सतह के निकट स्थित कोयला/लिग्नाइट गैसीकरण परियोजनाओं को बढ़ावा देने की योजना
संदर्भ:
हाल ही में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने सतह के निकट स्थित कोयला/लिग्नाइट गैसीकरण परियोजनाओं को बढ़ावा देने की योजना को मंजूरी दी। इस योजना के लिए कुल ₹37,500 करोड़ का वित्तीय प्रावधान किया गया है। यह योजना भारत के कोयला गैसीकरण कार्यक्रम को तेज़ी देने तथा 2030 तक 100 मिलियन टन कोयले के गैसीकरण के राष्ट्रीय लक्ष्य को प्राप्त करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
कोयला गैसीकरण के बारे में:
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- कोयला गैसीकरण (Coal Gasification) एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमें कोयला या लिग्नाइट को संश्लेषण गैस (Syngas) में परिवर्तित किया जाता है। सिंगैस मुख्यतः कार्बन मोनोऑक्साइड, हाइड्रोजन तथा अन्य गैसों से मिलकर बनी होती है। इसका उपयोग उर्वरक, मेथनॉल, अमोनिया, सिंथेटिक प्राकृतिक गैस, ईंधन तथा औद्योगिक रसायनों के उत्पादन में किया जा सकता है। यह तकनीक कोयला संसाधनों के विविध एवं अपेक्षाकृत स्वच्छ उपयोग को संभव बनाती है।
- भारत वर्तमान में LNG, मेथनॉल, अमोनिया, यूरिया तथा कोकिंग कोल का बड़ी मात्रा में आयात करता है। वित्त वर्ष 2025 में इन उत्पादों का आयात बिल लगभग ₹2.77 लाख करोड़ तक पहुँच गया, जिससे देश अंतरराष्ट्रीय मूल्य उतार-चढ़ाव और भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं के प्रति संवेदनशील बन जाता है। कोयला गैसीकरण घरेलू कोयला संसाधनों का अधिक कुशल उपयोग करके इस निर्भरता को कम करने में सहायक हो सकता है।
- कोयला गैसीकरण (Coal Gasification) एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमें कोयला या लिग्नाइट को संश्लेषण गैस (Syngas) में परिवर्तित किया जाता है। सिंगैस मुख्यतः कार्बन मोनोऑक्साइड, हाइड्रोजन तथा अन्य गैसों से मिलकर बनी होती है। इसका उपयोग उर्वरक, मेथनॉल, अमोनिया, सिंथेटिक प्राकृतिक गैस, ईंधन तथा औद्योगिक रसायनों के उत्पादन में किया जा सकता है। यह तकनीक कोयला संसाधनों के विविध एवं अपेक्षाकृत स्वच्छ उपयोग को संभव बनाती है।
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योजना की प्रमुख विशेषताएँ:
इस योजना में कोयला गैसीकरण परियोजनाओं में निवेश को प्रोत्साहित करने के लिए कई महत्वपूर्ण प्रावधान शामिल किए गए हैं:
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- नई सतही कोयला एवं लिग्नाइट गैसीकरण परियोजनाओं के लिए ₹37,500 करोड़ की कुल वित्तीय सहायता।
- संयंत्र एवं मशीनरी की लागत का अधिकतम 20% तक प्रोत्साहन (Incentive)।
- लगभग 75 मिलियन टन कोयला एवं लिग्नाइट के गैसीकरण को सुगम बनाने का लक्ष्य।
- पारदर्शी प्रतिस्पर्धी बोली प्रक्रिया (Competitive Bidding Process) के माध्यम से वित्तीय सहायता।
- परियोजना की प्रगति (Milestones) से जुड़ी चार किस्तों में प्रोत्साहन राशि जारी की जाएगी।
- प्रत्येक परियोजना के लिए अधिकतम ₹5,000 करोड़ तक की प्रोत्साहन सीमा।
- प्रौद्योगिकी-तटस्थ (Technology-neutral) दृष्टिकोण, जिसमें स्वदेशी तकनीकों को प्रोत्साहन दिया जाएगा।
