संदर्भ:
हाल ही में, भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) की मौद्रिक नीति समिति (MPC) ने सर्वसम्मति से तरलता समायोजन सुविधा (Liquidity Adjustment Facility - LAF) के अंतर्गत नीतिगत रेपो दर (Policy Repo Rate) को 5.25% पर अपरिवर्तित रखने का निर्णय लिया, जबकि अपनी तटस्थ (Neutral) मौद्रिक नीति की स्थिति को भी बरकरार रखा। परिणामस्वरूप, स्टैंडिंग डिपॉजिट फैसिलिटी (SDF) की दर 5% पर बनी रहेगी तथा मार्जिनल स्टैंडिंग फैसिलिटी (MSF) और बैंक दर (Bank Rate) 5.5% पर जारी रहेंगी।
तरलता समायोजन सुविधा के बारे में:
तरलता समायोजन सुविधा (LAF) भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) द्वारा उपयोग किया जाने वाला एक प्रमुख मात्रात्मक मौद्रिक नीति (Quantitative Monetary Policy) उपकरण है, जिसके माध्यम से सरकारी प्रतिभूतियों (Government Securities) को संपार्श्विक (Collateral) के रूप में रखकर बैंकिंग प्रणाली में अल्पकालिक तरलता (Short-term Liquidity) का प्रवाह किया जाता है या अतिरिक्त तरलता को अवशोषित किया जाता है। इसकी शुरुआत जून 2000 में नरसिम्हम समिति-II (Narasimham Committee II) की सिफारिशों के आधार पर की गई थी।
LAF के प्रमुख घटक:
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- रेपो दर (Repo Rate / Repurchase Rate): वह ब्याज दर जिस पर RBI, सरकारी प्रतिभूतियों के बदले वाणिज्यिक बैंकों को अल्पकालिक ऋण प्रदान करता है। इसके माध्यम से बैंकिंग प्रणाली में तरलता का प्रवाह (Liquidity Injection) किया जाता है।
- रिवर्स रेपो दर (Reverse Repo Rate): वह ब्याज दर जिस पर RBI वाणिज्यिक बैंकों से धन उधार लेता है, जिससे बैंकिंग प्रणाली में मौजूद अधिशेष तरलता (Excess Liquidity) को अवशोषित किया जाता है।
- स्टैंडिंग डिपॉजिट फैसिलिटी (Standing Deposit Facility - SDF): RBI द्वारा शुरू किया गया बिना संपार्श्विक (Collateral-Free) अतिरिक्त तरलता अवशोषण का एक साधन। यह वर्तमान में LAF कॉरिडोर की निचली सीमा (Floor) के रूप में कार्य करता है तथा निश्चित दर वाली रिवर्स रेपो (Fixed-Rate Reverse Repo) की जगह अधिशेष तरलता को अवशोषित करने का प्रमुख साधन बन चुका है।
- रेपो दर (Repo Rate / Repurchase Rate): वह ब्याज दर जिस पर RBI, सरकारी प्रतिभूतियों के बदले वाणिज्यिक बैंकों को अल्पकालिक ऋण प्रदान करता है। इसके माध्यम से बैंकिंग प्रणाली में तरलता का प्रवाह (Liquidity Injection) किया जाता है।
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निर्णय के पीछे के कारण:
भारतीय रिज़र्व बैंक ने निम्नलिखित कारणों से रेपो दर को अपरिवर्तित रखने का निर्णय लिया:
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- घरेलू अर्थव्यवस्था की मजबूत वृद्धि: उच्च-आवृत्ति वाले आर्थिक संकेतक निजी उपभोग, स्थिर निवेश तथा मजबूत घरेलू मांग को दर्शाते हैं।
- वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता: जारी भू-राजनीतिक तनाव, आपूर्ति श्रृंखला में व्यवधान तथा वैश्विक आर्थिक वृद्धि को लेकर अनिश्चितता भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए जोखिम बनी हुई है।
- मानसून से जुड़े जोखिम: एल-नीनो की परिस्थितियों के कारण असमान दक्षिण-पश्चिम मानसून कृषि उत्पादन, ग्रामीण मांग तथा खाद्य मुद्रास्फीति को प्रतिकूल रूप से प्रभावित कर सकता है।
- नीतिगत लचीलापन: तटस्थ मौद्रिक नीति की स्थिति बनाए रखने से भारतीय रिज़र्व बैंक को भविष्य में मुद्रास्फीति तथा आर्थिक वृद्धि की परिस्थितियों के अनुसार आवश्यक नीतिगत परिवर्तन करने का अवसर मिलता है।
- घरेलू अर्थव्यवस्था की मजबूत वृद्धि: उच्च-आवृत्ति वाले आर्थिक संकेतक निजी उपभोग, स्थिर निवेश तथा मजबूत घरेलू मांग को दर्शाते हैं।
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मौद्रिक नीति क्या है?
