PCOS का नाम बदलकर PMOS किया गया
सन्दर्भ:
हाल ही में, वैश्विक विशेषज्ञों ने पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम (PCOS) का नाम बदलकर पॉलीएंडोक्राइन मेटाबॉलिक ओवेरियन सिंड्रोम (PMOS) कर दिया है। यह परिवर्तन मोनाश विश्वविद्यालय के नेतृत्व में 14 वर्षों के सहयोगात्मक शोध के बाद किया गया। द लैंसेट में प्रकाशित इस बदलाव से यह स्पष्ट होता है कि यह केवल अंडाशयों से जुड़ी समस्या नहीं, बल्कि अंतःस्रावी (endocrine), चयापचय (metabolic) और प्रजनन स्वास्थ्य को प्रभावित करने वाला बहु-प्रणाली विकार (multisystem disorder) है।
PMOS (पूर्व में PCOS) के बारे में:
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- PMOS महिलाओं में पाए जाने वाले सबसे सामान्य हार्मोनल विकारों में से एक है, जो वैश्विक स्तर पर लगभग हर आठ में से एक महिला को प्रभावित करता है। यह कई प्रकार के लक्षणों से जुड़ा होता है, जैसे अनियमित या अनुपस्थित मासिक धर्म चक्र, बांझपन, गर्भावस्था संबंधी जटिलताएँ, मुहाँसे, अत्यधिक बालों की वृद्धि, वजन बढ़ना, इंसुलिन प्रतिरोध, चिंता, अवसाद, मधुमेह तथा हृदय संबंधी जोखिम।
- पहले प्रयुक्त शब्द PCOS अल्ट्रासाउंड में दिखाई देने वाले अंडाशयों में अनेक छोटे फॉलिकल्स (follicles) पर आधारित था, जिन्हें गलती से “सिस्ट” कहा गया। हालांकि, शोध से पता चला है कि ये वास्तविक सिस्ट नहीं होते, बल्कि ऐसे अविकसित फॉलिकल्स होते हैं जो परिपक्व होकर अंडाणु जारी करने में असफल रहते हैं।
- सामान्य मासिक चक्र में एक फॉलिकल प्रमुख बनकर अंडोत्सर्जन (ovulation) करता है, जबकि अन्य समाप्त हो जाते हैं। लेकिन PMOS में यह प्रक्रिया बाधित हो जाती है, जिससे अनेक अपरिपक्व फॉलिकल्स बन जाते हैं, जो सिस्ट जैसे दिखाई देते हैं, पर वास्तव में यह अंडाशय की बीमारी नहीं बल्कि हार्मोनल असंतुलन का संकेत है।
- PMOS महिलाओं में पाए जाने वाले सबसे सामान्य हार्मोनल विकारों में से एक है, जो वैश्विक स्तर पर लगभग हर आठ में से एक महिला को प्रभावित करता है। यह कई प्रकार के लक्षणों से जुड़ा होता है, जैसे अनियमित या अनुपस्थित मासिक धर्म चक्र, बांझपन, गर्भावस्था संबंधी जटिलताएँ, मुहाँसे, अत्यधिक बालों की वृद्धि, वजन बढ़ना, इंसुलिन प्रतिरोध, चिंता, अवसाद, मधुमेह तथा हृदय संबंधी जोखिम।
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PMOS की प्रमुख विशेषताएँ:
पॉलीएंडोक्राइन मेटाबॉलिक ओवेरियन सिंड्रोम एक बहु-प्रणाली विकार (multisystem disorder) को दर्शाता है, जो निम्नलिखित को प्रभावित करता है:
हाइपोथैलेमस, पिट्यूटरी ग्रंथि और अंडाशयों से संबंधित अंतःस्रावी तंत्र की गड़बड़ी
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- इंसुलिन प्रतिरोध और मधुमेह के जोखिम जैसी चयापचय संबंधी समस्याएँ
- अनियमित अंडोत्सर्जन और बांझपन जैसी प्रजनन संबंधी चुनौतियाँ
- मुहाँसे और अत्यधिक बालों की वृद्धि जैसे त्वचा संबंधी लक्षण
- चिंता और अवसाद सहित मानसिक स्वास्थ्य पर प्रभाव
- शरीर में दीर्घकालिक सूजन के कारण हृदय संबंधी जोखिम
- इंसुलिन प्रतिरोध और मधुमेह के जोखिम जैसी चयापचय संबंधी समस्याएँ
