संदर्भ:
हाल ही में शंघाई सहयोग संगठन (SCO) के शासनाध्यक्षों की परिषद (Council of Heads of Government- CHG) की 25वीं बैठक 20 अक्टूबर, 2026 को दुशांबे, ताजिकिस्तान में आयोजित की गई। इस बैठक में क्षेत्रीय आर्थिक सहयोग, व्यापार, संपर्क व्यवस्था, डिजिटल विकास और सुरक्षा संबंधी चुनौतियों पर चर्चा की गई। भारत ने आतंकवाद-रोधी प्रयासों, संप्रभुता के सम्मान और समावेशी आर्थिक विकास पर बल दिया।
शंघाई सहयोग संगठन (SCO) के बारे में:
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- SCO एक यूरेशियाई अंतर-सरकारी संगठन है, जिसकी स्थापना 15 जून, 2001 को हुई थी। इसका विकास ‘शंघाई फाइव’ (Shanghai Five) तंत्र से हुआ, जिसका मुख्य उद्देश्य सीमा सुरक्षा और विश्वास-निर्माण को बढ़ावा देना था।
- मुख्यालय: बीजिंग, चीन
- सदस्य: चीन, रूस, भारत, पाकिस्तान, कजाकिस्तान, किर्गिस्तान, ताजिकिस्तान, उज्बेकिस्तान, ईरान और बेलारूस।
- भारत की सदस्यता: भारत 2017 में इसका पूर्ण सदस्य बना।
- उद्देश्य: क्षेत्रीय सुरक्षा, आतंकवाद-रोधी प्रयास, आर्थिक सहयोग और सांस्कृतिक आदान-प्रदान।
- मुख्यालय: बीजिंग, चीन
- SCO का सचिवालय बीजिंग में स्थित है, जबकि इसका क्षेत्रीय आतंकवाद-रोधी ढाँचा (Regional Anti-Terrorist Structure- RATS) उज्बेकिस्तान के ताशकंद में स्थित है।
- SCO एक यूरेशियाई अंतर-सरकारी संगठन है, जिसकी स्थापना 15 जून, 2001 को हुई थी। इसका विकास ‘शंघाई फाइव’ (Shanghai Five) तंत्र से हुआ, जिसका मुख्य उद्देश्य सीमा सुरक्षा और विश्वास-निर्माण को बढ़ावा देना था।
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बैठक के प्रमुख परिणाम:
इस बैठक में आर्थिक और संस्थागत पहलों के माध्यम से सदस्य देशों के बीच सहयोग को मजबूत करने पर ध्यान केंद्रित किया गया।
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- आर्थिक सहयोग: वर्ष 2026–2030 के लिए बहुपक्षीय व्यापार और आर्थिक सहयोग संबंधी कार्ययोजना को अपनाना।
- क्षेत्रीय सुरक्षा: आतंकवाद, उग्रवाद, अलगाववाद और आतंकवादी वित्तपोषण से निपटने पर जोर।
- संपर्क व्यवस्था: परिवहन गलियारों और बेहतर क्षेत्रीय व्यापार संपर्कों पर चर्चा।
- डिजिटल विकास: डिजिटल प्रौद्योगिकियों, नवाचार और डिजिटल व्यापार को सुगम बनाने को बढ़ावा देना।
- संस्थागत सहयोग: SCO के संस्थागत तंत्र को मजबूत करने तथा अंतरराष्ट्रीय सीमाओं के पार होने वाले अपराधों के विरुद्ध सहयोग का समर्थन।
- आर्थिक सहयोग: वर्ष 2026–2030 के लिए बहुपक्षीय व्यापार और आर्थिक सहयोग संबंधी कार्ययोजना को अपनाना।
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भारत के रणनीतिक और आर्थिक हित:
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- सुरक्षा: SCO भारत को आतंकवाद, उग्रवाद और क्षेत्रीय स्थिरता से जुड़े मुद्दों पर यूरेशियाई देशों के साथ समन्वय करने के लिए एक मंच प्रदान करता है।
- ऊर्जा सुरक्षा: मध्य एशिया के ऊर्जा संसाधन भारत को ऊर्जा आपूर्ति के स्रोतों में विविधता लाने और महत्त्वपूर्ण खनिजों तक पहुँच प्राप्त करने के अवसर प्रदान करते हैं।
- संपर्क व्यवस्था: अंतरराष्ट्रीय उत्तर-दक्षिण परिवहन गलियारा (International North–South Transport Corridor—INSTC) और चाबहार बंदरगाह मध्य एशियाई बाजारों तक भारत की पहुँच को बेहतर बना सकते हैं।
