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Blog / 27 May 2026

क्वाड शिखर सम्मेलन 2026

संदर्भ:

हाल ही में जापान, अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और भारत के समूह क्वाड (QUAD- Quadrilateral Security Dialogue) के विदेश मंत्रियों की बैठक में इंडो-पैसिफिक क्षेत्र की सुरक्षा, महत्वपूर्ण खनिजों, समुद्री सहयोग और ऊर्जा सुरक्षा को लेकर कई महत्वपूर्ण घोषणाएँ की गईं। यह बैठक ऐसे समय हुई है जब दक्षिण चीन सागर में चीन की आक्रामक गतिविधियाँ, वैश्विक सप्लाई चेन संकट, ऊर्जा असुरक्षा और तकनीकी प्रतिस्पर्धा तेजी से बढ़ रही है।

हालिया बैठक के प्रमुख परिणाम:

      • महत्वपूर्ण खनिजों पर सहयोग:
        • बैठक में महत्वपूर्ण खनिज पहल (Critical Minerals Initiative) को आगे बढ़ाने पर जोर दिया गया। लिथियम, कोबाल्ट, निकल और रेयर अर्थ एलिमेंट्स जैसी धातुएँ इलेक्ट्रिक वाहन, बैटरी, सेमीकंडक्टर और रक्षा उद्योग के लिए अत्यंत आवश्यक हैं।
        • वर्तमान में इन खनिजों की सप्लाई पर चीन का प्रभुत्व है। ऐसे में QUAD देश वैकल्पिक और भरोसेमंद सप्लाई चेन विकसित करना चाहते हैं। भारत के लिए यह खनिज़ महत्वपूर्ण है क्योंकि देश हरित ऊर्जा और सेमीकंडक्टर विनिर्माण को बढ़ावा देने की दिशा में कार्य कर रहा है।
      • इंडो-पैसिफिक ऊर्जा सुरक्षा पहल:
        • क्वाड (QUAD) देशों ने स्वच्छ ऊर्जा, हरित हाइड्रोजन, ऊर्जा अवसंरचना और ऊर्जा आपूर्ति सुरक्षा को मजबूत करने के लिए नई पहल की घोषणा की।
        • रूस-यूक्रेन युद्ध और पश्चिम एशिया में अस्थिरता के कारण वैश्विक ऊर्जा बाजार प्रभावित हुए हैं। ऐसे में ऊर्जा स्रोतों का विविधीकरण QUAD की प्राथमिकता बन गया है।
      • समुद्री सुरक्षा पर फोकस:
        • बैठक में समुद्री डोमेन जागरूकता (Maritime Domain Awareness) को मजबूत करने तथा हिंद महासागर और दक्षिण चीन सागर में सहयोग बढ़ाने पर बल दिया गया।
        • क्वाड (QUAD) ने वाणिज्यिक जहाजों पर बढ़ते हमलों और समुद्री मार्गों की सुरक्षा को लेकर चिंता व्यक्त की। भारत के लिए यह महत्वपूर्ण है क्योंकि उसका लगभग 95% व्यापार समुद्री मार्गों से होता है।
      • फिजी पोर्ट परियोजना:
        • क्वाड (QUAD) ने फिजी में संयुक्त बंदरगाह परियोजना विकसित करने की घोषणा की। इसे प्रशांत क्षेत्र में चीन के बढ़ते प्रभाव के मुकाबले QUAD की रणनीतिक प्रतिक्रिया माना जा रहा है।
        • यह QUAD के विकास साझेदारी मॉडलको भी दर्शाता है, जिसमें केवल सुरक्षा ही नहीं बल्कि आधारभूत संरचना निर्माण पर भी ध्यान दिया जा रहा है।

भारत के लिए महत्व:

      • QUAD भारत की “Act East Policy”, “SAGAR Vision” और इंडो-पैसिफिक रणनीति को मजबूती प्रदान करता है।
      • इसके माध्यम से भारत को तकनीकी सहयोग, रक्षा साझेदारी, समुद्री सुरक्षा और आपूर्ति श्रृंखला विविधीकरण में लाभ मिल सकता है।
      • इसके अतिरिक्त QUAD भारत को चीन की आक्रामक नीतियों के विरुद्ध एक सामूहिक कूटनीतिक मंच भी प्रदान करता है।
      • QUAD अब केवल एक सामरिक मंच नहीं रह गया है, बल्कि यह आर्थिक, तकनीकी और भू-राजनीतिक सहयोग का व्यापक ढांचा बनता जा रहा है।

चुनौतियाँ:

      • हालाँकि QUAD अभी भी NATO जैसी औपचारिक सैन्य व्यवस्था नहीं है। सदस्य देशों के चीन के प्रति दृष्टिकोण में भिन्नता बनी हुई है।
      • साथ ही ASEAN देशों को यह आशंका रहती है कि क्षेत्रीय शक्ति प्रतिस्पर्धा से इंडो-पैसिफिक में तनाव बढ़ सकता है।

QUAD क्या है?

      • QUAD चार लोकतांत्रिक देशों, भारत, अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया, का एक अनौपचारिक रणनीतिक समूह है। इसकी शुरुआत वर्ष 2007 में हुई थी, किंतु वर्ष 2017 के बाद इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में चीन के बढ़ते प्रभाव के कारण यह समूह अधिक सक्रिय हुआ। इसका प्रमुख उद्देश्य मुक्त, खुला, समावेशी और नियम-आधारित इंडो-पैसिफिकसुनिश्चित करना है।

निष्कर्ष:

वर्तमान वैश्विक परिदृश्य में QUAD तेजी से एक बहुआयामी रणनीतिक मंच के रूप में उभर रहा है। अब इसका दायरा केवल सुरक्षा सहयोग तक सीमित नहीं है, बल्कि तकनीक, ऊर्जा, व्यापार, आपूर्ति श्रृंखला और समुद्री शासन तक विस्तृत हो चुका है।
भारत के लिए QUAD न केवल सामरिक संतुलन का माध्यम है, बल्कि वैश्विक शक्ति संरचना में अपनी भूमिका मजबूत करने का एक महत्वपूर्ण अवसर भी है।

 

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