संदर्भ:
हाल ही में क्यूएस विश्व विश्वविद्यालय रैंकिंग 2027 जारी की गई, जिसमें 1500 से अधिक वैश्विक संस्थानों का मूल्यांकन शैक्षणिक प्रतिष्ठा, शोध प्रभाव, नियोक्ता प्रतिष्ठा तथा अंतरराष्ट्रीयकरण जैसे मानकों के आधार पर किया गया। यह रैंकिंग भारतीय उच्च शिक्षा संस्थानों, विशेषकर भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थानों की बढ़ती वैश्विक उपस्थिति को दर्शाती है।
रैंकिंग की प्रमुख विशेषताएँ:
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- भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) दिल्ली ने विश्व स्तर पर 118वाँ स्थान प्राप्त किया तथा पाँच स्थान ऊपर चढ़कर भारत का सर्वोच्च संस्थान बना।
- भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, मुंबई 129वें स्थान से गिरकर 134वें स्थान पर आ गया।
- भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, मद्रास 170वें स्थान पर रहा (पिछले वर्ष 180वाँ) तथा विश्व के शीर्ष 200 में स्थान पाने वाला भारत का एकमात्र अन्य संस्थान बना रहा।
- विश्व स्तर पर: मैसाचुसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (USA) ने लगातार पंद्रहवें वर्ष प्रथम स्थान बनाए रखा। इसके बाद स्टैनफोर्ड विश्वविद्यालय, इम्पीरियल कॉलेज लंदन, ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय तथा हार्वर्ड विश्वविद्यालय का स्थान रहा।
- अन्य प्रमुख भारतीय संस्थान: भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान(IIT) खड़गपुर (205), भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान(IIT) कानपुर (221), भारतीय विज्ञान संस्थान(IISc) बेंगलुरु (221), दिल्ली विश्वविद्यालय (322), भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान(IIT) रुड़की (335), भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान(IIT) गुवाहाटी (349)।
- भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) दिल्ली ने विश्व स्तर पर 118वाँ स्थान प्राप्त किया तथा पाँच स्थान ऊपर चढ़कर भारत का सर्वोच्च संस्थान बना।
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प्रमुख भारतीय संस्थानों का प्रदर्शन:
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- भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) भारत के उच्च शिक्षा क्षेत्र में अभी भी अग्रणी हैं, किंतु इनके प्रदर्शन में भिन्नता दिखाई देती है।
- भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, दिल्ली ने नियोक्ता प्रतिष्ठा, प्रति प्राध्यापक उद्धरण तथा रोजगार परिणामों में सुधार के कारण बेहतर प्रदर्शन किया।
- भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, मुंबई नियोक्ता प्रतिष्ठा में मजबूत रहा, परंतु उद्धरण तथा अंतरराष्ट्रीय सहभागिता के संकेतकों में गिरावट आई।
- भारतीय विज्ञान संस्थान, बेंगलुरु ने शोध उद्धरणों में उच्च प्रदर्शन किया, किंतु नियोक्ता प्रतिष्ठा तथा रोजगार परिणामों में कमजोरी के कारण इसकी रैंकिंग में गिरावट जारी रही।
- भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, दिल्ली ने नियोक्ता प्रतिष्ठा, प्रति प्राध्यापक उद्धरण तथा रोजगार परिणामों में सुधार के कारण बेहतर प्रदर्शन किया।
