संदर्भ:
हाल ही में भारत को जिम्मेदार राष्ट्र सूचकांक (Responsible Nations Index) 2026 में 154 देशों में 16वाँ स्थान प्राप्त हुआ है। यह सूचकांक इस बात का मूल्यांकन करता है कि कोई राष्ट्र अपनी शक्ति और संसाधनों का उपयोग अपने नागरिकों, पर्यावरण तथा अंतरराष्ट्रीय समुदाय के प्रति कितनी जिम्मेदारी और नैतिकता के साथ करता है।
जिम्मेदार राष्ट्र सूचकांक (RNI) 2026 के बारे में:
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- जिम्मेदार राष्ट्र सूचकांक का विकास विश्व बौद्धिक फाउंडेशन द्वारा जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय, भारतीय प्रबंधन संस्थान, मुंबई और डॉ. आंबेडकर अंतरराष्ट्रीय केंद्र के सहयोग से किया गया है। यह भारत का पहला ऐसा वैश्विक स्तर पर मान्यता प्राप्त सूचकांक है, जो नैतिक मूल्यों, जिम्मेदार शासन और सतत विकास की अवधारणा पर आधारित है।
- यह सूचकांक 154 देशों को सम्मिलित करता है और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उपलब्ध, विश्वसनीय एवं पारदर्शी आंकड़ों के आधार पर देशों के आचरण का विश्लेषण करता है। इसमें यह देखा जाता है कि देश अपने नागरिकों के अधिकारों और कल्याण का संरक्षण कैसे करते हैं, पर्यावरण का प्रबंधन किस प्रकार करते हैं तथा वैश्विक शांति, स्थिरता और सहयोग में कितना योगदान देते हैं।
- इस सूचकांक की मूल अवधारणा यह है कि जिम्मेदारी के बिना प्राप्त समृद्धि दीर्घकाल तक टिकाऊ नहीं हो सकती, इसलिए यह समकालीन अंतरराष्ट्रीय संबंधों में एक महत्वपूर्ण विश्लेषणात्मक ढाँचा प्रदान करता है।
- जिम्मेदार राष्ट्र सूचकांक का विकास विश्व बौद्धिक फाउंडेशन द्वारा जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय, भारतीय प्रबंधन संस्थान, मुंबई और डॉ. आंबेडकर अंतरराष्ट्रीय केंद्र के सहयोग से किया गया है। यह भारत का पहला ऐसा वैश्विक स्तर पर मान्यता प्राप्त सूचकांक है, जो नैतिक मूल्यों, जिम्मेदार शासन और सतत विकास की अवधारणा पर आधारित है।
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संरचना और कार्यप्रणाली:
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- यह सूचकांक तीन प्रमुख स्तंभों पर आधारित है:
- आंतरिक जिम्मेदारी: नागरिकों की गरिमा, जीवन स्तर, सामाजिक सुरक्षा और सशक्तिकरण के प्रति राष्ट्र की जिम्मेदारियों का आकलन।
- पर्यावरणीय जिम्मेदारी: पर्यावरण संरक्षण, प्राकृतिक संसाधनों के सतत उपयोग और जलवायु से जुड़े प्रयासों की समीक्षा।
- बाह्य जिम्मेदारी: अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था में देश के आचरण, सहयोग और वैश्विक योगदान का मूल्यांकन।
- आंतरिक जिम्मेदारी: नागरिकों की गरिमा, जीवन स्तर, सामाजिक सुरक्षा और सशक्तिकरण के प्रति राष्ट्र की जिम्मेदारियों का आकलन।
- इन तीनों स्तंभों का विश्लेषण सात आयामों के माध्यम से किया जाता है: जीवन की गुणवत्ता, शासन व्यवस्था, सामाजिक न्याय, आर्थिक प्रदर्शन, पर्यावरण संरक्षण, शांति स्थापना तथा अंतरराष्ट्रीय आर्थिक संबंध।
- यह सूचकांक तीन प्रमुख स्तंभों पर आधारित है:
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जिम्मेदार राष्ट्र सूचकांक 2026 रैंकिंग से प्रमुख निष्कर्ष:
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- शीर्ष देश: इस सूचकांक के पहले संस्करण में सिंगापुर को पहला स्थान प्राप्त हुआ है, जबकि स्विट्ज़रलैंड और डेनमार्क क्रमशः दूसरे और तीसरे स्थान पर हैं।
- भारत की स्थिति: भारत 16वें स्थान पर है और उसने संयुक्त राज्य अमेरिका (66वाँ), चीन (68वाँ), फ्रांस तथा जापान (38वाँ) जैसे कई प्रमुख आर्थिक शक्तियों को पीछे छोड़ दिया है।
- आर्थिक शक्ति बनाम जिम्मेदारी: रिपोर्ट यह स्पष्ट करती है कि केवल आर्थिक समृद्धि या धन-संपदा अपने आप में जिम्मेदार राष्ट्रीय व्यवहार की गारंटी नहीं होती। कई विकासशील देशों ने सामाजिक कल्याण और पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्रों में समृद्ध देशों से बेहतर प्रदर्शन किया है।
- अन्य प्रमुख देश: जापान (38), यूनाइटेड किंगडम (25), ब्राज़ील (81), दक्षिण अफ्रीका (88) और मैक्सिको (70) स्थान पर हैं, जबकि उत्तर कोरिया को 146वाँ स्थान प्राप्त हुआ है।
- शीर्ष देश: इस सूचकांक के पहले संस्करण में सिंगापुर को पहला स्थान प्राप्त हुआ है, जबकि स्विट्ज़रलैंड और डेनमार्क क्रमशः दूसरे और तीसरे स्थान पर हैं।
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महत्त्व:
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- नेतृत्व की नई परिभाषा: यह सूचकांक वैश्विक नेतृत्व की अवधारणा को केवल शक्ति और प्रभुत्व से हटाकर जिम्मेदारी और नैतिकता के केंद्र में लाता है।
- जवाबदेही को बढ़ावा: शासन और सतत विकास में मौजूद कमियों को उजागर करके यह देशों को सामाजिक सुधार, मजबूत पर्यावरण नीतियाँ और शांतिपूर्ण कूटनीति अपनाने के लिए प्रेरित करता है।
- नैतिक शासन को प्रोत्साहन: “वसुधैव कुटुंबकम” अर्थात “पूरा विश्व एक परिवार है” की भावना के अनुरूप यह सूचकांक वैश्विक एकजुटता, न्याय और पर्यावरण संरक्षण के मूल्यों को प्रदर्शित करता है।
- नेतृत्व की नई परिभाषा: यह सूचकांक वैश्विक नेतृत्व की अवधारणा को केवल शक्ति और प्रभुत्व से हटाकर जिम्मेदारी और नैतिकता के केंद्र में लाता है।
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निष्कर्ष:
राष्ट्रीय सफलता को प्रभुत्व और शक्ति के बजाय जिम्मेदारी, नैतिकता और सतत विकास के आधार पर परिभाषित करके जिम्मेदार राष्ट्र सूचकांक दुनिया भर की सरकारों को अधिक संवेदनशील, समावेशी और दीर्घकालिक दृष्टि अपनाने के लिए प्रेरित करता है। ये मूल्य और सिद्धांत भारत की दीर्घकालिक नीतिगत सोच और वैश्विक दृष्टिकोण से भी गहराई से जुड़े हुए हैं।

