अरावली में दिखी रस्टी-स्पॉटेड बिल्ली
सन्दर्भ:
हाल ही में, हरियाणा के फरीदाबाद जिले (दिल्ली-एनसीआर) के अरावली क्षेत्र के वन्यजीव कॉरिडोर में “रस्टि-स्पॉटेड कैट” की उपस्थिति देखी गई। कोट गाँव के पास एक मादा बिल्ली और उसके शावक की तस्वीरें दर्ज की गईं। यह पहली बार है जब इस दुर्लभ बिल्ली के प्रजनन (breeding) के ठोस प्रमाण इस क्षेत्र में मिले हैं, जो अरावली पारिस्थितिकी तंत्र के स्वास्थ्य के लिए एक सकारात्मक संकेत है।
रस्टि-स्पॉटेड कैट के बारे में:
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- रस्टि-स्पॉटेड कैट दुनिया की सबसे छोटी जंगली बिल्लियों में से एक है, जिसकी शरीर की लंबाई लगभग 35–48 सेमी होती है, जिसमें लगभग आधा हिस्सा इसकी पूंछ का होता है।
- इसका फर छोटा और धूसर-लाल रंग का होता है, जिस पर जंग जैसे धब्बे होते हैं, जो इसे शुष्क वनों और झाड़ियों में छिपने में मदद करते हैं।
- यह एक अत्यंत छुपा हुआ (secretive) और रात्रिचर (nocturnal) जीव है, जिसके कारण इसकी दृश्यता बहुत दुर्लभ होती है।
- यह भारत, श्रीलंका और नेपाल में पाया जाता है, लेकिन इसकी आबादी बिखरी हुई और कम घनत्व वाली है। इसके लगभग 75% आवास कृषि, शहरी विस्तार और भूमि उपयोग परिवर्तन के कारण दबाव में हैं।
- यह प्रजाति IUCN रेड लिस्ट में “निकट संकटग्रस्त” (Near Threatened) श्रेणी में सूचीबद्ध है और भारत में इसे वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 की अनुसूची-I के तहत सर्वोच्च कानूनी संरक्षण प्राप्त है।
- रस्टि-स्पॉटेड कैट दुनिया की सबसे छोटी जंगली बिल्लियों में से एक है, जिसकी शरीर की लंबाई लगभग 35–48 सेमी होती है, जिसमें लगभग आधा हिस्सा इसकी पूंछ का होता है।
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भारत में अन्य छोटी जंगली बिल्लियाँ के बारे में:
भारत में कई कम ज्ञात छोटी जंगली बिल्लियाँ पाई जाती हैं, जो कृन्तक (rodent) आबादी को नियंत्रित करके और खाद्य श्रृंखला को संतुलित रखकर पारिस्थितिक संतुलन बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।
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- फिशिंग कैट (Fishing Cat): फिशिंग कैट (Fishing Cat) एक मजबूत तैराक होती है और आर्द्रभूमि (wetlands) के लिए अनुकूलित है। यह सुंदरबन, गंगा–ब्रह्मपुत्र बेसिन और पश्चिमी घाट के कुछ हिस्सों में पाई जाती है। यह आवास क्षति, प्रदूषण और शहरीकरण के कारण “लुप्तप्राय (Endangered)” श्रेणी में है और इसे अनुसूची-I के तहत संरक्षण प्राप्त है।
- काराकल: काराकल (Caracal) एक मध्यम आकार की रात्रिचर बिल्ली है, जिसकी पहचान इसके काले कानों के गुच्छों (ear tufts) से होती है। भारत में यह अब बहुत दुर्लभ है और मुख्यतः राजस्थान तथा गुजरात में पाई जाती है। वैश्विक स्तर पर इसे कम चिंताजनक (Least Concern) माना जाता है, लेकिन भारत में यह गंभीर रूप से संकटग्रस्त है और अनुसूची-I के तहत संरक्षित है।
- एशियाई वाइल्डकैट: एशियाई वाइल्डकैट (Asiatic Wildcat) शुष्क क्षेत्रों, विशेषकर थार मरुस्थल में पाया जाता है। इसका रेतीला रंग इसे सूखे आवासों में छिपने में मदद करता है। यद्यपि यह वैश्विक स्तर पर कम चिंताजनक (Least Concern) श्रेणी में है, लेकिन स्थानीय आबादी आवास दबाव का सामना कर रही है और इसे भी अनुसूची-I के तहत संरक्षण प्राप्त है।
- फिशिंग कैट (Fishing Cat): फिशिंग कैट (Fishing Cat) एक मजबूत तैराक होती है और आर्द्रभूमि (wetlands) के लिए अनुकूलित है। यह सुंदरबन, गंगा–ब्रह्मपुत्र बेसिन और पश्चिमी घाट के कुछ हिस्सों में पाई जाती है। यह आवास क्षति, प्रदूषण और शहरीकरण के कारण “लुप्तप्राय (Endangered)” श्रेणी में है और इसे अनुसूची-I के तहत संरक्षण प्राप्त है।
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अरावली पर्वतमाला का पारिस्थितिक महत्व:
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- अरावली पर्वतमाला विश्व की सबसे प्राचीन पर्वत श्रृंखलाओं में से एक है, जो गुजरात, राजस्थान, हरियाणा और दिल्ली तक फैली हुई है। खनन, वनों की कटाई और शहरीकरण से हुए क्षरण के बावजूद यह पारिस्थितिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण बनी हुई है।
- यह मरुस्थलीकरण को रोकने, जलवायु को नियंत्रित करने और वन्यजीवों की आवाजाही के लिए जैव विविधता गलियारों (biodiversity corridors) का समर्थन करने में मदद करती है। रस्टि-स्पॉटेड कैट की उपस्थिति इसकी पारिस्थितिक लचीलापन (ecological resilience) को दर्शाती है और झाड़ीदार व शुष्क वन पारिस्थितिकी तंत्रों के त्वरित संरक्षण की आवश्यकता को उजागर करती है।
- अरावली पर्वतमाला विश्व की सबसे प्राचीन पर्वत श्रृंखलाओं में से एक है, जो गुजरात, राजस्थान, हरियाणा और दिल्ली तक फैली हुई है। खनन, वनों की कटाई और शहरीकरण से हुए क्षरण के बावजूद यह पारिस्थितिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण बनी हुई है।
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निष्कर्ष:
अरावली में रस्टि-स्पॉटेड कैट की पुनः उपस्थिति यह दर्शाती है कि नाजुक और शहरी क्षेत्रों के निकट स्थित पारिस्थितिकी तंत्र भी दुर्लभ वन्यजीवों का समर्थन कर सकते हैं। फिश कैट, काराकल और एशियाई वाइल्डकैट जैसी प्रजातियों के साथ मिलकर यह भारत की समृद्ध लेकिन संवेदनशील जैव विविधता को दर्शाता है। अरावली जैसे क्षेत्रों में आवास संरक्षण को मजबूत करना इन दुर्लभ प्रजातियों की रक्षा और पारिस्थितिक संतुलन बनाए रखने के लिए अत्यंत आवश्यक है।

