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Blog / 25 Jul 2026

स्थायी कार्बनिक प्रदूषक (POPs): स्टॉकहोम कन्वेंशन

संदर्भ:

हाल ही में, संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (UNEP) और वैश्विक पर्यावरण सुविधा (GEF) ने 23.5 मिलियन अमेरिकी डॉलर के ग्लोबल केमिकल्स मॉनिटरिंग प्रोग्राम (GCMP) का शुभारंभ किया है।

कार्यक्रम का उद्देश्य:

इस कार्यक्रम का उद्देश्य खतरनाक रसायनों की वैश्विक निगरानी को सुदृढ़ करना तथा स्थायी कार्बनिक प्रदूषक (POPs) पर स्टॉकहोम कन्वेंशन और पारे (Mercury) पर मिनामाटा कन्वेंशन की प्रभावशीलता का मूल्यांकन करना है। यह पहल देशों को रासायनिक निगरानी में सुधार करने, विश्वसनीय पर्यावरणीय आँकड़े तैयार करने तथा मानव स्वास्थ्य और पर्यावरण की सुरक्षा के प्रयासों को सशक्त बनाने में सहायता करेगी।

स्थायी कार्बनिक प्रदूषक (POPs) क्या हैं?

स्थायी कार्बनिक प्रदूषक (Persistent Organic Pollutants - POPs) विषैले, कार्बन-आधारित, मानव-निर्मित रासायनिक पदार्थ हैं, जो पर्यावरण में अपघटन (Degradation) का प्रतिरोध करते हैं और कई वर्षों तक पर्यावरण में बने रहते हैं। अपनी स्थायित्व (Persistence) के कारण ये वायु, जल और मिट्टी के माध्यम से लंबी दूरी तक फैल जाते हैं तथा अंतरराष्ट्रीय सीमाओं को पार कर जाते हैं। POPs जीवित जीवों में एकत्रित हो जाते हैं तथा खाद्य श्रृंखला के उच्च स्तरों पर इनकी सांद्रता बढ़ती जाती है, जिससे जैव विविधता और मानव स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरे उत्पन्न होते हैं।

Primary sources of POPs | Download Scientific Diagram

POPs की प्रमुख विशेषताएँ:

स्टॉकहोम कन्वेंशन के अनुसार, POPs में चार प्रमुख विशेषताएँ होती हैं-

      • स्थायित्व (Persistence): ये अत्यधिक लंबे समय तक बिना टूटे बने रहते हैं।
      • लंबी दूरी तक पर्यावरणीय परिवहन (Long-range Environmental Transport): ये वायु, जल और मिट्टी के माध्यम से विभिन्न क्षेत्रों में फैलते हैं।
      • जैव-संचयन (Bioaccumulation): ये जीवित जीवों के वसायुक्त ऊतकों (Fatty Tissues) में एकत्रित हो जाते हैं।
      • विषाक्तता (Toxicity): कम सांद्रता में भी ये मनुष्यों, वन्यजीवों और पारिस्थितिक तंत्र पर प्रतिकूल प्रभाव डालते हैं।

स्वास्थ्य एवं पर्यावरणीय प्रभाव:

POPs अनेक स्वास्थ्य समस्याओं से जुड़े हुए हैं, जिनमें कैंसर, एलर्जी, प्रजनन संबंधी विकार, प्रतिरक्षा तंत्र का दमन तथा केंद्रीय एवं परिधीय तंत्रिका तंत्र को क्षति शामिल हैं। अनेक POPs अंतःस्रावी व्यवधानकारी (Endocrine Disruptors) के रूप में भी कार्य करते हैं, जो हार्मोन प्रणाली में हस्तक्षेप कर प्रजनन, भ्रूण विकास तथा प्रतिरक्षा प्रणाली को प्रभावित करते हैं। जैव-वृद्धि (Biomagnification) की प्रक्रिया के कारण खाद्य श्रृंखला के प्रत्येक उच्च पोषण स्तर (Trophic Level) पर POPs की सांद्रता बढ़ती जाती है, जिससे शीर्ष शिकारी, जिनमें मनुष्य भी शामिल हैं, सबसे अधिक प्रभावित होते हैं।

POPs के सामान्य उदाहरण:

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, प्रमुख POPs में ऑर्गेनोक्लोरीन कीटनाशक जैसे DDT, औद्योगिक रसायन जैसे पॉलीक्लोरीनेटेड बाइफिनाइल्स (PCBs) तथा अनपेक्षित औद्योगिक उप-उत्पाद जैसे डाइऑक्सिन्स (PCDDs) और फ्यूरान्स (PCDFs) शामिल हैं। ये रसायन कीटनाशकों, औद्योगिक उत्पादन, अपशिष्ट दहन (Waste Incineration) तथा अन्य विनिर्माण गतिविधियों से उत्पन्न होते हैं।

POPs पर स्टॉकहोम कन्वेंशन:

स्टॉकहोम कन्वेंशन, जिसे 2001 में अपनाया गया और 2004 से लागू किया गया, एक वैश्विक संधि है जिसका उद्देश्य POPs के उत्पादन, उपयोग और उत्सर्जन को समाप्त या सीमित करके मानव स्वास्थ्य और पर्यावरण की रक्षा करना है। यह कन्वेंशन POPs युक्त अपशिष्टों के पर्यावरण-अनुकूल प्रबंधन और निपटान को भी बढ़ावा देता है। भारत इस कन्वेंशन का एक पक्षकार (Party) है और सूचीबद्ध कई POPs के विनियमन हेतु आवश्यक कदम उठा चुका है।

GCMP का महत्व:

नव प्रारंभ किया गया ग्लोबल केमिकल्स मॉनिटरिंग प्रोग्राम (GCMP) राष्ट्रीय निगरानी क्षमताओं को सुदृढ़ करेगा, वैज्ञानिक आँकड़ों के संग्रह में सुधार करेगा तथा देशों को वैश्विक पर्यावरणीय संधियों के अनुपालन का आकलन करने में सहायता प्रदान करेगा। यह कार्यक्रम रसायन प्रबंधन में अंतरराष्ट्रीय सहयोग को बढ़ावा देगा तथा सतत विकास और प्रदूषण-मुक्त पर्यावरण की प्राप्ति में योगदान देगा।

निष्कर्ष:

स्टॉकहोम कन्वेंशन का प्रभावी क्रियान्वयन तथा GCMP जैसी पहलें POPs से होने वाले प्रदूषण को कम करने तथा मानव स्वास्थ्य एवं पर्यावरण की सुरक्षा के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं।

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