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Blog / 03 Nov 2026

प्रोजेक्ट 18A: भारत का अगली पीढ़ी का स्टील्थ डिस्ट्रॉयर कार्यक्रम

संदर्भ:

हाल ही में, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में रक्षा अधिग्रहण परिषद (Defence Acquisition Council-DAC) ने प्रोजेक्ट 18A के तहत भारतीय नौसेना के अगली पीढ़ी के स्टील्थ विध्वंसक (Stealth Destroyer) कार्यक्रम को सैद्धांतिक मंजूरी (In-principle Approval) प्रदान की है। इस प्रस्तावित कार्यक्रम की अनुमानित लागत ₹80,000 करोड़ है, जिसमें लगभग 75% स्वदेशी सामग्री शामिल होगी।

स्टील्थ विध्वंसक (Stealth Destroyers) क्या हैं?

स्टील्थ विध्वंसक उन्नत निर्देशित मिसाइल युद्धपोत होते हैं, जिन्हें इस प्रकार डिजाइन किया जाता है कि दुश्मन के रडार और निगरानी प्रणालियों द्वारा उनका पता लगाना कठिन हो। ये उन्नत हथियारों, सेंसर, वायु रक्षा प्रणालियों, निगरानी तकनीकों और पनडुब्बी रोधी युद्ध (Anti-Submarine Warfare-ASW) क्षमताओं से लैस होते हैं। ये युद्धपोत वायु रक्षा, सतह-रोधी युद्ध (Anti-Surface Warfare) और पानी के भीतर मौजूद खतरों का पता लगाने जैसे कार्य कर सकते हैं।

प्रोजेक्ट 18A क्या है

प्रोजेक्ट 18A क्या है?

प्रोजेक्ट 18A भारतीय नौसेना का प्रस्तावित अगली पीढ़ी का विध्वंसक (Next-Generation Destroyer-NGD) कार्यक्रम है। इसका उद्देश्य मौजूदा विशाखापत्तनम श्रेणी (Visakhapatnam-class) के विध्वंसकों का स्थान लेने के लिए बड़े, अधिक भारी और तकनीकी रूप से उन्नत स्टील्थ निर्देशित मिसाइल युद्धपोत विकसित करना है। ये युद्धपोत भारत की वायु रक्षा, सतह-रोधी युद्ध और पनडुब्बी रोधी युद्ध क्षमताओं को बढ़ाएंगे।

प्रोजेक्ट 18A की प्रमुख विशेषताएँ:

इन युद्धपोतों का डिजाइन भारतीय नौसेना के वॉरशिप डिजाइन ब्यूरो (Warship Design Bureau-WDB) द्वारा तैयार किया जाएगा और इनमें लगभग 75% स्वदेशी सामग्री होने की उम्मीद है। इनकी प्रमुख विशेषताओं में उन्नत मिसाइल प्रणालियाँ, अत्याधुनिक निगरानी सेंसर, बेहतर वायु रक्षा, उन्नत पनडुब्बी रोधी युद्ध प्रणालियाँ और आधुनिक स्टील्थ तकनीक शामिल हैं। रक्षा क्षेत्र के सार्वजनिक उपक्रमों (DPSUs) और निजी जहाज निर्माण कंपनियों, दोनों को प्रतिस्पर्धी बोली प्रक्रिया के माध्यम से इसमें भाग लेने का अवसर मिलेगा।

भारत के लिए रणनीतिक महत्त्व:

प्रोजेक्ट 18A चीन की बढ़ती नौसैनिक उपस्थिति और पाकिस्तान की बढ़ती पनडुब्बी क्षमताओं के विरुद्ध भारत की समुद्री प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत करेगा। यह समुद्री संचार मार्गों (Sea Lines of Communication-SLOCs) की सुरक्षा, समुद्री क्षेत्र की जागरूकता (Maritime Domain Awareness) को बढ़ाने तथा हिंद महासागर क्षेत्र में भारत के रणनीतिक और आर्थिक हितों की रक्षा करने में मदद करेगा। इससे हिंद-प्रशांत क्षेत्र में भारत की स्थिति भी मजबूत होगी।

आत्मनिर्भर भारत के लिए महत्त्व:

यह परियोजना स्वदेशी युद्धपोत डिजाइन, रक्षा विनिर्माण और सार्वजनिक-निजी भागीदारी (Public-Private Partnerships) को बढ़ावा देगी। लगभग 75% स्वदेशी सामग्री से उन्नत हथियारों, सेंसर और इलेक्ट्रॉनिक प्रणालियों के घरेलू उत्पादन को प्रोत्साहन मिलेगा, आयात पर निर्भरता कम होगी तथा रक्षा विनिर्माण क्षेत्र में रोजगार के अवसर पैदा होंगे।

रक्षा अधिग्रहण परिषद (DAC) के बारे में:

      • रक्षा अधिग्रहण परिषद रक्षा मंत्रालय में पूंजीगत खरीद (Capital Acquisitions) से संबंधित सर्वोच्च निर्णय लेने वाली संस्था है। इसकी स्थापना वर्ष 2001 में, वर्ष 1999 के कारगिल युद्ध के बाद मंत्रियों के समूह (Group of Ministers) की सिफारिशों के आधार पर की गई थी। इसकी अध्यक्षता केंद्रीय रक्षा मंत्री करते हैं। इसके सदस्यों में रक्षा राज्य मंत्री, चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS), तीनों सेनाओं के प्रमुख और रक्षा मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी शामिल होते हैं।
      • इसके प्रमुख कार्यों में पूंजीगत खरीद के लिए आवश्यकता की स्वीकृति (Acceptance of Necessity-AoN) प्रदान करना, खरीद को Buy, Buy and Make तथा Make श्रेणियों में वर्गीकृत करना, स्वदेशी रक्षा उत्पादन को बढ़ावा देना और दीर्घकालिक रक्षा खरीद योजनाओं को सैद्धांतिक मंजूरी देना शामिल है। यह खरीद नीति और प्रौद्योगिकी हस्तांतरण से संबंधित मामलों पर भी कार्य करती है।

भारत का मौजूदा विध्वंसक बेड़ा (Existing Destroyer Fleet):

      • भारतीय नौसेना तीन प्रमुख निर्देशित मिसाइल विध्वंसक श्रेणियों का संचालन करती है:
        • दिल्ली श्रेणी (Delhi-class): प्रोजेक्ट 15
        • कोलकाता श्रेणी (Kolkata-class): प्रोजेक्ट 15A
        • विशाखापत्तनम श्रेणी (Visakhapatnam-class): प्रोजेक्ट 15B
      • ये युद्धपोत ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइलों, सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइलों, नौसैनिक तोपों और पनडुब्बी रोधी युद्ध प्रणालियों से लैस हैं। नए विध्वंसक युद्धपोतों को शामिल करने से पुराने युद्धपोतों को बदलने और नौसेना की परिचालन क्षमता बनाए रखने में मदद मिलेगी।

निष्कर्ष:

प्रोजेक्ट 18A भारतीय नौसेना के आधुनिकीकरण और भारत की समुद्री सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में एक महत्त्वपूर्ण कदम है। इसका सफल क्रियान्वयन स्वदेशी रक्षा क्षमताओं, रणनीतिक स्वायत्तता और हिंद-प्रशांत क्षेत्र में अपने समुद्री हितों की रक्षा करने की भारत की क्षमता को बढ़ाएगा।

 

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