- गैर-विनियमित क्षेत्र (Non-Regulated Sector) ढाँचे के अंतर्गत कोयला लिंकेज अवधि को 30 वर्षों तक बढ़ाने का प्रावधान।
- नई सतही कोयला एवं लिग्नाइट गैसीकरण परियोजनाओं के लिए ₹37,500 करोड़ की कुल वित्तीय सहायता।
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रणनीतिक एवं आर्थिक लाभ:
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- इस योजना से ₹2.5–3 लाख करोड़ के निवेश आकर्षित होने तथा कोयला उत्पादक क्षेत्रों में लगभग 50,000 प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रोजगार सृजित होने की संभावना है। इससे कोयले के अधिक उपयोग एवं कराधान के माध्यम से सरकारी राजस्व में भी वृद्धि होगी।
- कोयला गैसीकरण भारत की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत कर सकता है, क्योंकि इससे LNG, अमोनिया, मेथनॉल तथा कोकिंग कोल के आयात पर निर्भरता कम होगी। इसके अतिरिक्त, यह घरेलू औद्योगिक क्षमता को बढ़ावा देगा तथा स्वदेशी तकनीकों को प्रोत्साहित करेगा, जिससे विदेशी इंजीनियरिंग कंपनियों पर निर्भरता घटेगी।
- इस योजना से ₹2.5–3 लाख करोड़ के निवेश आकर्षित होने तथा कोयला उत्पादक क्षेत्रों में लगभग 50,000 प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रोजगार सृजित होने की संभावना है। इससे कोयले के अधिक उपयोग एवं कराधान के माध्यम से सरकारी राजस्व में भी वृद्धि होगी।
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भारत में कोयले का वितरण एवं चुनौतियाँ:
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- भारत के कोयला भंडार मुख्यतः गोंडवाना कोयला क्षेत्रों (Gondwana Coalfields) में स्थित हैं, जो कुल भंडार का लगभग 98% हिस्सा हैं। प्रमुख कोयला उत्पादक राज्यों में झारखण्ड, ओडिशा, छत्तीसगढ़, पश्चिम बंगाल और मध्य प्रदेश शामिल हैं।
- कोयले के प्रमुख प्रकार हैं- एन्थ्रासाइट (Anthracite), बिटुमिनस (Bituminous), सब-बिटुमिनस (Sub-bituminous), लिग्नाइट (Lignite) तथा पीट (Peat)।
- महत्त्वपूर्ण ऊर्जा संसाधन होने के बावजूद, कोयला कई पर्यावरणीय और सामाजिक चुनौतियाँ भी उत्पन्न करता है। कोयले के दहन से कार्बन उत्सर्जन एवं प्रदूषण में भारी वृद्धि होती है। खनन गतिविधियों के कारण भूमि क्षरण, पारिस्थितिकीय क्षति तथा जनजातीय समुदायों के विस्थापन जैसी समस्याएँ भी उत्पन्न होती हैं।
- भारत के कोयला भंडार मुख्यतः गोंडवाना कोयला क्षेत्रों (Gondwana Coalfields) में स्थित हैं, जो कुल भंडार का लगभग 98% हिस्सा हैं। प्रमुख कोयला उत्पादक राज्यों में झारखण्ड, ओडिशा, छत्तीसगढ़, पश्चिम बंगाल और मध्य प्रदेश शामिल हैं।
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निष्कर्ष:
सतह के निकट स्थित कोयला/लिग्नाइट गैसीकरण परियोजनाओं को बढ़ावा देने की योजना कोयला संसाधनों के स्वच्छ एवं विविध उपयोग की दिशा में एक महत्वपूर्ण नीतिगत पहल है। सिंगैस उत्पादन को बढ़ावा देकर तथा आयात निर्भरता कम करके यह योजना भारत की ऊर्जा सुरक्षा और औद्योगिक विकास को मजबूत कर सकती है। हालाँकि, भारत के कोयला क्षेत्र की दीर्घकालिक सफलता के लिए पर्यावरणीय स्थिरता सुनिश्चित करना तथा सामाजिक चिंताओं का समाधान करना अत्यंत आवश्यक होगा।

