संदर्भ:
भारत में सोशल मीडिया के तेज़ी से बढ़ते उपयोग के कारण डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म अब केवल संवाद के साधन नहीं रह गए हैं, बल्कि पारंपरिक अपराधों के साथ-साथ साइबर अपराधों का भी एक प्रमुख माध्यम बनते जा रहे हैं। इसी पृष्ठभूमि में, राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की पुलिस ने सोशल मीडिया की निगरानी के लिए विशेष इकाइयों का विस्तार किया है। यह पहल डिजिटल युग में अपराध की रोकथाम और समय पर कार्रवाई के लिए सक्रिय तथा तकनीक-आधारित पुलिस व्यवस्था के बढ़ते महत्व को दर्शाती है।
सोशल मीडिया निगरानी इकाइयों का विस्तार:
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- 2020 में 262 से बढ़कर 2024 में 28 राज्यों और 8 केंद्र शासित प्रदेशों में ऐसी इकाइयों की संख्या 365 हो गई। सबसे अधिक इकाइयाँ इन राज्यों में हैं:
- बिहार – 52
- महाराष्ट्र – 50
- पंजाब – 48
- पश्चिम बंगाल – 38
- असम – 37
- बिहार – 52
- मई 2023 में जातीय हिंसा के बाद मणिपुर में निगरानी इकाइयाँ 2020 की 3 से बढ़कर 2024 में 16 हो गईं, जबकि इस दौरान राज्य में लगभग 140 दिनों तक इंटरनेट बंद रहा।
- अन्य उल्लेखनीय बढ़ोतरी इस प्रकार है:
- असम: 1 से 37
- पश्चिम बंगाल: 2 से 38
- पंजाब: 24 से 48
- असम: 1 से 37
- 2020 में 262 से बढ़कर 2024 में 28 राज्यों और 8 केंद्र शासित प्रदेशों में ऐसी इकाइयों की संख्या 365 हो गई। सबसे अधिक इकाइयाँ इन राज्यों में हैं:
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पृष्ठभूमि और आंकड़ों के स्रोत:
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- प्रारंभिक चरण में ये इकाइयाँ साइबर अपराध पुलिस थानों के अंतर्गत कार्यरत थीं, लेकिन 2021 के बाद इन्हें स्वतंत्र और विशेषीकृत इकाइयों के रूप में विकसित किया गया। यह जानकारी पुलिस संगठनों से संबंधित आंकड़ों पर आधारित उन रिपोर्टों में दी गई है, जिन्हें पुलिस अनुसंधान एवं विकास ब्यूरो द्वारा तैयार किया जाता है।
- इसी अवधि में साइबर अपराध पुलिस थानों की संख्या भी 2020 में 376 से बढ़कर 2024 में 624 हो गई।
- इसके साथ ही निगरानी उद्देश्यों के लिए ड्रोन के उपयोग में भी वृद्धि हुई है, जो 2023 में 1,010 से बढ़कर 2024 में 1,147 तक पहुँच गया।
- प्रारंभिक चरण में ये इकाइयाँ साइबर अपराध पुलिस थानों के अंतर्गत कार्यरत थीं, लेकिन 2021 के बाद इन्हें स्वतंत्र और विशेषीकृत इकाइयों के रूप में विकसित किया गया। यह जानकारी पुलिस संगठनों से संबंधित आंकड़ों पर आधारित उन रिपोर्टों में दी गई है, जिन्हें पुलिस अनुसंधान एवं विकास ब्यूरो द्वारा तैयार किया जाता है।
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महत्व:
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- सोशल मीडिया निगरानी इकाइयों का विस्तार तकनीक-आधारित पुलिस व्यवस्था को दर्शाता है, जिससे वास्तविक समय में जानकारी एकत्र करना और त्वरित कार्रवाई करना संभव हो पाता है।
- ये इकाइयाँ साइबर अपराधों की रोकथाम, साम्प्रदायिक तनाव के नियंत्रण, ऑनलाइन उत्पीड़न से निपटने तथा कट्टरपंथी गतिविधियों पर अंकुश लगाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।
- ड्रोन निगरानी और साइबर अपराध इकाइयों के साथ समन्वय भारत की आंतरिक सुरक्षा व्यवस्था को और अधिक मज़बूत बनाता है।
