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Blog / 03 Jun 2026

रुद्रएम-II मिसाइल: भारत का स्वदेशी एंटी-रेडिएशन हथियार

सन्दर्भ:

हाल ही में रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) और भारतीय वायु सेना (IAF) ने ओडिशा तट के पास सुखोई-30 MKI लड़ाकू विमान से स्वदेशी रुद्रम-II’ (RudraM-II) हवा से सतह पर मार करने वाली एंटी-रेडिएशन मिसाइल का सफल उड़ान परीक्षण किया है। यह परीक्षण भारत की सामरिक क्षमता और रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता (आत्मनिर्भर भारत) की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है।

रुद्रम-II के बारे में:

      • रुद्रम-II भारत की अगली पीढ़ी की अत्यंत उन्नत हाइपरसोनिक एंटी-रेडिएशन मिसाइल है। इसे मुख्य रूप से शत्रु वायु रक्षा दमन/विनाश (SEAD/DEAD) अभियानों के लिए विकसित किया गया है।
      • इसका मुख्य उद्देश्य युद्ध की स्थिति में शत्रु के जमीनी रडार, ट्रैकिंग प्रणाली, संचार नेटवर्क तथा रेडियो-आवृत्ति (Radio Frequency) उत्सर्जित करने वाले ठिकानों को नष्ट करना है, जिससे उनकी वायु रक्षा प्रणाली निष्क्रिय हो जाती है।

RudraM-II Missile

प्रमुख तकनीकी विशेषताएँ:

      • मारक क्षमता (Range): यह मिसाइल लगभग 300 से 350 किलोमीटर तक लक्ष्य पर प्रहार करने में सक्षम है। इससे भारतीय लड़ाकू विमान शत्रु क्षेत्र में प्रवेश किए बिना सुरक्षित दूरी (Standoff Distance) से हमला कर सकते हैं।
      • गति (Speed): रुद्रम-II की गति मैक 5.5 (Mach 5.5) तक पहुँच सकती है। इतनी तीव्र गति के कारण शत्रु के वायु रक्षा तंत्र को प्रतिक्रिया देने का समय बहुत कम मिलता है।
      • वजन एवं वारहेड: यह लगभग 200 किलोग्राम तक का पारंपरिक वारहेड ले जाने में सक्षम है।
      • प्रक्षेपण ऊँचाई: इसे 3 किलोमीटर से 15 किलोमीटर की ऊँचाई से लड़ाकू विमानों द्वारा प्रक्षेपित किया जा सकता है।
      • प्रणोदन प्रणाली: यह ठोस-ईंधन आधारित रॉकेट मोटर द्वारा संचालित होती है, जो उच्च विश्वसनीयता एवं निरंतर थ्रस्ट प्रदान करती है।
      • उन्नत मार्गदर्शन प्रणाली: रुद्रम-II की सबसे बड़ी विशेषता इसकी बहु-स्तरीय (Multi-layered) और हाइब्रिड मार्गदर्शन प्रणाली है:

पैसिव रडार होमिंग (PRH)

यह प्रणाली शत्रु रडार से उत्सर्जित रेडियो संकेतों को पकड़कर लक्ष्य की ओर मार्गदर्शन करती है।

इमेजिंग इंफ्रारेड (IIR) सीकर

यदि शत्रु अपने रडार को बंद कर देता है, तब भी यह मिसाइल लक्ष्य से निकलने वाली ऊष्मा (Heat Signature) को पहचानकर उसे नष्ट कर सकती है।

हाइब्रिड नेविगेशन प्रणाली

इसमें जड़त्वीय नेविगेशन प्रणाली (INS) को उपग्रह आधारित नेविगेशन (GPS/NavIC) के साथ एकीकृत किया गया है, जिससे मध्य-मार्ग में अत्यंत सटीक सुधार संभव होता है।

लॉन्च मोड:

यह मिसाइल दो मोड में कार्य कर सकती है:

      • Lock-On Before Launch (LOBL)
      • Lock-On After Launch (LOAL)

सामरिक महत्व:

      • शत्रु रक्षा प्रणाली को निष्क्रिय करना: रुद्रम-II शत्रु के रडार और वायु रक्षा तंत्र को नष्ट कर उन्हें अंधाकर देती है, जिससे भारतीय वायु सेना के अन्य लड़ाकू विमानों को सुरक्षित रूप से आक्रमण का अवसर मिलता है।
      • आयात पर निर्भरता में कमी: यह मिसाइल रूसी मूल की Kh-31 जैसी एंटी-रेडिएशन मिसाइलों का विकल्प बनकर भारत की विदेशी हथियारों पर निर्भरता कम करती है।
      • स्वदेशी तकनीकी विकास: इसे मुख्य रूप से DRDO की प्रयोगशाला रिसर्च सेंटर इमारत (RCI), हैदराबाद द्वारा विकसित किया गया है, जो भारत की रक्षा तकनीकी आत्मनिर्भरता का प्रतीक है।

निष्कर्ष:

रुद्रम-II का सफल परीक्षण भारत की रक्षा क्षमता को नई ऊँचाई प्रदान करता है। यह मिसाइल न केवल आधुनिक युद्ध परिस्थितियों में भारतीय वायु सेना की शक्ति को बढ़ाती है, बल्कि भारत को विश्व के उन चुनिंदा देशों की श्रेणी में स्थापित करती है जिनके पास उन्नत हाइपरसोनिक एंटी-रेडिएशन मिसाइल तकनीक मौजूद है।

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