मौद्रिक नीति से तात्पर्य उन उपायों से है जिन्हें भारतीय रिज़र्व बैंक अर्थव्यवस्था में मुद्रा आपूर्ति, ब्याज दरों तथा ऋण की उपलब्धता को नियंत्रित करने के लिए अपनाता है।
इसके प्रमुख उद्देश्य हैं:
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- मूल्य स्थिरता बनाए रखना।
- मुद्रास्फीति को नियंत्रित करना।
- सतत आर्थिक विकास को बढ़ावा देना।
- वित्तीय स्थिरता सुनिश्चित करना।
- अर्थव्यवस्था में पर्याप्त ऋण प्रवाह उपलब्ध कराना।
- मूल्य स्थिरता बनाए रखना।
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मौद्रिक नीति समिति के बारे में:
मौद्रिक नीति समिति एक छह सदस्यीय वैधानिक निकाय है, जिसका गठन भारतीय रिज़र्व बैंक अधिनियम, 1934 की धारा 45जेडबी के अंतर्गत उर्जित पटेल समिति की सिफारिशों के आधार पर किया गया।
संरचना:
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- भारतीय रिज़र्व बैंक के गवर्नर - अध्यक्ष
- मौद्रिक नीति के प्रभारी भारतीय रिज़र्व बैंक के उप-गवर्नर
- भारतीय रिज़र्व बैंक का एक अधिकारी
- भारत सरकार द्वारा नामित तीन बाह्य सदस्य
- भारतीय रिज़र्व बैंक के गवर्नर - अध्यक्ष
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प्रमुख विशेषताएँ:
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- समिति की बैठक वर्ष में कम-से-कम चार बार आयोजित की जाती है।
- निर्णय बहुमत के आधार पर लिए जाते हैं।
- मतों की समानता होने पर भारतीय रिज़र्व बैंक के गवर्नर को निर्णायक मत देने का अधिकार होता है।
- समिति का मुख्य कार्य मुद्रास्फीति लक्ष्य प्राप्त करने के लिए रेपो दर निर्धारित करना है।
- समिति की बैठक वर्ष में कम-से-कम चार बार आयोजित की जाती है।
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निष्कर्ष:
भारतीय रिज़र्व बैंक द्वारा रेपो दर को 5.25 प्रतिशत पर अपरिवर्तित रखने का निर्णय एक संतुलित तथा दूरदर्शी मौद्रिक नीति को दर्शाता है, जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास को बनाए रखते हुए मुद्रास्फीति को निर्धारित लक्ष्य सीमा के भीतर रखना है। वैश्विक अनिश्चितताओं तथा घरेलू जोखिमों के बीच तटस्थ नीति अपनाकर मौद्रिक नीति समिति व्यापक आर्थिक स्थिरता बनाए रखने तथा बदलती आर्थिक परिस्थितियों के अनुसार भविष्य में आवश्यक कदम उठाने के लिए पर्याप्त लचीलापन बनाए रखना चाहती है।