- सोशल मीडिया निगरानी इकाइयों का विस्तार तकनीक-आधारित पुलिस व्यवस्था को दर्शाता है, जिससे वास्तविक समय में जानकारी एकत्र करना और त्वरित कार्रवाई करना संभव हो पाता है।
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सोशल मीडिया से जुड़े अपराधों में वृद्धि:
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- साइबर सुरक्षा से संबंधित घटनाएँ 2022 में 10.29 लाख से बढ़कर 2024 में 22.68 लाख तक पहुँच गईं।
- सोशल मीडिया पर सामने आने वाले प्रमुख अपराध इस प्रकार हैं:
- वित्तीय ठगी और “डिजिटल गिरफ्तारी”: अपराधी वीडियो कॉल के माध्यम से स्वयं को सरकारी अधिकारी बताकर लोगों से धन की वसूली करते हैं।
- पहचान प्रतिरूपण: नकली प्रोफ़ाइल बनाकर प्रेम-जाल, धोखाधड़ी या किसी व्यक्ति की छवि को नुकसान पहुँचाया जाता है।
- साइबर पीछा और उत्पीड़न: लगातार ऑनलाइन अपशब्द, धमकियाँ और डीपफेक जैसी तकनीकों के ज़रिये डराया जाता है, जिसमें विशेष रूप से महिलाओं और बच्चों को निशाना बनाया जाता है।
- हिंसा के लिए उकसाना: भ्रामक और झूठी जानकारियाँ फैलाकर साम्प्रदायिक तनाव या भीड़ हिंसा को भड़काने का प्रयास किया जाता है।
- भर्ती और कट्टरपंथीकरण: चरमपंथी संगठन सुरक्षित और गुप्त डिजिटल मंचों का उपयोग कर सामाजिक रूप से संवेदनशील और आसानी से प्रभावित होने वाले व्यक्तियों को वैचारिक रूप से प्रभावित करने और अपने नेटवर्क में शामिल करने का प्रयास करते हैं।
- वित्तीय ठगी और “डिजिटल गिरफ्तारी”: अपराधी वीडियो कॉल के माध्यम से स्वयं को सरकारी अधिकारी बताकर लोगों से धन की वसूली करते हैं।
- साइबर सुरक्षा से संबंधित घटनाएँ 2022 में 10.29 लाख से बढ़कर 2024 में 22.68 लाख तक पहुँच गईं।
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कानूनी ढांचा:
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- भारतीय न्याय संहिता, 2023 में गलत जानकारी फैलाने, साइबर स्टॉकिंग (cyber stalking) और मानहानि से संबंधित अपराधों के लिए दंड का प्रावधान किया गया है।
- सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 और उससे जुड़े नियम पहचान की चोरी, ऑनलाइन प्रतिरूपण (identity fraud) और अवैध डिजिटल सामग्री पर कार्रवाई का निर्देश देते हैं, साथ ही डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म की ज़िम्मेदारी निर्धारित करते हैं।
- डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण अधिनियम, 2023 व्यक्तिगत जानकारी की सुरक्षा सुनिश्चित करता है और बच्चों को हानिकारक ऑनलाइन गतिविधियों से अतिरिक्त सुरक्षा प्रदान करता है।
- भारतीय न्याय संहिता, 2023 में गलत जानकारी फैलाने, साइबर स्टॉकिंग (cyber stalking) और मानहानि से संबंधित अपराधों के लिए दंड का प्रावधान किया गया है।
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निष्कर्ष:
सोशल मीडिया निगरानी इकाइयों का विस्तार डिजिटल युग में बढ़ते अपराधों से निपटने के लिए भारत की बदलती रणनीति को दर्शाता है। जैसे-जैसे साइबर अपराध और ऑनलाइन अपराध अधिक जटिल और व्यापक होते जा रहे हैं, वैसा ही एक मजबूत कानूनी ढांचा और विशेष पुलिस व्यवस्था अनिवार्य हो गई है। साथ ही, सुरक्षा सुनिश्चित करते समय नागरिकों की स्वतंत्रताओं और अधिकारों के साथ संतुलन बनाए रखना भी अत्यंत महत्वपूर्ण है।
