संदर्भ:
हाल ही में, भारत ने उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ में स्थित शेखा झील पक्षी विहार को रामसर स्थलों की सूची में शामिल किया है, जिससे देश में रामसर कन्वेंशन के तहत अंतरराष्ट्रीय महत्व वाली आर्द्रभूमियों (वेटलैंड्स) की संख्या बढ़कर 99 हो गई है।
शेखा झील पक्षी विहार के बारे में:
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- शेखा झील अलीगढ़ जिले में स्थित एक मीठे पानी की आर्द्रभूमि (फ्रेशवॉटर वेटलैंड) है, जो शहर से लगभग 17 किलोमीटर दूर और लगभग 25 हेक्टेयर क्षेत्र में फैली हुई है। यह एक मानव-निर्मित आर्द्रभूमि है, जो 1852 में ऊपरी गंगा नहर से रिसाव के कारण बनी थी, लेकिन समय के साथ यह एक समृद्ध पारिस्थितिक आवास (इकोलॉजिकल हैबिटैट) के रूप में विकसित हो गई है।
- यह मध्य एशियाई फ्लाईवे (Central Asian Flyway) पर एक महत्वपूर्ण पड़ाव है, जहाँ हर साल लगभग 20,000 प्रवासी पक्षी आते हैं। यह आर्द्रभूमि लगभग 249 पक्षी प्रजातियों को आश्रय देती है, जिनमें 60 से अधिक आर्द्रभूमि-निर्भर प्रजातियाँ शामिल हैं, जैसे बार-हेडेड गूज, पेंटेड स्टॉर्क, विभिन्न प्रकार की बत्तखें, और उत्तर प्रदेश का राज्य पक्षी सारस क्रेन। इसके अलावा, यह क्षेत्र नीलगाय, काला हिरण और नेवले जैसे स्थलीय जीवों को भी समर्थन देता है, जो इसकी जैव विविधता को दर्शाता है।
- शेखा झील अलीगढ़ जिले में स्थित एक मीठे पानी की आर्द्रभूमि (फ्रेशवॉटर वेटलैंड) है, जो शहर से लगभग 17 किलोमीटर दूर और लगभग 25 हेक्टेयर क्षेत्र में फैली हुई है। यह एक मानव-निर्मित आर्द्रभूमि है, जो 1852 में ऊपरी गंगा नहर से रिसाव के कारण बनी थी, लेकिन समय के साथ यह एक समृद्ध पारिस्थितिक आवास (इकोलॉजिकल हैबिटैट) के रूप में विकसित हो गई है।
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रामसर कन्वेंशन के बारे में:
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- रामसर कन्वेंशन एक अंतरराष्ट्रीय संधि है, जिसे 1971 में ईरान के रामसर शहर में अपनाया गया था। इसका उद्देश्य आर्द्रभूमियों (वेटलैंड्स) का संरक्षण और उनका सतत उपयोग सुनिश्चित करना है।
- इसका मुख्य सिद्धांत “सतत उपयोग” (Wise Use) है, जिसके तहत पर्यावरणीय संरक्षण और विकास के बीच संतुलन बनाए रखते हुए आर्द्रभूमियों का उपयोग किया जाता है। इस कन्वेंशन के अंतर्गत प्राकृतिक और मानव-निर्मित दोनों प्रकार की आर्द्रभूमियाँ शामिल होती हैं, चाहे वे स्थायी हों या अस्थायी, मीठे पानी की हों या खारे पानी की, और यहाँ तक कि ज्वार के समय छह मीटर गहराई तक के तटीय समुद्री क्षेत्र भी इसमें शामिल होते हैं।
- हर साल 2 फरवरी को विश्व आर्द्रभूमि दिवस (World Wetlands Day) मनाया जाता है ताकि लोगों में आर्द्रभूमियों के संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाई जा सके।
- रामसर कन्वेंशन एक अंतरराष्ट्रीय संधि है, जिसे 1971 में ईरान के रामसर शहर में अपनाया गया था। इसका उद्देश्य आर्द्रभूमियों (वेटलैंड्स) का संरक्षण और उनका सतत उपयोग सुनिश्चित करना है।
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भारत में रामसर साइट्स:
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- भारत ने 1982 में रामसर कन्वेंशन में शामिल हुआ।
- 99 साइटों के साथ भारत एशिया में प्रथम और विश्व स्तर पर यूनाइटेड किंगडम और मैक्सिको के बाद तीसरे स्थान पर है।
- तमिलनाडु में सबसे अधिक रामसर साइट्स (20) हैं, इसके बाद उत्तर प्रदेश (12) का स्थान है।
- पश्चिम बंगाल का सुंदरबन वेटलैंड भारत का सबसे बड़ा रामसर स्थल है, जबकि हिमाचल प्रदेश की रेणुका झील सबसे छोटी है।
- भारत ने 1982 में रामसर कन्वेंशन में शामिल हुआ।
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भारत में आर्द्रभूमियों का संरक्षण विभिन्न कानूनों के तहत किया जाता है, जैसे- वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972; पर्यावरण संरक्षण अधिनियम, 1986; और आर्द्रभूमि नियम, 2017
निष्कर्ष:
शेखा झील को रामसर स्थल के रूप में शामिल किया जाना भारत की आर्द्रभूमि संरक्षण और जैव विविधता सुरक्षा के प्रति बढ़ती प्रतिबद्धता को दर्शाता है। यह पारिस्थितिक सुरक्षा को मजबूत करता है, वैश्विक प्रवासी पक्षी मार्गों (flyways) के संरक्षण में मदद करता है और विकास तथा पर्यावरणीय संतुलन के प्रति भारत के दृष्टिकोण को स्पष्ट करता है।