- आर्थिक सहयोग: भारत फार्मास्यूटिकल्स, सूचना प्रौद्योगिकी, कृषि और इंजीनियरिंग सेवाओं के क्षेत्र में व्यापार का विस्तार कर सकता है।
- बहुपक्षीय कूटनीति: SCO भारत को रणनीतिक स्वायत्तता और बहुध्रुवीय अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था को बढ़ावा देते हुए प्रमुख क्षेत्रीय शक्तियों के साथ जुड़ने का अवसर प्रदान करता है।
- सुरक्षा: SCO भारत को आतंकवाद, उग्रवाद और क्षेत्रीय स्थिरता से जुड़े मुद्दों पर यूरेशियाई देशों के साथ समन्वय करने के लिए एक मंच प्रदान करता है।
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प्रमुख चुनौतियाँ:
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- अपनी संभावनाओं के बावजूद, SCO को कई बाधाओं का सामना करना पड़ता है:
- भारत–पाकिस्तान तनाव: राजनीतिक और सुरक्षा संबंधी मतभेद सहयोग को सीमित करते हैं।
- भारत–चीन मतभेद: सीमा विवाद और रणनीतिक अविश्वास द्विपक्षीय संबंधों को प्रभावित करते हैं।
- संपर्क संबंधी बाधाएँ: भू-राजनीतिक तनाव, प्रतिबंध और अपर्याप्त बुनियादी ढाँचा क्षेत्रीय व्यापार को जटिल बनाते हैं।
- हितों में भिन्नता: सदस्य देशों की रणनीतिक प्राथमिकताएँ अलग-अलग हैं।
- क्रियान्वयन की कमी: सामूहिक घोषणाएँ हमेशा ठोस परिणामों में परिवर्तित नहीं हो पाती हैं।
- भारत–पाकिस्तान तनाव: राजनीतिक और सुरक्षा संबंधी मतभेद सहयोग को सीमित करते हैं।
- भारत इस बात पर भी जोर देता है कि संपर्क संबंधी पहलों में संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान किया जाना चाहिए।
- अपनी संभावनाओं के बावजूद, SCO को कई बाधाओं का सामना करना पड़ता है:
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आगे की राह:
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- SCO को खुफिया जानकारी साझा करने और आतंकवाद-रोधी सहयोग को मजबूत करना चाहिए, व्यापार संबंधी बाधाओं को कम करना चाहिए, सीमा शुल्क प्रक्रियाओं में सुधार करना चाहिए तथा पारदर्शी संपर्क व्यवस्था को बढ़ावा देना चाहिए।
- डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना, शिक्षा, अनुसंधान और सांस्कृतिक आदान-प्रदान के क्षेत्र में अधिक सहयोग से क्षेत्रीय एकीकरण को बढ़ावा मिल सकता है। संस्थागत प्रभावशीलता में सुधार के लिए स्पष्ट क्रियान्वयन लक्ष्य और समय-समय पर समीक्षा आवश्यक हैं।
- SCO को खुफिया जानकारी साझा करने और आतंकवाद-रोधी सहयोग को मजबूत करना चाहिए, व्यापार संबंधी बाधाओं को कम करना चाहिए, सीमा शुल्क प्रक्रियाओं में सुधार करना चाहिए तथा पारदर्शी संपर्क व्यवस्था को बढ़ावा देना चाहिए।
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निष्कर्ष:
दुशांबे में आयोजित यह बैठक क्षेत्रीय स्थिरता और आर्थिक विकास को बढ़ावा देने में SCO की संभावनाओं को रेखांकित करती है। भारत के लिए इस संगठन के साथ रचनात्मक जुड़ाव सुरक्षा, ऊर्जा और संपर्क संबंधी हितों को आगे बढ़ाने में सहायक हो सकता है। हालाँकि, इसकी दीर्घकालिक प्रभावशीलता आपसी विश्वास, संप्रभुता के सम्मान तथा व्यावहारिक और परिणामोन्मुखी पहलों के प्रभावी क्रियान्वयन पर निर्भर करेगी।

