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Blog / 21 Apr 2026

नदी बेसिन प्रबंधन योजना 2031 तक बढ़ाई गई

नदी बेसिन प्रबंधन योजना

संदर्भ:

हाल ही में, जल शक्ति मंत्रालय ने नदी बेसिन प्रबंधन (RBM) योजना को 2031 तक बढ़ा दिया है, जिसमें ₹2,183 करोड़ का बढ़ा हुआ प्रावधान किया गया है। इस योजना का उद्देश्य भारत में सतही जल और भूजल संसाधनों के सतत उपयोग, संरक्षण और विकास के लिए बेसिन-स्तरीय नियोजन को मजबूत करना है।

नदी बेसिन प्रबंधन (RBM) योजना के बारे में:

      • नदी बेसिन प्रबंधन (RBM) योजना जल शक्ति मंत्रालय के अंतर्गत एक केंद्रीय क्षेत्र (Central Sector) योजना है, जो नदी बेसिनों के समेकित (integrated) नियोजन पर केंद्रित है ताकि जल संसाधनों का वैज्ञानिक और सतत प्रबंधन सुनिश्चित किया जा सके। यह सतही जल, भूजल, सिंचाई प्रणालियों, जलविद्युत क्षमता और बाढ़ प्रबंधन के समन्वित विकास को बढ़ावा देती है, जिससे जल संसाधनों का समग्र और संतुलित प्रबंधन सुनिश्चित हो सके।
      • विस्तारित RBM योजना (2026–2031) का कुल वित्तीय प्रावधान ₹2,183 करोड़ है, जो पहले चरण (2021–26) के ₹1,276 करोड़ से अधिक है। इस योजना को 2031 तक बढ़ाया गया है और इसमें बेसिन-स्तरीय एकीकृत जल संसाधन प्रबंधन दृष्टिकोण अपनाया गया है। इसमें आधुनिक तकनीकों जैसे भौगोलिक सूचना प्रणाली (GIS), रिमोट सेंसिंग, LiDAR (Light Detection and Ranging) और ड्रोन आधारित सर्वेक्षणों का व्यापक उपयोग किया जाता है, जिससे डेटा की सटीकता बढ़ती है और जल परियोजनाओं की बेहतर योजना व क्रियान्वयन संभव होता है।
      • इस योजना में रणनीतिक और पर्यावरणीय दृष्टि से महत्वपूर्ण नदी बेसिनों पर विशेष ध्यान दिया गया है, जिनमें ब्रह्मपुत्र, बराक, तीस्ता और सिंधु बेसिन शामिल हैं। ये बेसिन अपनी पारिस्थितिक संवेदनशीलता, बाढ़ की आशंका और भू-राजनीतिक महत्व के कारण अत्यंत महत्वपूर्ण हैं, इसलिए इनका सतत और प्रभावी प्रबंधन दीर्घकालिक जल सुरक्षा और क्षेत्रीय स्थिरता के लिए आवश्यक है।

River Basin Management Scheme

योजना के उद्देश्य:

      • जल संसाधनों का सतत उपयोग और संरक्षण
      • समेकित बेसिन-स्तरीय नियोजन
      • सिंचाई और जलविद्युत विकास को समर्थन
      • बाढ़ और कटाव (erosion) का प्रबंधन
      • संतुलित क्षेत्रीय जल वितरण सुनिश्चित करना

अब तक की उपलब्धियाँ:

      • ब्रह्मपुत्र और बराक नदी के लिए नदी बेसिन मास्टर प्लान तैयार करना
      • बेसिन-स्तरीय बाढ़ प्रबंधन रणनीतियाँ विकसित करना
      • ब्रह्मपुत्र में माजुली द्वीप जैसे पारिस्थितिक रूप से संवेदनशील क्षेत्रों का संरक्षण
      • उत्तर-पूर्व और हिमालयी क्षेत्रों में व्यापक जलवैज्ञानिक, भूवैज्ञानिक और स्थलाकृतिक सर्वेक्षण

चुनौतियाँ:

      • जलवायु परिवर्तन के कारण बाढ़ और सूखे की बढ़ती आवृत्ति
      • क्षेत्रों के बीच जल का असमान वितरण
      • राज्यों के बीच बेहतर समन्वय की आवश्यकता
      • नदी बेसिनों में पारिस्थितिक क्षरण
      • कुछ राज्यों में तकनीकी और क्षमता संबंधी कमी

आगे की राह:

जल प्रबंधन और आपदा शमन को प्रभावी बनाने के लिए बहु-आयामी दृष्टिकोण आवश्यक है। इसके तहत अंतर-राज्यीय समन्वय तंत्र को मजबूत करना महत्वपूर्ण है, ताकि साझा जल संसाधनों का बेहतर प्रबंधन हो सके। साथ ही, AI, GIS और उपग्रह आधारित निगरानी के विस्तार से पूर्वानुमान और त्वरित प्रतिक्रिया क्षमता बढ़ाई जा सकती है। स्थानीय स्तर पर समुदाय की भागीदारी बढ़ाने से योजनाओं की प्रभावशीलता और स्थायित्व सुनिश्चित होता है। इसके अतिरिक्त, बाढ़ नियंत्रण के लिए प्रकृति-आधारित समाधानों को बढ़ावा देना पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखने में सहायक होगा। अंततः, विभिन्न संस्थानों के बीच डेटा साझा करने की प्रणाली में सुधार से समन्वित और सटीक निर्णय-निर्माण संभव हो सकेगा।

निष्कर्ष:

2031 तक नदी बेसिन प्रबंधन योजना का विस्तार भारत में वैज्ञानिक और सतत जल शासन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। बेसिन-स्तरीय समेकित दृष्टिकोण और आधुनिक तकनीकों को अपनाकर यह योजना देश में दीर्घकालिक जल सुरक्षा, पारिस्थितिक संतुलन और जलवायु अनुकूलन सुनिश्चित करने का लक्ष्य रखती है।