प्रिजन स्टैटिस्टिक्स इंडिया (PSI) 2024 रिपोर्ट
प्रसंग:
हाल ही में राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) ने प्रिजन स्टैटिस्टिक्स इंडिया (PSI) 2024 रिपोर्ट जारी की, जो भारत की जेल व्यवस्था का व्यापक आकलन प्रस्तुत करती है। इस रिपोर्ट में जेलों की जनसंख्या, भीड़भाड़, अवसंरचना, कर्मचारियों की स्थिति, पुनर्वास कार्यक्रमों तथा कैदियों की सामाजिक-आर्थिक प्रोफ़ाइल का विश्लेषण किया गया है।
प्रिजन स्टैटिस्टिक्स इंडिया (PSI) रिपोर्ट के बारे में:
प्रिजन स्टैटिस्टिक्स इंडिया (PSI) रिपोर्ट NCRB द्वारा प्रकाशित एक वार्षिक रिपोर्ट है। यह सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों से जेल संबंधी आँकड़े संकलित करती है तथा जेल प्रशासन, बंदियों के कल्याण और सुधारात्मक सुधारों से जुड़े प्रमुख मुद्दों को उजागर करती है। यह रिपोर्ट नीति-निर्माताओं और न्यायिक संस्थाओं को भारत की जेल प्रणाली की चुनौतियों का आकलन करने तथा उपयुक्त सुधारों की रूपरेखा तैयार करने में सहायता प्रदान करती है।
PSI 2024 रिपोर्ट के प्रमुख निष्कर्ष:
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- PSI 2024 रिपोर्ट में उजागर की गई सबसे गंभीर चिंताओं में से एक जेलों में अत्यधिक भीड़भाड़ है। दिल्ली में सबसे अधिक 194.6% की अधिभोग दर दर्ज की गई, जहाँ 10,026 की स्वीकृत क्षमता के मुकाबले 19,512 कैदी मौजूद थे। इसी प्रकार की भीड़भाड़ मेघालय, जम्मू-कश्मीर और मध्य प्रदेश में भी देखी गई। यह भीड़भाड़ स्वच्छता, स्वास्थ्य सेवाओं, रहने की स्थिति, जेल अनुशासन तथा पुनर्वास प्रयासों पर नकारात्मक प्रभाव डालती है।
- रिपोर्ट में भारत में विचाराधीन कैदियों (Undertrial Prisoners) पर अत्यधिक निर्भरता को भी उजागर किया गया। दिल्ली की जेलों में केवल 2,232 दोषसिद्ध कैदियों की तुलना में 17,178 विचाराधीन कैदी थे। यह न्यायिक विलंब, लंबी सुनवाई प्रक्रिया तथा जमानत और कानूनी सहायता तक सीमित पहुँच को दर्शाता है।
- रिपोर्ट में जेल कर्मचारियों की भारी कमी को भी एक प्रमुख समस्या बताया गया। 6,516 स्वीकृत पदों के मुकाबले केवल 2,447 कर्मचारी उपलब्ध थे, जिससे 4,069 पद रिक्त रहे। इस प्रकार की कमी जेल सुरक्षा, कैदियों की निगरानी, परामर्श तथा पुनर्वास सेवाओं को कमजोर बनाती है।
- रिपोर्ट ने कैदियों की सामाजिक-आर्थिक संवेदनशीलता को भी रेखांकित किया। अधिकांश कैदियों की शिक्षा कक्षा 10 से कम थी और वे आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों से संबंधित थे, जो गरीबी, निम्न शिक्षा और आपराधिक न्याय प्रणाली में संवेदनशीलता के बीच गहरे संबंध को दर्शाता है।
- PSI 2024 रिपोर्ट में उजागर की गई सबसे गंभीर चिंताओं में से एक जेलों में अत्यधिक भीड़भाड़ है। दिल्ली में सबसे अधिक 194.6% की अधिभोग दर दर्ज की गई, जहाँ 10,026 की स्वीकृत क्षमता के मुकाबले 19,512 कैदी मौजूद थे। इसी प्रकार की भीड़भाड़ मेघालय, जम्मू-कश्मीर और मध्य प्रदेश में भी देखी गई। यह भीड़भाड़ स्वच्छता, स्वास्थ्य सेवाओं, रहने की स्थिति, जेल अनुशासन तथा पुनर्वास प्रयासों पर नकारात्मक प्रभाव डालती है।
