संदर्भ:
हाल ही में, आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति (CCEA) ने 2027-28 विपणन सत्र के लिए सभी छह अधिदेशित रबी फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) में वृद्धि को मंजूरी दी है। इस निर्णय का उद्देश्य किसानों को लाभकारी मूल्य उपलब्ध कराना और दलहन एवं तिलहन की ओर फसल विविधीकरण को प्रोत्साहित करना है।
MSP क्या है?
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- न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) वह मूल्य है जिस पर सरकार किसानों से कुछ कृषि उत्पादों की खरीद करती है। इसका उद्देश्य तब किसानों को एक निश्चित मूल्य का आश्वासन देना है, जब बाजार मूल्य कम हो।
- सरकार 22 अधिदेशित फसलों के लिए MSP की घोषणा करती है, जबकि गन्ने के लिए उचित एवं लाभकारी मूल्य (FRP) भी घोषित किया जाता है। MSP की सिफारिशें कृषि लागत एवं मूल्य आयोग (CACP) द्वारा की जाती हैं और इन्हें सरकार द्वारा मंजूरी दी जाती है।
- न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) वह मूल्य है जिस पर सरकार किसानों से कुछ कृषि उत्पादों की खरीद करती है। इसका उद्देश्य तब किसानों को एक निश्चित मूल्य का आश्वासन देना है, जब बाजार मूल्य कम हो।
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2027-28 रबी विपणन सत्र का MSP:
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- 2027-28 रबी विपणन सत्र के लिए गेहूं के MSP में ₹25 की वृद्धि कर इसे ₹2,610 प्रति क्विंटल कर दिया गया है, जबकि जौ के MSP में ₹136 की वृद्धि कर इसे ₹2,286 किया गया है। चना के MSP में ₹83 की वृद्धि कर इसे ₹5,958 किया गया है, जबकि मसूर के MSP में ₹390 की वृद्धि कर इसे ₹7,390 प्रति क्विंटल कर दिया गया है। रेपसीड और सरसों के MSP में ₹413 की वृद्धि कर इसे ₹6,613 किया गया है, जबकि कुसुम के MSP में ₹675 की सर्वाधिक पूर्ण वृद्धि की गई है, जिससे इसका MSP बढ़कर ₹7,215 प्रति क्विंटल हो गया है।
- सरकार ने कहा है कि संशोधित MSP केंद्रीय बजट 2018-19 में घोषित नीति के अनुरूप हैं, जिसके तहत MSP को अखिल भारतीय भारित औसत उत्पादन लागत के कम-से-कम 1.5 गुना स्तर पर निर्धारित किया जाना है।
- 2027-28 रबी विपणन सत्र के लिए गेहूं के MSP में ₹25 की वृद्धि कर इसे ₹2,610 प्रति क्विंटल कर दिया गया है, जबकि जौ के MSP में ₹136 की वृद्धि कर इसे ₹2,286 किया गया है। चना के MSP में ₹83 की वृद्धि कर इसे ₹5,958 किया गया है, जबकि मसूर के MSP में ₹390 की वृद्धि कर इसे ₹7,390 प्रति क्विंटल कर दिया गया है। रेपसीड और सरसों के MSP में ₹413 की वृद्धि कर इसे ₹6,613 किया गया है, जबकि कुसुम के MSP में ₹675 की सर्वाधिक पूर्ण वृद्धि की गई है, जिससे इसका MSP बढ़कर ₹7,215 प्रति क्विंटल हो गया है।
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महत्त्व:
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- MSP में वृद्धि किसानों की आय सुरक्षा और कृषि विविधीकरण के लिए महत्वपूर्ण है। दलहन और तिलहन के MSP में अधिक वृद्धि से किसानों को अनाज-प्रधान फसल प्रणाली से आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहन मिल सकता है। यह भारत के दलहन और खाद्य तेलों के घरेलू उत्पादन को बढ़ाने तथा आयात पर निर्भरता कम करने के प्रयासों के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण है।
- यह नीति किसानों को अधिक मूल्य आश्वासन प्रदान करके और निरंतर कृषि उत्पादन को प्रोत्साहित करके खाद्य सुरक्षा को भी मजबूत कर सकती है।
- MSP में वृद्धि किसानों की आय सुरक्षा और कृषि विविधीकरण के लिए महत्वपूर्ण है। दलहन और तिलहन के MSP में अधिक वृद्धि से किसानों को अनाज-प्रधान फसल प्रणाली से आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहन मिल सकता है। यह भारत के दलहन और खाद्य तेलों के घरेलू उत्पादन को बढ़ाने तथा आयात पर निर्भरता कम करने के प्रयासों के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण है।
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चुनौतियाँ:
केवल MSP किसानों की आय में वृद्धि की गारंटी नहीं दे सकता, क्योंकि सभी फसलों और क्षेत्रों में MSP पर वास्तविक खरीद एक समान नहीं है। जब खरीद सुविधाएँ पर्याप्त नहीं होती हैं या बाजार मूल्य MSP से नीचे गिर जाते हैं, तब किसान खुले बाजार में अपनी उपज बेचने के लिए मजबूर हो सकते हैं। भंडारण की सीमाएँ, अपर्याप्त बाजार बुनियादी ढाँचा, खरीद में क्षेत्रीय असमानताएँ और बढ़ती कृषि लागत भी महत्वपूर्ण चिंताएँ बनी हुई हैं।
आगे की राह:
MSP नीति की प्रभावशीलता को विस्तारित खरीद बुनियादी ढाँचे, बेहतर भंडारण सुविधाओं, कुशल कृषि बाजारों, फसल बीमा, सिंचाई और कृषि प्रौद्योगिकी में निवेश के साथ मजबूत किया जाना चाहिए। दलहन और तिलहन की अधिक खरीद से फसल विविधीकरण और पोषण सुरक्षा को भी बढ़ावा मिल सकता है।
निष्कर्ष:
2027-28 के लिए रबी फसलों के MSP में वृद्धि को मंजूरी देना सरकार के किसानों को मूल्य समर्थन प्रदान करने और फसल विविधीकरण को बढ़ावा देने के प्रयास को दर्शाता है। हालांकि, टिकाऊ कृषि आय सुनिश्चित करने के लिए MSP को प्रभावी खरीद, बाजार तक पहुँच, बुनियादी ढाँचे और उत्पादकता बढ़ाने वाले उपायों का समर्थन आवश्यक है।

