहा है।
- इससे पहले 2023 में किए गए सर्वेक्षण में 175 प्रजातियाँ दर्ज की गई थीं, जिससे इस बार दर्ज विविधता में वृद्धि दिखाई देती है।
- सर्वेक्षण में 192 पक्षी प्रजातियों का दस्तावेजीकरण किया गया, जो पार्क में पक्षियों की स्थिति का अब तक का सबसे व्यापक आकलन माना जा रहा है।
- दुर्लभ प्रवासी पक्षियों की उपस्थिति: सर्वेक्षण में कुछ दुर्लभ प्रवासी पक्षियों को भी दर्ज किया गया, जैसे:
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- एशियन हाउस मार्टिन
- वेस्टर्न हाउस मार्टिन
- एशियन हाउस मार्टिन
- ये प्रवासी पक्षी सामान्यतः उत्तरी एशिया और यूरोप जैसे क्षेत्रों से आते हैं, जो यह दर्शाता है कि यह उद्यान वैश्विक प्रवासी पक्षी मार्गों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
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- पश्चिमी घाट की स्थानिक प्रजातियाँ (Endemic Species): सर्वेक्षण में पश्चिमी घाट की 20 स्थानिक प्रजातियों की भी पहचान की गई, जिनमें शामिल हैं:
- नीलगिरि लाफिंगथ्रश
- ब्लैक-एंड-ऑरेंज फ्लायकैचर
- व्हाइट-बेलीड ट्रीपाई
- नीलगिरि पिपिट
- व्हाइट-बेलीड ब्लू फ्लायकैचर
- नीलगिरि शोलाकिली (नीलगिरि ब्लू रॉबिन)
- स्थानिक प्रजातियाँ वे होती हैं जो केवल किसी विशेष भौगोलिक क्षेत्र में ही पाई जाती हैं, इसलिए संरक्षण की दृष्टि से उनका विशेष महत्व होता है।
- नीलगिरि लाफिंगथ्रश
- पक्षियों के प्रजनन के प्रमाण: शोधकर्ताओं ने कई पक्षियों में प्रजनन गतिविधियों को भी दर्ज किया, जैसे:
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- श्रीलंकन फ्रॉगमाउथ
- इंडियन नाइटजार
- मालाबार ट्रोगन
- क्रिमसन-बैक्ड सनबर्ड
- मालाबार ग्रे हॉर्नबिल
- श्रीलंकन फ्रॉगमाउथ
- यह दर्शाता है कि साइलेंट वैली केवल पक्षियों का निवास स्थान ही नहीं, बल्कि एक महत्वपूर्ण प्रजनन स्थल (Breeding Ground) भी है।
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- उच्च पक्षी विविधता:
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साइलेंट वैली राष्ट्रीय उद्यान के बारे में:
साइलेंट वैली राष्ट्रीय उद्यान केरल के पलक्कड़ जिले में स्थित है और यह पश्चिमी घाट के नीलगिरि बायोस्फीयर रिज़र्व का हिस्सा है।
इसकी प्रमुख विशेषताएँ:
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- भारत के अंतिम शेष अविकृत उष्णकटिबंधीय सदाबहार वर्षावनों में से एक।
- उच्च स्थानिकता (Endemism) और जैव विविधता के लिए प्रसिद्ध।
- कुंथिपुझा नदी, जो भरतपुझा नदी की एक सहायक नदी है, इस उद्यान से होकर बहती है।
- यहाँ लायन-टेल्ड मकाक, नीलगिरि लंगूर और मालाबार जायंट स्क्विरल जैसी प्रजातियों का निवास है।
- पश्चिमी घाट, जहाँ यह उद्यान स्थित है, विश्व के आठ “सबसे गर्म” जैव विविधता हॉटस्पॉट्स में से एक के रूप में मान्यता प्राप्त है।
- भारत के अंतिम शेष अविकृत उष्णकटिबंधीय सदाबहार वर्षावनों में से एक।
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पारिस्थितिक महत्व:
यह सर्वेक्षण साइलेंट वैली की कई पारिस्थितिक भूमिकाओं को उजागर करता है:
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- स्थानिक और संकटग्रस्त प्रजातियों के लिए एक महत्वपूर्ण आश्रय स्थल।
- प्रवासी पक्षियों के लिए एक महत्वपूर्ण ठहराव स्थल (Stopover Site)।
- पश्चिमी घाट में पारिस्थितिकी तंत्र की स्थिरता और जैव विविधता बनाए रखने में योगदान।
- जैव विविधता निगरानी और संरक्षण योजना के लिए महत्वपूर्ण डेटा प्रदान करता है।
- स्थानिक और संकटग्रस्त प्रजातियों के लिए एक महत्वपूर्ण आश्रय स्थल।
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निष्कर्ष:
साइलेंट वैली राष्ट्रीय उद्यान में 192 पक्षी प्रजातियों का दर्ज होना पश्चिमी घाट के इस वर्षावन पारिस्थितिकी तंत्र के पारिस्थितिक महत्व को रेखांकित करता है। ऐसे आवासों को जलवायु परिवर्तन, आवास विखंडन और मानव हस्तक्षेप जैसे खतरों से बचाने के लिए निरंतर जैव विविधता सर्वेक्षण और संरक्षण प्रयास आवश्यक हैं। संरक्षण उपायों को मजबूत करने से साइलेंट वैली को एक वैश्विक जैव विविधता धरोहर और महत्वपूर्ण पक्षी आवास के रूप में सुरक्षित रखा जा सकेगा।

