संदर्भ:
हाल ही में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि (PM-KISAN) योजना को अगले पाँच वर्षों (2026–27 से 2030–31) तक विस्तरित कर दिया है। इसके लिए ₹3.15 लाख करोड़ का वित्तीय प्रावधान किया गया है। इस निर्णय का उद्देश्य पात्र किसान परिवारों को प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (Direct Benefit Transfer - DBT) के माध्यम से निरंतर आय सहायता प्रदान करना है।
पीएम-किसान योजना के बारे में:
पीएम-किसान योजना की शुरुआत 24 फरवरी 2019 को की गई थी। यह कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय द्वारा संचालित एक केंद्रीय क्षेत्र (Central Sector) योजना है। इसके तहत पात्र भूमिधारक किसान परिवारों को प्रति वर्ष ₹6,000 की वित्तीय सहायता तीन समान किस्तों (प्रत्येक ₹2,000) में सीधे उनके बैंक खातों में आधार-सक्षम डीबीटी के माध्यम से हस्तांतरित की जाती है। यह योजना पूरी तरह केंद्र सरकार द्वारा वित्तपोषित है और इसका उद्देश्य किसानों की आय में वृद्धि तथा कृषि निवेश को प्रोत्साहन देना है।
हाल के विकास:
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- केंद्रीय मंत्रिमंडल ने पीएम-किसान योजना को 2026–27 से 2030–31 की अवधि के लिए बढ़ा दिया है।
- योजना की शुरुआत से अब तक 23 किस्तों के माध्यम से ₹4.47 लाख करोड़ से अधिक राशि किसानों को हस्तांतरित की जा चुकी है।
- 23वीं किस्त के तहत ₹18,984 करोड़ की राशि 9.49 करोड़ से अधिक किसानों के खातों में भेजी गई।
- कोविड-19 महामारी के दौरान इस योजना के अंतर्गत ₹1.71 लाख करोड़ से अधिक की सहायता वितरित की गई।
- महिला किसानों को अब तक ₹1.06 लाख करोड़ से अधिक की राशि प्राप्त हुई है तथा कुल लाभार्थियों में लगभग एक-चौथाई महिलाएँ हैं।
- केंद्रीय मंत्रिमंडल ने पीएम-किसान योजना को 2026–27 से 2030–31 की अवधि के लिए बढ़ा दिया है।
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मुख्य विशेषताएँ:
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- पात्र किसान परिवारों को प्रति वर्ष ₹6,000 की वित्तीय सहायता।
- राशि तीन समान किस्तों में प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (DBT) के माध्यम से प्रदान की जाती है।
- यह 100% केंद्र सरकार द्वारा वित्तपोषित योजना है।
- बीज, उर्वरक, कृषि उपकरण तथा अन्य कृषि आवश्यकताओं पर होने वाले व्यय में सहायता।
- लाभ प्राप्त करने के लिए आधार आधारित ई-केवाईसी (e-KYC) अनिवार्य।
- पात्र किसान परिवारों को प्रति वर्ष ₹6,000 की वित्तीय सहायता।
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प्रभाव:
नीति आयोग के विकास निगरानी एवं मूल्यांकन कार्यालय (DMEO) के अनुसार:
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- 92% से अधिक लाभार्थियों ने प्राप्त सहायता का उपयोग कृषि गतिविधियों और कृषि निवेश में किया।
- लगभग 85% किसानों ने कृषि आय में वृद्धि तथा अनौपचारिक ऋण पर निर्भरता में कमी की सूचना दी।
- योजना ने पारदर्शी एवं समयबद्ध डीबीटी के माध्यम से बिना किसी बिचौलिये के वित्तीय समावेशन को भी मजबूत किया है।
- 92% से अधिक लाभार्थियों ने प्राप्त सहायता का उपयोग कृषि गतिविधियों और कृषि निवेश में किया।
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चुनौतियाँ:
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- योजना में बटाईदार किसानों, किरायेदार किसानों तथा भूमिहीन कृषि श्रमिकों को शामिल नहीं किया गया है।
- भूमि अभिलेखों की त्रुटियाँ, ई-केवाईसी में देरी, तथा कृषि लागत बढ़ने के कारण ₹6,000 की वास्तविक क्रय शक्ति में कमी योजना की प्रभावशीलता को सीमित करती है।
- योजना में बटाईदार किसानों, किरायेदार किसानों तथा भूमिहीन कृषि श्रमिकों को शामिल नहीं किया गया है।
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निष्कर्ष:
पीएम-किसान योजना का 2030–31 तक विस्तार किसानों की आजीविका को प्रत्यक्ष आय सहायता के माध्यम से सुदृढ़ करने के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। हालांकि, योजना को अधिक समावेशी और प्रभावी बनाने के लिए भूमि अभिलेखों में सुधार, वास्तविक कृषकों को शामिल करना, डीबीटी प्रणाली को और सुचारु बनाना तथा इसे सिंचाई, बाजार तक पहुँच और जलवायु-अनुकूल कृषि सुधारों जैसी व्यापक कृषि नीतियों के साथ एकीकृत करना आवश्यक होगा। इससे पीएम-किसान योजना ग्रामीण विकास और कृषि समृद्धि का एक अधिक टिकाऊ एवं समावेशी साधन बन सकेगी।