- निजी संस्थानों ने भी प्रगति दिखाई है। शूलिनी विश्वविद्यालय भारत के शीर्ष दस संस्थानों में सम्मिलित हुआ, जो शोध उत्पादन तथा वैश्विक सहभागिता में सुधार को दर्शाता है।
- भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) भारत के उच्च शिक्षा क्षेत्र में अभी भी अग्रणी हैं, किंतु इनके प्रदर्शन में भिन्नता दिखाई देती है।
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भारत की समग्र स्थिति:
भारत के 52 विश्वविद्यालय विश्व रैंकिंग में शामिल हैं (पिछले वर्ष 54 थे)।
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- भारत संस्थानों की संख्या के आधार पर विश्व में पाँचवें स्थान पर है, अमेरिका, ब्रिटेन, चीन और जर्मनी के बाद।
- पिछले दस वर्षों में भारत की उपस्थिति में 271 प्रतिशत की वृद्धि हुई है (2015 में 11 संस्थान से 2027 में 52 संस्थान)।
- इसके बावजूद कोई भी भारतीय संस्थान विश्व के शीर्ष 100 में स्थान प्राप्त नहीं कर पाया है, जिसका मुख्य कारण शैक्षणिक प्रतिष्ठा तथा अंतरराष्ट्रीयकरण में कमजोरी है।
- भारत संस्थानों की संख्या के आधार पर विश्व में पाँचवें स्थान पर है, अमेरिका, ब्रिटेन, चीन और जर्मनी के बाद।
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प्रमुख प्रदर्शन सूचक:
क्यूएस रैंकिंग नौ सूचकों पर आधारित है, जिनमें शैक्षणिक प्रतिष्ठा, नियोक्ता प्रतिष्ठा, प्राध्यापक-छात्र अनुपात, प्रति प्राध्यापक उद्धरण तथा अंतरराष्ट्रीयकरण प्रमुख हैं।
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- भारतीय संस्थान शोध उत्पादन (प्रति प्राध्यापक उद्धरण) में सशक्त हैं।
- भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान नियोक्ता प्रतिष्ठा में भी अच्छा प्रदर्शन करते हैं।
- परंतु अंतरराष्ट्रीय प्राध्यापक अनुपात, छात्र विविधता तथा वैश्विक शोध सहयोग में कमजोरी बनी हुई है।
- शैक्षणिक प्रतिष्ठा के सबसे महत्वपूर्ण मानक में कोई भी भारतीय संस्थान शीर्ष 100 में नहीं है।
- भारतीय संस्थान शोध उत्पादन (प्रति प्राध्यापक उद्धरण) में सशक्त हैं।
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भारतीय संस्थानों की चुनौतियाँ:
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- अंतरराष्ट्रीय प्राध्यापकों तथा छात्रों की कम भागीदारी।
- राष्ट्रीय शिक्षा नीति के विस्तार लक्ष्यों के कारण बढ़ता छात्र दबाव।
- वैश्विक शोध सहयोग की सीमितता।
- अंतरराष्ट्रीय स्तर पर दृश्यता तथा शैक्षणिक ब्रांडिंग की आवश्यकता।
- अंतरराष्ट्रीय प्राध्यापकों तथा छात्रों की कम भागीदारी।
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वैश्विक संदर्भ:
क्यूएस के अनुसार संयुक्त राज्य अमेरिका तथा यूरोप की उच्च शिक्षा प्रणालियाँ अपेक्षाकृत गिरावट का सामना कर रही हैं, क्योंकि शोध तथा प्रतिभा का प्रवाह एशिया की ओर बढ़ रहा है। फिर भी शीर्ष वैश्विक विश्वविद्यालयों की प्रमुख शक्ति अंतरराष्ट्रीयकरण ही बना हुआ है।
निष्कर्ष:
क्यूएस 2027 रैंकिंग भारत की बढ़ती वैश्विक शैक्षणिक उपस्थिति को दर्शाती है, जिसका नेतृत्व भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, दिल्ली कर रहा है। तथापि अंतरराष्ट्रीयकरण तथा शैक्षणिक प्रतिष्ठा में कमी के कारण भारत अभी भी विश्व के शीर्ष 100 विश्वविद्यालयों में स्थान नहीं बना पाया है। भविष्य में प्रगति के लिए वैश्विक सहयोग तथा सशक्त शोध तंत्र का विकास अत्यंत आवश्यक है।

