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Blog / 25 Jul 2026

आरबीआई का नया निर्दिष्ट गैर-वित्तीय परिसंपत्तियाँ (Specified Non-Financial Assets - SNFAs) ढाँचा

संदर्भ:

हाल ही में भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने वाणिज्यिक बैंक तनावग्रस्त परिसंपत्तियों के समाधान संबंधी निर्देश, 2025 (तृतीय संशोधन निर्देश, 2026) के तहत निर्दिष्ट गैर-वित्तीय परिसंपत्तियों (Specified Non-Financial Assets - SNFAs) के लिए एक नया सतर्कतापूर्ण (प्रूडेंशियल) ढाँचा जारी किया है। इस ढाँचे में बैंकों द्वारा ऋण चूककर्ताओं से प्राप्त अचल परिसंपत्तियों के अधिग्रहण, प्रबंधन और निपटान के लिए एक समान नियम निर्धारित किए गए हैं।

निर्दिष्ट गैर-वित्तीय परिसंपत्तियाँ (SNFAs) क्या हैं?

निर्दिष्ट गैर-वित्तीय परिसंपत्तियाँ (SNFAs) वे अचल संपत्तियाँ हैं जिन्हें बैंक गैर-निष्पादित परिसंपत्तियों (NPA) में बदल चुके ऋणों के पूर्ण या आंशिक निपटान के रूप में प्राप्त करते हैं। ये परिसंपत्तियाँ बैंक के सामान्य व्यवसाय का हिस्सा नहीं होतीं, बल्कि ऋण की वसूली के उद्देश्य से तब प्राप्त की जाती हैं, जब उधारकर्ता ऋण चुकाने में चूक करता है।

SNFAs के उदाहरण

      • आवासीय भवन
      • वाणिज्यिक संपत्तियाँ
      • औद्योगिक भूमि
      • गोदाम
      • बकाया ऋण के बदले बैंकों को हस्तांतरित अन्य अचल संपत्तियाँ

Knowledge Nugget: What is RBI's Specified Non-Financial Assets (SNFAs)

नए ढाँचे की प्रमुख विशेषताएँ:

      • बैंक केवल तब ही SNFAs का अधिग्रहण कर सकते हैं, जब संबंधित ऋण को NPA घोषित कर दिया गया हो।
      • प्रत्येक बैंक को SNFAs के अधिग्रहण, मूल्यांकन, प्रबंधन और निपटान के लिए अपनी आंतरिक नीति तैयार करनी होगी।
      • परिसंपत्तियों का निपटान मुख्य रूप से सार्वजनिक नीलामी के माध्यम से किया जाएगा तथा इसमें SARFAESI अधिनियम के सिद्धांतों का पालन किया जाएगा।
      • बैंक जब्त की गई संपत्तियों को मूल उधारकर्ता या उससे संबंधित पक्षों को पुनः नहीं बेच सकेंगे।
      • SNFAs को बैंक की बैलेंस शीट में "दावों की संतुष्टि के बदले अर्जित गैर-बैंकिंग परिसंपत्तियाँ (Non-Banking Assets Acquired in Satisfaction of Claims)" शीर्षक के अंतर्गत अलग से दर्शाया जाएगा और इन्हें सकल (Gross) या शुद्ध (Net) NPA का हिस्सा नहीं माना जाएगा।

गैर-निष्पादित परिसंपत्ति (NPA) क्या है?

जब किसी ऋण का ब्याज या मूलधन 90 दिनों से अधिक समय तक बकाया रहता है, तो वह ऋण गैर-निष्पादित परिसंपत्ति (NPA) कहलाता है।

स्पेशल मेंशन अकाउंट (SMA)

NPA बनने से पहले तनावग्रस्त ऋण खातों को निम्नलिखित श्रेणियों में वर्गीकृत किया जाता है:

      • SMA-0: तनाव के प्रारंभिक संकेत (30 दिनों तक बकाया)
      • SMA-1: 31–60 दिनों तक बकाया
      • SMA-2: 61–90 दिनों तक बकाया

NPA के प्रकार

      • सब-स्टैंडर्ड परिसंपत्ति (Sub-standard Asset): 12 माह तक NPA रहने वाली परिसंपत्ति।
      • संदिग्ध परिसंपत्ति (Doubtful Asset): 12 माह से अधिक समय तक NPA रहने वाली परिसंपत्ति।
      • हानि परिसंपत्ति (Loss Asset): जिसे बैंक द्वारा वसूली योग्य नहीं माना जाता है।

SARFAESI अधिनियम क्या है?

प्रतिभूतिकरण एवं वित्तीय परिसंपत्तियों के पुनर्निर्माण तथा प्रतिभूति हित प्रवर्तन अधिनियम, 2002 (Securitisation and Reconstruction of Financial Assets and Enforcement of Security Interest Act, 2002 – SARFAESI Act) बैंकों और वित्तीय संस्थानों को न्यायालय की अनुमति के बिना खराब ऋणों की वसूली का अधिकार प्रदान करता है।

प्रमुख प्रावधान

      • बैंक उधारकर्ता को 60 दिन का नोटिस जारी करने के बाद सुरक्षित परिसंपत्तियों पर कब्ज़ा कर सकते हैं।
      • बैंक बकाया राशि की वसूली के लिए परिसंपत्तियों का विक्रय, हस्तांतरण या प्रबंधन कर सकते हैं।
      • उधारकर्ता ऋण वसूली अधिकरण (Debt Recovery Tribunal - DRT) में अपील कर सकता है।

महत्त्व

      • जब्त की गई परिसंपत्तियों के प्रबंधन में पारदर्शिता और एकरूपता सुनिश्चित होगी।
      • तनावग्रस्त ऋणों की वसूली प्रक्रिया मजबूत होगी।
      • बैंकों में सुशासन और जवाबदेही को बढ़ावा मिलेगा।
      • अधिग्रहित परिसंपत्तियों के प्रभावी निपटान से वित्तीय स्थिरता मजबूत होगी।

निष्कर्ष:

आरबीआई का नया SNFA ढाँचा ऋण चूककर्ताओं से प्राप्त अचल परिसंपत्तियों के प्रबंधन के लिए एक मानकीकृत व्यवस्था प्रदान करता है। इससे ऋण वसूली प्रक्रिया अधिक प्रभावी होगी, बैंकों की बैलेंस शीट मजबूत होगी तथा भारत की बैंकिंग प्रणाली की समग्र दक्षता और स्थिरता में वृद्धि होने की उम्मीद है।

 

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