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Blog / 16 May 2026

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की यूएई यात्रा ने भारत-UAE साझेदारी को किया मज़बूत

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की यूएई यात्रा

संदर्भ:

हाल ही में भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के आधिकारिक दौरे पर रहे, जिससे पश्चिम एशिया में तनाव के बीच भारत की लुक वेस्टनीति को और मजबूती मिली। यह यात्रा ऊर्जा, निवेश, प्रौद्योगिकी और क्षेत्रीय स्थिरता पर केंद्रित व्यापक रणनीतिक साझेदारी को और सुदृढ़ करने वाली रही।

प्रमुख परिणाम और द्विपक्षीय समझौते:

      • निवेश और आर्थिक सहयोग: यूएई ने भारत में 5 अरब अमेरिकी डॉलर के निवेश की घोषणा की। प्रमुख प्रतिबद्धताओं में शामिल हैं:
        • एमिरेट्स एनबीडी द्वारा RBL बैंक में 3 अरब डॉलर का निवेश
        • ADIA–NIIF (अवसंरचना क्षेत्र) में 1 अरब डॉलर का निवेश
        • IHC द्वारा Sammaan Capital में 1 अरब डॉलर का निवेश
        • इन निवेशों से भारत के अवसंरचना, बैंकिंग और पूंजी बाजार को महत्वपूर्ण बढ़ावा मिलेगा।
      • ऊर्जा सुरक्षा और रणनीतिक सहयोग: ऊर्जा संबंध भारतयूएई संबंधों का मुख्य आधार बने हुए हैं।
        • यूएई भारत का चौथा सबसे बड़ा कच्चा तेल (crude oil) आपूर्तिकर्ता है
        • तीसरा सबसे बड़ा LNG आपूर्तिकर्ता है
        • और वित्त वर्ष 2024–25 में सबसे बड़ा LPG आपूर्तिकर्ता है
        • दोनों देशों ने दीर्घकालिक LPG आपूर्ति और रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार (Strategic Petroleum Reserves - SPR) पर समझौते किए। वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा के लिए होर्मुज़ जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) अत्यंत महत्वपूर्ण बना हुआ है।
      • रक्षा और सुरक्षा ढांचा: दोनों देशों ने एक नए रक्षा सहयोग ढांचे पर सहमति जताई, जिसका उद्देश्य संयुक्त अभ्यास, रक्षा उद्योग सहयोग और समुद्री सुरक्षा को मजबूत करना है। यह भारतीय महासागर क्षेत्र (Indian Ocean Region) में समन्वय को बढ़ाता है और रणनीतिक विश्वास को मजबूत करता है।
      • प्रौद्योगिकी और समुद्री अवसंरचना: एआई, सुपरकंप्यूटिंग और फिनटेक के क्षेत्रों में सहयोग का विस्तार किया गया, जिसमें CDAC–G42 का 8 एक्साफ्लॉप (Exaflop) सुपरकंप्यूटिंग क्लस्टर शामिल है। समुद्री क्षेत्र में कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड और Drydocks World (वडिनार) के बीच समझौते से जहाज मरम्मत क्षमता, लॉजिस्टिक्स और कौशल विकास को बढ़ावा मिलेगा, जो मेक इन इंडियापहल को मजबूत करेगा।

Prime Minister Narendra Modi’s UAE Visit

यात्रा का महत्व:

      • विश्वसनीय ऊर्जा साझेदार: यूएई भारत के लिए स्थिर ऊर्जा आपूर्ति सुनिश्चित करता है। दीर्घकालिक एलपीजी (LPG) और रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार (SPR) सहयोग से भारत की ऊर्जा सुरक्षा और लचीलापन और मजबूत होता है।
      • भू-राजनीतिक संतुलन: यह यात्रा पश्चिम एशिया में भारत की संतुलित कूटनीति को दर्शाती है, जिसमें भारत विभिन्न प्रतिस्पर्धी क्षेत्रीय शक्तियों के साथ संबंध बनाए रखते हुए क्षेत्रीय स्थिरता को बढ़ावा देता है।
      • भारतयूएई व्यापक आर्थिक भागीदारी समझौते (CEPA) ढांचे को मजबूत करना: इस यात्रा के परिणाम भारतयूएई व्यापक आर्थिक भागीदारी समझौते (CEPA) को आगे बढ़ाते हैं, जिसने वित्त वर्ष 2025–26 में द्विपक्षीय व्यापार को 100 अरब अमेरिकी डॉलर से अधिक पहुँचा दिया है। इसका लक्ष्य वर्ष 2032 तक 200 अरब अमेरिकी डॉलर का व्यापार हासिल करना है।

भारतयूएई संबंधों के बारे में:

भारत और संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के बीच मसालों, मोतियों, वस्त्रों और खजूर के क्षेत्र में सदियों पुराने समुद्री व्यापारिक संबंध रहे हैं। दोनों देशों के बीच राजनयिक संबंध वर्ष 1972 में स्थापित हुए। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की 2015 की यात्रा के बाद यह साझेदारी और तेज़ी से बढ़ी तथा व्यापार, ऊर्जा, रक्षा, अवसंरचना, प्रौद्योगिकी और नवीकरणीय ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में विस्तारित हुई।

व्यापार और निवेश संबंध:

यूएई भारत के सबसे बड़े व्यापारिक साझेदारों में से एक है, जहाँ द्विपक्षीय व्यापार वित्त वर्ष 2025–26 में 101.25 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुँच गया है। निवेश प्रवाह में वर्ष 2000 से 2025 के बीच 25.19 अरब अमेरिकी डॉलर का प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) शामिल है, जिसे संप्रभु धन कोषों (Sovereign Wealth Funds) और स्थानीय मुद्रा निपटान प्रणाली (Local Currency Settlement System) से समर्थन मिला है, जिससे डॉलर पर निर्भरता कम हुई है।

ऊर्जा साझेदारी:

यूएई भारत का एक प्रमुख ऊर्जा आपूर्तिकर्ता है और भारत के रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार (Strategic Petroleum Reserve) कार्यक्रम में एकमात्र साझेदार भी है, जिससे दीर्घकालिक ऊर्जा सुरक्षा मजबूत होती है।

निष्कर्ष:

यह यात्रा भविष्य-उन्मुख साझेदारी की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। 5 अरब अमेरिकी डॉलर के निवेश, मजबूत ऊर्जा सहयोग, रक्षा साझेदारी और उन्नत प्रौद्योगिकी सहयोग के साथ भारतयूएई संबंध भारत की आर्थिक वृद्धि और पश्चिम एशिया कूटनीति का एक प्रमुख स्तंभ बनते जा रहे हैं।

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