संदर्भ:
हाल ही में, पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoJK) के रावलाकोट, मुज़फ्फराबाद और कोटली सहित कई क्षेत्रों में व्यापक विरोध प्रदर्शन देखने को मिले। ये प्रदर्शन मुख्यतः तीन चरणों में आयोजित विधानसभा चुनावों, कथित चुनावी धांधली, बढ़ती महँगाई, तथा राजनीतिक प्रतिनिधित्व की कमी के विरोध में किए जा रहे हैं।
पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoJK) में विरोध प्रदर्शन क्यों हो रहे हैं?
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- इन प्रदर्शनों की शुरुआत कोविड-19 महामारी के बाद बढ़ती महँगाई, बिजली दरों में वृद्धि तथा खराब शासन व्यवस्था के विरोध के रूप में हुई थी। समय के साथ यह आंदोलन व्यापक राजनीतिक स्वरूप ग्रहण कर चुका है, जिसमें लोकतांत्रिक अधिकारों, स्थानीय प्रतिनिधित्व तथा निष्पक्ष चुनावों की मांग की जा रही है।
- प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि 27 जुलाई से 11 अगस्त 2026 तक होने वाले तीन चरणों के विधानसभा चुनाव पाकिस्तान के सैन्य प्रतिष्ठान (Establishment) के प्रभाव में कराए जा रहे हैं और ये स्थानीय जनता की वास्तविक आकांक्षाओं को प्रतिबिंबित नहीं करते।
- एक प्रमुख विवाद 53 सदस्यीय विधानसभा की संरचना को लेकर है। इसमें 45 सदस्य निर्वाचित तथा 8 सदस्य नामित होते हैं। निर्वाचित 45 सीटों में से 12 सीटें 1947 के बाद जम्मू-कश्मीर से पाकिस्तान गए शरणार्थियों के लिए आरक्षित हैं। चूँकि ये मतदाता PoJK में नहीं रहते, स्थानीय संगठनों का आरोप है कि इससे क्षेत्र के वास्तविक निवासियों का राजनीतिक प्रतिनिधित्व कमजोर होता है और इस्लामाबाद को क्षेत्र की राजनीति पर अधिक नियंत्रण प्राप्त हो जाता है।
- इन प्रदर्शनों की शुरुआत कोविड-19 महामारी के बाद बढ़ती महँगाई, बिजली दरों में वृद्धि तथा खराब शासन व्यवस्था के विरोध के रूप में हुई थी। समय के साथ यह आंदोलन व्यापक राजनीतिक स्वरूप ग्रहण कर चुका है, जिसमें लोकतांत्रिक अधिकारों, स्थानीय प्रतिनिधित्व तथा निष्पक्ष चुनावों की मांग की जा रही है।
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PoJK पर भारत का दृष्टिकोण:
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- भारत का स्पष्ट और निरंतर रुख रहा है कि संपूर्ण जम्मू-कश्मीर, जिसमें पाकिस्तान अधिकृत जम्मू-कश्मीर (PoJK) भी शामिल है, भारत का अभिन्न और अविभाज्य हिस्सा है। इस स्थिति की पुष्टि संसद के प्रस्तावों तथा भारत सरकार के आधिकारिक वक्तव्यों में कई बार की जा चुकी है।
- विदेश मंत्रालय (MEA) ने शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों पर पाकिस्तान द्वारा अत्यधिक बल प्रयोग की निंदा की है। भारत ने PoJK में लोकतांत्रिक अधिकारों और नागरिक स्वतंत्रताओं के लगातार हनन पर भी चिंता व्यक्त की है। भारत का कहना है कि पाकिस्तान की कार्रवाइयाँ इस अवैध रूप से अधिकृत क्षेत्र के लोगों के कल्याण और उनकी लोकतांत्रिक आकांक्षाओं की उपेक्षा को दर्शाती हैं।
- भारत का स्पष्ट और निरंतर रुख रहा है कि संपूर्ण जम्मू-कश्मीर, जिसमें पाकिस्तान अधिकृत जम्मू-कश्मीर (PoJK) भी शामिल है, भारत का अभिन्न और अविभाज्य हिस्सा है। इस स्थिति की पुष्टि संसद के प्रस्तावों तथा भारत सरकार के आधिकारिक वक्तव्यों में कई बार की जा चुकी है।
