संदर्भ:
प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना (पीएमकेवीवाई) को लागू करने वाली संस्था राष्ट्रीय कौशल विकास निगम (एनएसडीसी) हाल के समय में गंभीर विवादों के केंद्र में रही है। एनएसडीसी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) का अचानक पद छोड़ना, धन के कथित दुरुपयोग को लेकर दर्ज पुलिस शिकायत तथा नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) की एक आलोचनात्मक ऑडिट रिपोर्ट इसके प्रमुख कारण हैं। कैग की रिपोर्ट में योजना के क्रियान्वयन, निगरानी व्यवस्था और लाभार्थियों को मिलने वाले वास्तविक लाभों पर नकारात्मक प्रभाव डालने वाली कई अनियमितताओं को उजागर किया गया है।
पीएमकेवीवाई के बारे में:
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- प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना (पीएमकेवीवाई) की शुरुआत 15 जुलाई 2015 को कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय के अंतर्गत की गई थी। यह भारत सरकार की प्रमुख कौशल विकास योजना है, जिसका उद्देश्य युवाओं को उद्योग की आवश्यकता के अनुरूप प्रशिक्षण प्रदान कर उनकी रोजगार क्षमता में वृद्धि करना है।
- इस योजना के तहत 15 से 45 वर्ष की आयु के व्यक्तियों को शामिल किया गया है। यह पूरी तरह से सरकार द्वारा वित्तपोषित है और इसके अंतर्गत उद्योग द्वारा मान्यता प्राप्त प्रमाणपत्र प्रदान किया जाता है। इसके साथ ही, तीन वर्षों के लिए ₹2 लाख तक का दुर्घटना बीमा तथा रोजगार सहायता की सुविधा भी दी जाती है।
- प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना (पीएमकेवीवाई) की शुरुआत 15 जुलाई 2015 को कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय के अंतर्गत की गई थी। यह भारत सरकार की प्रमुख कौशल विकास योजना है, जिसका उद्देश्य युवाओं को उद्योग की आवश्यकता के अनुरूप प्रशिक्षण प्रदान कर उनकी रोजगार क्षमता में वृद्धि करना है।
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मुख्य चरण:
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- पीएमकेवीवाई 1.0 (2015–16): यह प्रारंभिक चरण था, जिसका उद्देश्य कौशल प्रमाणन और प्रशिक्षण के बदले प्रोत्साहन की एक संगठित व्यवस्था स्थापित करना था।
- पीएमकेवीवाई 2.0 (2016–20): इस चरण में योजना का विस्तार सभी राज्यों और विभिन्न क्षेत्रों में किया गया। इसका लक्ष्य 1 करोड़ युवाओं को प्रशिक्षित करना था, जिसके लिए ₹12,000 करोड़ का बजट निर्धारित किया गया।
- पीएमकेवीवाई 3.0 (2020–22): इस चरण में विकेंद्रीकृत और मांग-आधारित मॉडल अपनाया गया, जिसे जिला कौशल समितियों के माध्यम से लागू किया गया।
- पीएमकेवीवाई 4.0 (2022–26): वर्तमान चरण में “नई पीढ़ी” के कौशलों जैसे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, रोबोटिक्स, इंटरनेट ऑफ थिंग्स (आईओटी) और ड्रोन पर विशेष जोर दिया गया है। जुलाई 2025 तक 25 लाख से अधिक उम्मीदवारों को प्रशिक्षण दिया जा चुका है।
- पीएमकेवीवाई 1.0 (2015–16): यह प्रारंभिक चरण था, जिसका उद्देश्य कौशल प्रमाणन और प्रशिक्षण के बदले प्रोत्साहन की एक संगठित व्यवस्था स्थापित करना था।
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मुख्य घटक:
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- शॉर्ट टर्म ट्रेनिंग (एसटीटी): यह स्कूल या कॉलेज छोड़ चुके युवाओं और बेरोजगार युवाओं को लक्षित करती है। इसमें तकनीकी कौशल के साथ-साथ सॉफ्ट स्किल्स और डिजिटल साक्षरता का प्रशिक्षण दिया जाता है।
- पूर्व शिक्षण की मान्यता: इसके अंतर्गत पहले से मौजूद अनौपचारिक कौशलों को राष्ट्रीय कौशल योग्यता ढांचे के अनुरूप प्रमाणित किया जाता है।
- विशेष परियोजनाएँ: ये परियोजनाएँ हाशिए पर रहने वाले वर्गों, दूरदराज़ के क्षेत्रों या विशिष्ट प्रकार की नौकरियों के लिए विशेष रूप से तैयार की जाती हैं।
- कौशल एवं रोज़गार मेला: रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने के उद्देश्य से वर्ष में दो बार प्लेसमेंट मेले आयोजित किए जाते हैं।
- शॉर्ट टर्म ट्रेनिंग (एसटीटी): यह स्कूल या कॉलेज छोड़ चुके युवाओं और बेरोजगार युवाओं को लक्षित करती है। इसमें तकनीकी कौशल के साथ-साथ सॉफ्ट स्किल्स और डिजिटल साक्षरता का प्रशिक्षण दिया जाता है।
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कैग ऑडिट के निष्कर्ष:
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- कैग द्वारा पीएमकेवीवाई के चरण 1 से 3 (2015–2022) का ऑडिट किया गया, जिसमें ₹14,450 करोड़ के व्यय और 1.32 करोड़ लाभार्थियों को शामिल किया गया। ऑडिट के दौरान निम्नलिखित प्रमुख समस्याएँ सामने आईं:
- लाभार्थियों के बीच फर्जी या अमान्य बैंक खाते तथा दोहराए गए पहचान विवरण पाए गए।
- 34 लाख प्रमाणित उम्मीदवारों को प्रशिक्षण प्रोत्साहन राशि का भुगतान नहीं किया गया।
- निगरानी व्यवस्था कमजोर पाई गई, जिसमें बायोमेट्रिक उपकरणों का निष्क्रिय रहना और केंद्र व राज्य सरकारों के बीच समन्वय की कमी शामिल है।
- 178 प्रशिक्षण केंद्रों को काली सूची में डाला गया, जिनमें अधिकांश उत्तर प्रदेश, दिल्ली, मध्य प्रदेश और राजस्थान में स्थित थे।
- लाभार्थियों के बीच फर्जी या अमान्य बैंक खाते तथा दोहराए गए पहचान विवरण पाए गए।
- कैग द्वारा पीएमकेवीवाई के चरण 1 से 3 (2015–2022) का ऑडिट किया गया, जिसमें ₹14,450 करोड़ के व्यय और 1.32 करोड़ लाभार्थियों को शामिल किया गया। ऑडिट के दौरान निम्नलिखित प्रमुख समस्याएँ सामने आईं:
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निष्कर्ष:
यह घटनाक्रम भारत की प्रमुख कौशल विकास योजना में प्रशासन, जवाबदेही और निगरानी से जुड़ी गंभीर कमियों को उजागर करते हैं। यद्यपि पीएमकेवीवाई का उद्देश्य युवाओं की रोजगार क्षमता बढ़ाना और कार्यबल को भविष्य के लिए तैयार करना है, लेकिन इसके लक्ष्यों को प्रभावी ढंग से हासिल करने तथा जनता का भरोसा बनाए रखने के लिए सटीक डेटा व्यवस्था, मजबूत निगरानी तंत्र और पारदर्शी क्रियान्वयन अत्यंत आवश्यक है।