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नाम बदलने की आवश्यकता क्यों पड़ी:
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- विशेषज्ञों के अनुसार, PCOS नाम ने इस जटिल अंतःस्रावी विकार को केवल अंडाशयों तक सीमित करके अत्यधिक सरल रूप में प्रस्तुत किया। इस गलतफहमी के कारण दशकों तक बीमारी की पहचान में देरी हुई और उपचार भी पर्याप्त नहीं हो पाया। नया नाम इस स्थिति को सुधारता है, क्योंकि यह स्वीकार करता है कि यह केवल एक अंग नहीं बल्कि शरीर की अनेक प्रणालियों से जुड़ा विकार है।
- पॉलीएंडोक्राइन मेटाबॉलिक ओवेरियन सिंड्रोम अंतःस्रावी नियंत्रण, चयापचय प्रक्रियाओं तथा प्रजनन हार्मोनों में होने वाली गड़बड़ियों को स्पष्ट रूप से दर्शाता है। यह न्यूरोएंडोक्राइन (neuroendocrine) और चयापचय संबंधी कारकों को भी मान्यता देता है, जिससे चिकित्सा अभ्यास और शोध में इस बीमारी को अधिक सटीक रूप से परिभाषित किया जा सकता है।
- विशेषज्ञों के अनुसार, PCOS नाम ने इस जटिल अंतःस्रावी विकार को केवल अंडाशयों तक सीमित करके अत्यधिक सरल रूप में प्रस्तुत किया। इस गलतफहमी के कारण दशकों तक बीमारी की पहचान में देरी हुई और उपचार भी पर्याप्त नहीं हो पाया। नया नाम इस स्थिति को सुधारता है, क्योंकि यह स्वीकार करता है कि यह केवल एक अंग नहीं बल्कि शरीर की अनेक प्रणालियों से जुड़ा विकार है।
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भारत की भूमिका:
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- भारत ने इस वैश्विक सहमति प्रक्रिया में सक्रिय भूमिका निभाई। इसमें दुनिया भर की 56 संस्थाओं से जुड़े मरीजों, चिकित्सकों और पेशेवर संगठनों के 22,000 से अधिक सुझावों और प्रतिक्रियाओं पर व्यापक परामर्श किया गया। भारतीय विशेषज्ञों ने इस बदलाव के महत्व पर विशेष जोर दिया, क्योंकि भारत में इसकी व्यापकता लगभग 16–18% है।
- मेटाबॉलिक (Metabolic) शब्द को शामिल करना भारत के संदर्भ में विशेष रूप से महत्वपूर्ण है, क्योंकि देश में किशोरों के बीच भी इंसुलिन प्रतिरोध, मोटापा और टाइप 2 मधुमेह के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं।
- भारत ने इस वैश्विक सहमति प्रक्रिया में सक्रिय भूमिका निभाई। इसमें दुनिया भर की 56 संस्थाओं से जुड़े मरीजों, चिकित्सकों और पेशेवर संगठनों के 22,000 से अधिक सुझावों और प्रतिक्रियाओं पर व्यापक परामर्श किया गया। भारतीय विशेषज्ञों ने इस बदलाव के महत्व पर विशेष जोर दिया, क्योंकि भारत में इसकी व्यापकता लगभग 16–18% है।
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निष्कर्ष:
PCOS से PMOS में परिवर्तन महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी शोध में एक महत्वपूर्ण प्रगति को दर्शाता है। वैज्ञानिक प्रमाणों के अनुरूप नई शब्दावली अपनाने से चिकित्सकीय स्पष्टता और रोगियों में जागरूकता दोनों बढ़ती हैं। भारत और विश्व के लिए यह एक अधिक सटीक ढाँचा प्रदान करता है, जिससे लाखों लोगों को प्रभावित करने वाली इस स्थिति के बेहतर प्रबंधन और समन्वित, दीर्घकालिक देखभाल में सहायता मिलेगी।

