संदर्भ:
22 सितंबर 2026, विश्व गैंडा दिवस के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने प्रोजेक्ट राइनो शुरू करने की घोषणा की। इस पहल का उद्देश्य एक सींग वाले गैंडे (Rhinoceros unicornis) के संरक्षण के लिए समर्पित वित्तीय और तकनीकी सहायता प्रदान करना है। इसके तहत भारत के गैंडा-बहुल राज्यों में प्रजाति संरक्षण, आवास प्रबंधन, आनुवंशिक सुधार, वैज्ञानिक अनुसंधान और गैंडा आबादी की निगरानी को मजबूत किया जाएगा।
प्रोजेक्ट के प्रमुख उद्देश्य:
प्रोजेक्ट राइनो का मुख्य फोकस निम्नलिखित क्षेत्रों पर होगा:
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- प्रजाति संरक्षण: गैंडे के शिकार और वन्यजीव अपराधों की रोकथाम के लिए सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करना।
- आवास प्रबंधन: घासभूमियों, आर्द्रभूमियों और गैंडे के अन्य प्राकृतिक आवासों में सुधार करना।
- आनुवंशिक सुधार: आनुवंशिक अध्ययन को बढ़ावा देना और गैंडे की स्वस्थ आबादी को बनाए रखना।
- आबादी संबंधी अनुसंधान: वैज्ञानिक निगरानी, आबादी का आकलन और पारिस्थितिक अध्ययन करना।
- पुनर्वास/पुनर्स्थापन: गैंडों को उपयुक्त संरक्षित क्षेत्रों में स्थानांतरित करके उनके प्राकृतिक क्षेत्र का विस्तार करना।
- प्रजाति संरक्षण: गैंडे के शिकार और वन्यजीव अपराधों की रोकथाम के लिए सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करना।
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प्रमुख राज्य:
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- यह परियोजना निम्नलिखित राज्यों में गैंडा संरक्षण और पुनर्स्थापन के प्रयासों को समर्थन देगी:
- असम
- पश्चिम बंगाल
- बिहार
- उत्तर प्रदेश
- असम
- यह प्रयास कुछ चुनिंदा संरक्षित क्षेत्रों में गैंडों की अत्यधिक एकाग्रता को कम करने और उनके लिए नए सुरक्षित आवास विकसित करने में मदद कर सकता है।
- यह परियोजना निम्नलिखित राज्यों में गैंडा संरक्षण और पुनर्स्थापन के प्रयासों को समर्थन देगी:
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भारत में गैंडा संरक्षण की सफलता:
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- भारत में दुनिया के अधिकांश एक सींग वाले गैंडे पाए जाते हैं। इसलिए इस प्रजाति के वैश्विक संरक्षण में भारत की महत्वपूर्ण भूमिका है।
- असम इस प्रजाति का प्रमुख गढ़ है, जहाँ काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान में गैंडों की सबसे बड़ी आबादी पाई जाती है।
- मजबूत शिकार-रोधी उपायों (Anti-poaching Measures) ने असम में गैंडा संरक्षण को बेहतर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
- उत्तर प्रदेश के दुधवा राष्ट्रीय उद्यान/टाइगर रिजर्व में गैंडों के सफल पुनर्स्थापन और आबादी में वृद्धि देखी गई है।
- पश्चिम बंगाल और बिहार के संरक्षित क्षेत्र भी गैंडा संरक्षण के विस्तार में महत्वपूर्ण योगदान देते हैं।
- भारत में दुनिया के अधिकांश एक सींग वाले गैंडे पाए जाते हैं। इसलिए इस प्रजाति के वैश्विक संरक्षण में भारत की महत्वपूर्ण भूमिका है।
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प्रमुख चुनौतियाँ:
संरक्षण के क्षेत्र में प्रगति के बावजूद कई चुनौतियाँ बनी हुई हैं:
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- शिकार और अवैध वन्यजीव व्यापार, विशेष रूप से गैंडे के सींग की मांग।
- कृषि, बुनियादी ढाँचे और मानव बस्तियों के विस्तार के कारण आवास का नुकसान और विखंडन।
- बाढ़ और अन्य पारिस्थितिक घटनाओं के कारण घासभूमि के आवासों पर प्रभाव।
- गैंडे की आबादी के विस्तार के लिए उपयुक्त आवासों की सीमित उपलब्धता।
- अलग-अलग आबादी में आनुवंशिक विविधता को बनाए रखना।
- आबादी के विस्तार और पुनर्स्थापन के दौरान मानव-वन्यजीव संघर्ष।
- शिकार और अवैध वन्यजीव व्यापार, विशेष रूप से गैंडे के सींग की मांग।
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प्रोजेक्ट राइनो का महत्व:
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- भारत के एक सींग वाले गैंडे के लिए एक समर्पित संरक्षण ढाँचा उपलब्ध कराता है।
- केवल आबादी की सुरक्षा से आगे बढ़कर लैंडस्केप स्तर पर संरक्षण को बढ़ावा देता है।
- वैज्ञानिक और तकनीक आधारित वन्यजीव प्रबंधन को मजबूत करता है।
- उपयुक्त ऐतिहासिक आवासों में गैंडों के पुनर्स्थापन और उनके क्षेत्र के विस्तार में मदद कर सकता है।
- जैव विविधता संरक्षण और वन्यजीव सुरक्षा के प्रति भारत की व्यापक प्रतिबद्धताओं को मजबूत करता है।
- भारत के एक सींग वाले गैंडे के लिए एक समर्पित संरक्षण ढाँचा उपलब्ध कराता है।
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निष्कर्ष:
प्रोजेक्ट राइनो का उद्देश्य वित्तीय सहायता, आवास पुनर्स्थापन, वैज्ञानिक अनुसंधान, आनुवंशिक प्रबंधन और शिकार-रोधी उपायों के माध्यम से एक सींग वाले गैंडे के संरक्षण में भारत की उपलब्धियों को और मजबूत करना है। पारंपरिक गैंडा-बहुल क्षेत्रों से आगे बढ़कर नए सुरक्षित आवास विकसित करना इस प्रजाति के दीर्घकालिक अस्तित्व के लिए महत्वपूर्ण होगा।
प्रारंभिक परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य (Prelims Facts):
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