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Blog / 19 Jan 2026

ग़ाज़ा शांति योजना का दूसरा चरण

संदर्भ:

हाल ही में ग़ाज़ा युद्ध को समाप्त करने के उद्देश्य से अमेरिका समर्थित शांति योजना अपने दूसरे चरण में प्रवेश कर चुकी है। यह चरण ऐसे समय शुरू हुआ है जब इज़राइल और हमास के बीच कई महत्वपूर्ण राजनीतिक और सुरक्षा संबंधी मुद्दों पर मतभेद अब भी बने हुए हैं। इनमें हथियारों का त्याग (निरस्त्रीकरण) और युद्ध के बाद ग़ाज़ा की प्रशासनिक व्यवस्था सबसे प्रमुख विषय हैं। इस योजना का लक्ष्य केवल तत्काल युद्धविराम तक सीमित न रहकर, ग़ाज़ा में दीर्घकालिक शासन व्यवस्था, पुनर्निर्माण और स्थिरता को सुनिश्चित करना है।

पृष्ठभूमि:

      • ग़ाज़ा संघर्ष, लंबे समय से चले आ रहे इज़राइलफिलिस्तीन विवाद का एक प्रमुख हिस्सा है, जिसकी जड़ें 1948 में इज़राइल की स्थापना और उसके परिणामस्वरूप बड़ी संख्या में फिलिस्तीनियों के विस्थापन में निहित हैं। वर्ष 2007 में हमास द्वारा ग़ाज़ा पर नियंत्रण स्थापित किए जाने के बाद यह क्षेत्र और अधिक अस्थिर तथा संवेदनशील हो गया। इसके चलते इज़राइल और मिस्र ने ग़ाज़ा पर नाकेबंदी लागू की, जिससे लोगों की आवाजाही और आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति पर कड़ा प्रतिबंध लगा।
      • संघर्ष 7 अक्टूबर 2023 से हमास के इज़राइल पर व्यापक हमले से गंभीर रूप से और तेज हो गया जिनमें 1,200 से अधिक लोगों की जान गई और अनेक लोगों को बंधक बना लिया गया। इसके प्रत्युत्तर में इज़राइल ने ऑपरेशन आयरन स्वॉर्ड्सआरंभ किया, जिसके परिणामस्वरूप ग़ाज़ा में बड़े पैमाने पर जनहानि, बुनियादी ढांचे का विनाश और मानवीय संकट उत्पन्न हुआ।

What happens next in Gaza ceasefire plan after hostage release? - BBC News

पहले चरण के बारे में:

      • पहला चरण अक्टूबर 2025 में शुरू किया गया था, जिसका उद्देश्य था:
        • एक अस्थायी युद्धविराम स्थापित करना
        • ग़ाज़ा में मानवीय सहायता की आपूर्ति सुनिश्चित करना
        • बंधकों की रिहाई कराना
      • इस चरण के दौरान अधिकांश बंधकों को रिहा कर दिया गया, किंतु रान ग्विली के अवशेषों की वापसी न हो पाने के कारण दूसरे चरण की शुरुआत और उसकी समय-सीमा को लेकर तनाव बना रहा। युद्धविराम के बावजूद उल्लंघन की घटनाएँ होती रहीं, जिससे दोनों पक्षों में जनहानि की खबरें सामने आईं। मानवीय सहायता अपेक्षित स्तर तक नहीं पहुँच सकी, परिणामस्वरूप भोजन, दवाइयों और ईंधन की कमी और अधिक गंभीर हो गई तथा ग़ाज़ा में मानवीय संकट लगातार गहराता चला गया।

दूसरे चरण के बारे में:

      • दूसरे चरण के तहत ग़ाज़ा के प्रशासन की ज़िम्मेदारी संभालने के लिए 15 सदस्यीय एक फिलिस्तीनी तकनीकी समिति का गठन किया गया है, जिसका नेतृत्व अली शाअथ कर रहे हैं। इस समिति का मुख्य कार्य ग़ाज़ा में दैनिक प्रशासन को सुचारु रूप से चलाना, युद्ध से क्षतिग्रस्त ढांचे के पुनर्निर्माण की प्रक्रिया को आगे बढ़ाना और आम नागरिकों के लिए आवश्यक सेवाओं की व्यवस्था सुनिश्चित करना है।
      • इस पूरी व्यवस्था की निगरानी शांति परिषदके माध्यम से की जाएगी, जिसकी अध्यक्षता अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप करेंगे। इसके साथ ही अंतरराष्ट्रीय स्तर की कई प्रमुख हस्तियाँ इस प्रक्रिया को मार्गदर्शन और समर्थन प्रदान करेंगी। योजना के अंतर्गत एक अंतरराष्ट्रीय स्थिरीकरण बल के गठन का भी प्रस्ताव है, जिसका उद्देश्य फिलिस्तीनी पुलिस को प्रशिक्षण देना, कानून-व्यवस्था को सुदृढ़ करना और क्षेत्र में समग्र सुरक्षा सुनिश्चित करना होगा।

चुनौतियाँ:

इस चरण के समक्ष कई गहरी और जटिल चुनौतियाँ बनी हुई हैं, जो शांति प्रक्रिया की सफलता को प्रभावित कर सकती हैं:

      • निरस्त्रीकरण: हमास पूर्ण रूप से हथियार छोड़ने के लिए तैयार नहीं है, जबकि इसे इज़राइल अपनी सुरक्षा से जुड़ी सबसे अहम शर्त मानता है।
      • सेना की वापसी: इज़राइल ने ग़ाज़ा से अपने सैनिकों की पूर्ण और चरणबद्ध वापसी को लेकर अब तक कोई स्पष्ट समय-सीमा घोषित नहीं की है।
      • मानवीय संकट: ग़ाज़ा में 20 लाख से अधिक फिलिस्तीनी गंभीर मानवीय संकट का सामना कर रहे हैं। भोजन, स्वच्छ पेयजल और चिकित्सा सुविधाओं की भारी कमी बनी हुई है, जबकि लगभग 90% आबादी अब भी विस्थापन की स्थिति में है।
      • राजनीतिक अविश्वास: दशकों से चले आ रहे मतभेद, हिंसा और आपसी अविश्वास के कारण मेल-मिलाप की प्रक्रिया कठिन बनी हुई है, जिससे स्थायी और प्रभावी शासन व्यवस्था स्थापित करने में बाधाएँ उत्पन्न हो रही हैं।

निष्कर्ष:

दूसरा चरण अल्पकालिक युद्धविराम से आगे बढ़कर दीर्घकालिक शासन और स्थिरता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। लेकिन इसकी सफलता निरंतर अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता, आपसी विश्वास और सुरक्षा व राजनीतिक विवादों के समाधान पर निर्भर करेगी। यदि इन मुद्दों का समाधान नहीं हुआ, तो ग़ाज़ा में पुनर्निर्माण और स्थायी शांति अस्थिर बनी रह सकती है। यह स्थिति लंबे समय से चले आ रहे संघर्षों को सुलझाने की जटिलताओं को स्पष्ट रूप से दर्शाती है।