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भारत के लिए रणनीतिक महत्व:
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- पाकिस्तान अधिकृत जम्मू-कश्मीर भारत की सुरक्षा और विदेश नीति की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण क्षेत्र है।
- यह जम्मू-कश्मीर केंद्र शासित प्रदेश के साथ नियंत्रण रेखा (LoC) साझा करता है।
- यह क्षेत्र पाकिस्तान को गिलगित-बाल्टिस्तान तक रणनीतिक पहुँच प्रदान करता है, जहाँ से चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारा (CPEC) गुजरता है। भारत इस पूरे क्षेत्र पर अपना दावा करता है।
- मुज़फ्फराबाद, कोटली और रावलाकोट जैसे क्षेत्र अतीत में सीमा पार आतंकवाद तथा घुसपैठ के प्रमुख केंद्र रहे हैं।
- PoJK में जारी अस्थिरता का सीधा प्रभाव भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा, सीमा प्रबंधन तथा क्षेत्रीय स्थिरता पर पड़ता है।
- इसी कारण PoJK से जुड़े घटनाक्रम भारत के सुरक्षा, कूटनीतिक तथा भू-राजनीतिक हितों से सीधे जुड़े हुए हैं।
- पाकिस्तान अधिकृत जम्मू-कश्मीर भारत की सुरक्षा और विदेश नीति की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण क्षेत्र है।
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भारत की प्रमुख चिंताएँ:
भारत के दृष्टिकोण से PoJK की वर्तमान स्थिति कई महत्वपूर्ण चिंताएँ उत्पन्न करती है।
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- मानवाधिकार उल्लंघन: शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों पर बल प्रयोग, मनमानी गिरफ्तारियाँ, मीडिया पर प्रतिबंध तथा संचार सेवाओं पर रोक मानवाधिकारों की बिगड़ती स्थिति को दर्शाती है।
- सीमा पार आतंकवाद: राजनीतिक अस्थिरता से एक ओर आतंकी ढाँचा कमजोर हो सकता है, वहीं दूसरी ओर पाकिस्तान समर्थित आतंकी संगठन नियंत्रण रेखा पर घुसपैठ बढ़ाकर ध्यान भटकाने का प्रयास कर सकते हैं।
- चीन की बढ़ती भूमिका: CPEC के माध्यम से चीन की बढ़ती रणनीतिक उपस्थिति PoJK के भू-राजनीतिक महत्व को और बढ़ाती है।
- क्षेत्रीय स्थिरता: PoJK में लगातार जारी अशांति दक्षिण एशिया की सुरक्षा और स्थिरता पर व्यापक प्रभाव डाल सकती है।
- मानवाधिकार उल्लंघन: शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों पर बल प्रयोग, मनमानी गिरफ्तारियाँ, मीडिया पर प्रतिबंध तथा संचार सेवाओं पर रोक मानवाधिकारों की बिगड़ती स्थिति को दर्शाती है।
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निष्कर्ष:
पाकिस्तान अधिकृत जम्मू-कश्मीर (PoJK) में जारी विरोध प्रदर्शन पाकिस्तान के प्रशासन के अंतर्गत शासन व्यवस्था की विफलता, लोकतांत्रिक अधिकारों की कमी तथा जन असंतोष को उजागर करते हैं। भारत के दृष्टिकोण से ये घटनाएँ उसके उस लंबे समय से चले आ रहे रुख को और मजबूत करती हैं कि PoJK भारत का अभिन्न अंग है। साथ ही, यह क्षेत्र के लोगों के लोकतांत्रिक अधिकारों, मानवाधिकारों तथा विकास संबंधी आकांक्षाओं की रक्षा के महत्व को भी रेखांकित करता है।

