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Blog / 23 Feb 2026

संकल्प (SANKALP) योजना पर PAC की रिपोर्ट: फंड उपयोग में भारी कमी

संदर्भ:

संसद की लोक लेखा समिति (PAC) ने ₹4,455 करोड़ की संकल्प (आजीविका संवर्धन के लिए कौशल अधिग्रहण और ज्ञान जागरूकता) योजना के "ढुलमुल" कार्यान्वयन के लिए सरकार की आलोचना की है। समिति ने देरी, फंड के कम उपयोग और कमजोर निगरानी तंत्र को रेखांकित किया है। 

कैग के मुख्य निष्कर्ष:

       2017-18 और 2023-24 (अक्टूबर 2023 तक) के बीच कुल बजट प्रावधान का केवल 44% ही वितरित किया गया। 

       विश्व बैंक के ऋण की पहली किस्त ($250 मिलियन) में से ₹1,606.15 करोड़ (86%) वितरित किए गए लेकिन दिसंबर 2023 तक केवल ₹850.71 करोड़ का ही उपयोग हो सका।

      कार्यान्वयन दिशानिर्देशों के पालन में लापरवाही और कार्य की धीमी गति देखी गई।

      ऋण अवधि के प्रारम्भ से पूर्व मंत्रालय के स्तर पर पर्याप्त तैयारी का अभाव देखा गया ।

      लोक लेखा समिति (PAC) सदस्यों ने केंद्रीय निगरानी तंत्र की अनुपस्थिति और प्राथमिक से उच्च माध्यमिक स्तर तक स्कूली शिक्षा में कौशल को एकीकृत करने के लिए स्पष्ट रोडमैप की कमी पर सवाल उठाए।   

संकल्प (SANKALP) योजना के बारे में:

अक्टूबर 2017 में आर्थिक मामलों की कैबिनेट समिति द्वारा अनुमोदित और जनवरी 2018 में शुरू की गई, यह कौशल विकास और उद्यमिता मंत्रालय की एक प्रमुख योजना है।

उद्देश्य:

      अल्पकालिक कौशल प्रशिक्षण को मजबूत करना।

      संस्थागत ढांचे में सुधार करना।

      उद्योगों के साथ संबंधों को बढ़ाना।

      हाशिए पर रहने वाले समुदायों के समावेश को बढ़ावा देना।

वित्तपोषण का ढांचा

      विश्व बैंक ऋण: ₹3,300 करोड़ 

      राज्य की हिस्सेदारी: ₹660 करोड़ 

      उद्योग की हिस्सेदारी: ₹495 करोड़

प्रारम्भ में मार्च 2023 में समाप्त होने वाली इस योजना को मार्च 2024 तक बढ़ा दिया गया था।

लोक लेखा समिति (PAC) के बारे में:

यह संसद की एक महत्वपूर्ण वित्तीय निगरानी समिति है। इसकी स्थापना 1921 में मोंटेग्यू-चेम्सफोर्ड सुधारों के तहत की गई थी।

संरचना:

इसमें 22 सदस्य (15 लोकसभा से, 7 राज्यसभा से) होते हैं। इनका चुनाव आनुपातिक प्रतिनिधित्व के माध्यम से प्रतिवर्ष किया जाता है। कोई भी मंत्री इसका सदस्य नहीं हो सकता। 

अध्यक्ष:

 इसकी नियुक्ति लोकसभा अध्यक्ष द्वारा की जाती है (1967 से परंपरा के अनुसार विपक्ष से)

कार्य: यह विनियोग और वित्त खातों पर CAG की रिपोर्टों की जांच करती है। इसका काम सार्वजनिक व्यय में वैधता, दक्षता और मितव्ययिता सुनिश्चित करना तथा भ्रष्टाचार व फिजूलखर्ची का पता लगाना है।

व्यापक शासन संबंधी चिंताएं:

लोक लेखा समिति (PAC) की टिप्पणियां कई गंभीर सवाल उठाती हैं:

      परिणाम-आधारित बजटिंग  की प्रभावशीलता।

      कौशल विकास में केंद्र-राज्य समन्वय।

      स्कूली पाठ्यक्रम में व्यावसायिक शिक्षा का एकीकरण (NEP 2020 के साथ जुड़ाव)

      बाह्य सहायता प्राप्त परियोजनाओं का कुशल उपयोग।

भारत का जनसांख्यिकीय लाभांश  प्रभावी कौशल विकास पर निर्भर है, ऐसे में 'संकल्प' जैसे प्रमुख कार्यक्रमों का कमजोर कार्यान्वयन लंबे समय में रोजगार क्षमता और आर्थिक विकास को नुकसान पहुँचा सकता है।

निष्कर्ष:

लोक लेखा समिति (PAC) की जांच वित्तीय जवाबदेही सुनिश्चित करने में संसदीय निरीक्षण के महत्व को रेखांकित करती है। संकल्प योजना का मामला यह दर्शाता है कि केवल महत्वाकांक्षी नीतियां बनाना काफी नहीं है; वित्तीय खर्च को वास्तविक परिणामों में बदलने के लिए संस्थागत तैयारी, प्रभावी निगरानी और धन का समय पर उपयोग अनिवार्य है।

Aliganj Gomti Nagar Prayagraj