होम > Blog

Blog / 04 Nov 2026

QS एशिया यूनिवर्सिटी रैंकिंग 2027: भारत का प्रदर्शन

संदर्भ:

हाल ही में क्वाक्वेरेली साइमंड्स (Quacquarelli Symonds–QS) द्वारा जारी QS वर्ल्ड यूनिवर्सिटी रैंकिंग: एशिया 2027 में 26 उच्च शिक्षा प्रणालियों के 1,722 विश्वविद्यालयों का मूल्यांकन किया गया है, जिनमें 195 नए विश्वविद्यालय शामिल हैं। यह रैंकिंग भारतीय उच्च शिक्षा के क्षेत्र में एक महत्त्वपूर्ण विरोधाभास को उजागर करती है। जहाँ एक ओर रैंकिंग में भारतीय संस्थानों की भागीदारी में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है, वहीं दूसरी ओर भारतीय विश्वविद्यालयों को शैक्षणिक प्रतिष्ठा, अंतरराष्ट्रीयकरण और वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता के क्षेत्र में चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है।

QS एशिया रैंकिंग 2027 की प्रमुख विशेषताएँ:

      • क्षेत्रीय नेतृत्व: हांगकांग विश्वविद्यालय (University of Hong Kong) ने एशिया में अपना पहला स्थान बरकरार रखा है। इसके बाद पेकिंग विश्वविद्यालय दूसरे और सिंघुआ विश्वविद्यालय तीसरे स्थान पर हैं।
      • बढ़ती प्रतिस्पर्धा: मुख्यभूमि चीन (Mainland China) 448 विश्वविद्यालयों के साथ सबसे आगे है, जबकि 195 नए संस्थानों के रैंकिंग में शामिल होने से पूरे क्षेत्र में प्रतिस्पर्धा बढ़ गई है।
      • भारतीय विश्वविद्यालयों की रैंकिंग में गिरावट: लगभग 71% भारतीय विश्वविद्यालयों की रैंकिंग में गिरावट आई, जबकि 18% ने सुधार किया और 11% की स्थिति स्थिर रही।
      • सापेक्ष प्रदर्शन: QS ने स्पष्ट किया कि रैंकिंग में गिरावट दर्ज करने वाले लगभग दो-तिहाई भारतीय विश्वविद्यालयों के समग्र स्कोर में सुधार हुआ है। इससे संकेत मिलता है कि रैंकिंग में गिरावट का अर्थ आवश्यक रूप से संस्थान की गुणवत्ता में कमी होना नहीं है।

QS Asia University Rankings 2027

भारत के प्रदर्शन के बारे में:

मुख्यभूमि चीन के बाद भारत एशिया की दूसरी सबसे बड़ी उच्च शिक्षा प्रणाली के रूप में उभरा है। वर्ष 2027 की रैंकिंग में भारत के 325 विश्वविद्यालय शामिल हैं, जिनमें 34 नए संस्थान हैं।

      • भारत में IIT दिल्ली शीर्ष पर: IIT दिल्ली 66वें स्थान के साथ भारत का सर्वोच्च रैंक प्राप्त संस्थान बना हुआ है, हालाँकि वर्ष 2026 में यह 59वें स्थान पर था।
      • प्रमुख संस्थानों की रैंकिंग में गिरावट: भारत के सभी छह प्रमुख संस्थानों की रैंकिंग में गिरावट आई। IISc बेंगलुरु 64वें से 79वें स्थान पर, IIT बॉम्बे 71वें से 83वें स्थान पर और IIT मद्रास 70वें से 85वें स्थान पर आ गया।
      • दिल्ली विश्वविद्यालय: दिल्ली विश्वविद्यालय की रैंकिंग 95वें स्थान से गिरकर 106वें स्थान पर पहुँच गई, जिससे यह एशिया के शीर्ष 100 विश्वविद्यालयों की सूची से बाहर हो गया।
      • सकारात्मक प्रदर्शन करने वाले संस्थान: चंडीगढ़ विश्वविद्यालय 104वें, लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी 154वें और सिम्बायोसिस इंटरनेशनल 175वें स्थान पर पहुँच गए। IIT हैदराबाद और IIT (BHU) वाराणसी ने भी अपनी रैंकिंग में सुधार दर्ज किया।

रैंकिंग में गिरावट के प्रमुख कारण:

      • रैंकिंग में गिरावट मुख्य रूप से कमजोर शैक्षणिक प्रतिष्ठा, नियोक्ताओं की धारणा और अंतरराष्ट्रीयकरण से जुड़ी है। 30% भारांक वाले शैक्षणिक प्रतिष्ठा (Academic Reputation) संकेतक में 76% भारतीय विश्वविद्यालयों का प्रदर्शन कमजोर हुआ, जबकि 20% भारांक वाले नियोक्ता प्रतिष्ठा (Employer Reputation) संकेतक में 83% विश्वविद्यालयों की स्थिति में गिरावट आई।
      • अंतरराष्ट्रीय छात्र संकेतक में 85% संस्थानों का प्रदर्शन गिरा, जबकि विदेशी छात्रों के आगमन (Inbound Student Exchange) और भारतीय छात्रों के विदेश जाने (Outbound Student Exchange) से संबंधित संकेतकों में क्रमशः 91% और 89% संस्थानों की स्थिति में गिरावट दर्ज की गई।
      • वैश्विक सहयोग, अनुसंधान की अंतरराष्ट्रीय दृश्यता और उद्योग एवं शिक्षण संस्थानों के बीच सीमित जुड़ाव भी प्रमुख चुनौतियाँ बनी हुई हैं।

अनुसंधान का विरोधाभास (The Research Paradox):

समग्र रैंकिंग में गिरावट के बावजूद भारत ने अनुसंधान उत्पादकता के क्षेत्र में अपनी क्षमताएँ प्रदर्शित की हैं।

      • प्रति संकाय सदस्य शोध पत्र (Papers per Faculty): एशिया के शीर्ष 50 संस्थानों में भारत के 27 विश्वविद्यालय शामिल हैं, जिनमें से पाँच शीर्ष 10 में हैं। यह एकमात्र ऐसा संकेतक है, जिसमें गिरावट की तुलना में अधिक भारतीय विश्वविद्यालयों ने सुधार किया है।
      • पीएचडी धारक कर्मचारी (Staff with PhD): इस संकेतक में 15 भारतीय विश्वविद्यालय संयुक्त रूप से पहला स्थान साझा करते हैं।
      • भारत पीछे है: प्रति शोध पत्र उद्धरण (Citations per Paper) के मामले में एशिया के शीर्ष 50 विश्वविद्यालयों में केवल तीन भारतीय विश्वविद्यालय शामिल हैं। यह अनुसंधान उत्पादन और उसके अंतरराष्ट्रीय प्रभाव के बीच अंतर को दर्शाता है।
      • नियोक्ता प्रतिष्ठा (Employer Reputation): इस संकेतक में IIT बॉम्बे और IIT दिल्ली एशिया में क्रमशः सातवें और दसवें स्थान पर हैं।

उच्च शिक्षा के क्षेत्र में भारत की प्रगति:

      • रैंकिंग में भारत के विश्वविद्यालयों की संख्या वर्ष 2016 के 24 से बढ़कर वर्ष 2027 में 325 हो गई है, जो 1,250% से अधिक की वृद्धि को दर्शाती है। अब एशिया के रैंकिंग प्राप्त विश्वविद्यालयों में भारत की हिस्सेदारी लगभग पाँचवाँ हिस्सा है, जबकि क्षेत्रीय शीर्ष 200 संस्थानों में भारतीय विश्वविद्यालयों की संख्या 17 से बढ़कर 21 हो गई है।
      • यह उच्च शिक्षा के क्षेत्र में भारत के मात्रात्मक विस्तार को दर्शाता है, लेकिन साथ ही संस्थानों की गुणवत्ता और वैश्विक पहचान में सुधार की आवश्यकता को भी उजागर करता है।

सरकार की पहलें:

      • राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 बहुविषयक शिक्षा, अनुसंधान और अंतरराष्ट्रीयकरण को बढ़ावा देती है। उत्कृष्ट संस्थान योजना (Institutions of Eminence Scheme) विश्वस्तरीय संस्थानों के विकास में सहायता करती है, जबकि राष्ट्रीय संस्थागत रैंकिंग फ्रेमवर्क (NIRF) गुणवत्ता मूल्यांकन को प्रोत्साहित करता है।
      • ‘स्टडी इन इंडिया’ (Study in India) पहल का उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय छात्रों को भारत की ओर आकर्षित करना है। अनुसंधान राष्ट्रीय अनुसंधान फाउंडेशन (Anusandhan National Research Foundation) और प्रधानमंत्री उच्चतर शिक्षा अभियान (PM-USHA) का उद्देश्य अनुसंधान को मजबूत करना तथा राज्य के उच्च शिक्षा संस्थानों की गुणवत्ता में सुधार करना है।

निष्कर्ष:

QS एशिया 2027 की रैंकिंग भारत की विस्तारित उच्च शिक्षा प्रणाली को दर्शाने के साथ-साथ शैक्षणिक प्रतिष्ठा, अंतरराष्ट्रीयकरण और अनुसंधान के प्रभाव से जुड़ी कमजोरियों को भी उजागर करती है। NEP 2020 के दृष्टिकोण को साकार करने और भारत को वैश्विक ज्ञान केंद्र के रूप में स्थापित करने के लिए संस्थानों की संख्या में वृद्धि को शैक्षणिक उत्कृष्टता में बदलना आवश्यक है।

Aliganj Gomti Nagar Prayagraj