सन्दर्भ:
हाल ही में प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने मार्च 2031 तक ₹25,530 करोड़ के परिव्यय के साथ सार्थक-पीडीएस योजना के विस्तार और निरंतरता को मंजूरी दी। इस निर्णय का उद्देश्य प्रौद्योगिकी-आधारित सुधारों और बेहतर लॉजिस्टिक्स के माध्यम से भारत की सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) का आधुनिकीकरण करना है।
सार्थक-पीडीएस योजना के बारे में:
सार्थक-पीडीएस योजना भारत की सार्वजनिक वितरण प्रणाली को सुदृढ़ करने हेतु एक समग्र (Umbrella) सुधार कार्यक्रम है, जिसमें निम्नलिखित योजनाओ एकीकरण किया गया है:
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- पूर्व की लॉजिस्टिक्स एवं परिवहन सहायता योजनाएँ
- SMART-PDS डिजिटल सुधार पहल
- पूर्व की लॉजिस्टिक्स एवं परिवहन सहायता योजनाएँ
इसका उद्देश्य राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (NFSA) के अंतर्गत एक एकीकृत, प्रौद्योगिकी-सक्षम और दक्ष खाद्य वितरण प्रणाली विकसित करना है।
सार्थक-पीडीएस योजना की प्रमुख विशेषताएँ:
यह योजना PDS की संपूर्ण मूल्य श्रृंखला (Value Chain) को शामिल करती है:
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- लाभार्थियों की पहचान
- खरीद एवं भंडारण लॉजिस्टिक्स
- खाद्यान्नों का परिवहन
- उचित मूल्य दुकानों (Fair Price Shops – FPS) का संचालन
- शिकायत निवारण एवं नागरिक प्रतिक्रिया प्रणाली
- लाभार्थियों की पहचान
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इसके अतिरिक्त, यह योजना निम्नलिखित सुविधाएँ भी प्रदान करती है:
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- राज्यों के भीतर खाद्यान्न परिवहन हेतु केंद्रीय सहायता
- FPS डीलरों के लिए संशोधित मार्जिन
- राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों के लिए निरंतर वित्तीय सहायता ढाँचा
- राज्यों के भीतर खाद्यान्न परिवहन हेतु केंद्रीय सहायता
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सार्थक-पीडीएस योजना में प्रौद्योगिकी का एकीकरण:
यह योजना उन्नत डिजिटल सुधारों को बढ़ावा देती है, जिनमें शामिल हैं:
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- कृत्रिम बुद्धिमत्ता
- मशीन लर्निंग
- प्राकृतिक भाषा प्रसंस्करण
- ब्लॉकचेन प्रौद्योगिकी
- कृत्रिम बुद्धिमत्ता
प्रमुख डिजिटल घटक:
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- रियल-टाइम मॉनिटरिंग सिस्टम
- एकीकृत लाभार्थी डेटाबेस
- राज्य कमांड एवं नियंत्रण केंद्र
- AI-आधारित शिकायत निवारण प्रणाली
- ISO-प्रमाणित प्रक्रिया ढाँचे
- रियल-टाइम मॉनिटरिंग सिस्टम
भारत में सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) के बारे में:
सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) भारत की सबसे बड़ी खाद्य सुरक्षा व्यवस्था है, जिसके अंतर्गत किसानों से सुनिश्चित मूल्य पर खाद्यान्न खरीदे जाते हैं और उन्हें उचित मूल्य दुकानों (Fair Price Shops – FPS), जिन्हें सामान्यतः राशन की दुकान कहा जाता है, के माध्यम से कमजोर वर्गों को रियायती दरों पर वितरित किया जाता है।
प्रमुख तथ्य:
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- 81 करोड़ से अधिक NFSA लाभार्थियों को कवर करती है
- 5.3 लाख से अधिक उचित मूल्य दुकानें (FPS) संचालित हैं
- चावल, गेहूँ आदि रियायती खाद्यान्न उपलब्ध कराए जाते हैं
- इसका संचालन केंद्र और राज्य सरकारों द्वारा संयुक्त रूप से किया जाता है
- 81 करोड़ से अधिक NFSA लाभार्थियों को कवर करती है
सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) की कार्यप्रणाली:
खरीद
केंद्र सरकार, मुख्यतः भारतीय खाद्य निगम (FCI) के माध्यम से, न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर गेहूँ और चावल जैसे खाद्यान्नों की खरीद करती है।
भंडारण एवं लॉजिस्टिक्स
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- खाद्यान्नों को FCI के गोदामों और साइलो में संग्रहीत किया जाता है।
- केंद्र सरकार खाद्यान्नों को आगे वितरण हेतु राज्य डिपो तक पहुँचाती है।
- खाद्यान्नों को FCI के गोदामों और साइलो में संग्रहीत किया जाता है।
आवंटन और उठान
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- केंद्र सरकार जनसंख्या और गरीबी अनुपात के आधार पर राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों को खाद्यान्न आवंटित करती है।
- राज्य सरकारें खाद्यान्न उठाकर उन्हें राज्य गोदामों तक पहुँचाती हैं।
- केंद्र सरकार जनसंख्या और गरीबी अनुपात के आधार पर राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों को खाद्यान्न आवंटित करती है।
राज्य के भीतर वितरण
राज्य सरकारें राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (NFSA), 2013 के अंतर्गत पात्र लाभार्थियों की पहचान करती हैं और राशन कार्ड जारी करती हैं।
NFSA के अंतर्गत श्रेणियाँ:
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- अंत्योदय अन्न योजना (AAY): प्रति परिवार प्रति माह 35 किलोग्राम खाद्यान्न
- प्राथमिकता परिवार (PHH): प्रति व्यक्ति प्रति माह 5 किलोग्राम खाद्यान्न
- अंत्योदय अन्न योजना (AAY): प्रति परिवार प्रति माह 35 किलोग्राम खाद्यान्न
राज्य सरकारें राज्य गोदामों से FPS दुकानों तक खाद्यान्न पहुँचाने की व्यवस्था सुनिश्चित करती हैं।
अंतिम वितरण एवं सत्यापन:
लाभार्थी निम्न माध्यमों से FPS से खाद्यान्न प्राप्त करते हैं:
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- आधार प्रमाणीकरण
- e-POS बायोमेट्रिक सत्यापन
- आधार प्रमाणीकरण
खाद्यान्न अत्यधिक रियायती दरों पर वितरित किए जाते हैं।
निष्कर्ष:
वर्ष 2031 तक सार्थक-पीडीएस योजना का विस्तार भारत की खाद्य सुरक्षा व्यवस्था के आधुनिकीकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। उन्नत प्रौद्योगिकियों को कल्याणकारी वितरण प्रणाली के साथ एकीकृत करके यह योजना “सभी के लिए खाद्य सुरक्षा” के लक्ष्य के अनुरूप एक पारदर्शी, दक्ष और नागरिक-केंद्रित सार्वजनिक वितरण प्रणाली विकसित करने का प्रयास करती है।