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जेल संकट के संरचनात्मक कारण:
भारत में जेल संकट के पीछे कई संरचनात्मक कारण जिम्मेदार हैं:
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- न्यायिक विलंब के कारण विचाराधीन कैदियों की लंबी अवधि तक हिरासत
- हिरासत आधारित निरोध (custodial detention) का अत्यधिक उपयोग तथा कठोर जमानत प्रथाएँ
- जेल अवसंरचना की खराब स्थिति और सुविधाओं के विस्तार की अपर्याप्तता
- आर्थिक रूप से कमजोर कैदियों के लिए कमजोर कानूनी सहायता तंत्र
- जेल प्रशासन और कर्मचारियों के पदों पर बड़े पैमाने पर रिक्तियाँ
- न्यायिक विलंब के कारण विचाराधीन कैदियों की लंबी अवधि तक हिरासत
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सरकारी पहल और सुधार:
सरकार ने जेल प्रशासन में सुधार हेतु कई कदम उठाए हैं:
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- मॉडल प्रिज़न्स एंड करेक्शनल सर्विसेज एक्ट, 2023- जेलों के आधुनिकीकरण और पुनर्वास को बढ़ावा देने के लिए
- मॉडल प्रिजन मैनुअल, 2016- एकरूप जेल प्रबंधन, कानूनी सहायता और व्यावसायिक प्रशिक्षण हेतु
- ई-प्रिज़न्स परियोजना- जेल अभिलेखों के डिजिटलीकरण के लिए
- इंटीग्रेटेड क्रिमिनल जस्टिस सिस्टम (ICJS)- न्यायालय, पुलिस, जेल और अभियोजन प्रणाली को जोड़ने के लिए
- FASTER प्रणाली- जमानत आदेशों के त्वरित इलेक्ट्रॉनिक प्रसारण के लिए
- अंडर-ट्रायल रिव्यू कमेटियाँ (UTRCs)- लंबी अवधि के विचाराधीन मामलों की समीक्षा हेतु
- NALSA कानूनी सहायता कार्यक्रम- जेलों के भीतर कानूनी साक्षरता और निःशुल्क कानूनी सेवाएँ प्रदान करने के लिए।
- मॉडल प्रिज़न्स एंड करेक्शनल सर्विसेज एक्ट, 2023- जेलों के आधुनिकीकरण और पुनर्वास को बढ़ावा देने के लिए
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आगे की राह:
भारत को विचाराधीन कैदियों की संख्या कम करने के लिए त्वरित सुनवाई और उदार जमानत नीतियों को अपनाना होगा। न्यायिक क्षमता में वृद्धि तथा फास्ट-ट्रैक अदालतों की स्थापना से लंबित मामलों को कम करने में सहायता मिल सकती है। जेल अवसंरचना, स्वच्छता और स्वास्थ्य सुविधाओं का आधुनिकीकरण किया जाना चाहिए, साथ ही कर्मचारियों के रिक्त पदों को शीघ्र भरा जाना आवश्यक है। पुनर्वास, शिक्षा, व्यावसायिक प्रशिक्षण, परामर्श और कानूनी सहायता पर अधिक बल दिया जाना चाहिए। खुली एवं अर्द्ध-खुली जेलों को बढ़ावा देने तथा डिजिटल तकनीक के उपयोग से जेल प्रशासन में पारदर्शिता और दक्षता लाई जा सकती है।
निष्कर्ष:
PSI 2024 रिपोर्ट भारत की जेल व्यवस्था में गहरी संरचनात्मक कमजोरियों को उजागर करती है, विशेषकर भीड़भाड़, अत्यधिक विचाराधीन कैदियों की संख्या और अपर्याप्त अवसंरचना के संदर्भ में। यद्यपि हालिया सुधारों का उद्देश्य जेलों को सुधारात्मक एवं पुनर्वास केंद्रित संस्थानों में बदलना है, लेकिन प्रभावी क्रियान्वयन, न्यायिक दक्षता और मानवाधिकार-आधारित दृष्टिकोण भारत में सार्थक जेल सुधारों के लिए अत्यंत आवश्यक बने हुए हैं।
