भारत में पेटेंट वृद्धि 2026
सन्दर्भ:
भारत में वित्त वर्ष 2025–26 के दौरान पेटेंट आवेदनों में ऐतिहासिक वृद्धि दर्ज की गई है। इस अवधि में कुल 1,43,729 पेटेंट आवेदन प्राप्त हुए, जो पिछले वर्ष की तुलना में 30.2% अधिक हैं। यह भारत के इतिहास में अब तक का सर्वाधिक स्तर है। इस वृद्धि के साथ भारत वैश्विक स्तर पर छठा सबसे बड़ा पेटेंट फाइलर बन गया है।
घरेलू नवाचार:
-
-
- कुल आवेदनों में से लगभग 69% पेटेंट घरेलू आवेदकों द्वारा दाखिल किए गए, जो स्वदेशी नवाचार क्षमता में वृद्धि का संकेत है।
- राज्यवार प्रदर्शन:
- तमिलनाडु शीर्ष पर
- कर्नाटक दूसरे स्थान पर
- महाराष्ट्र तीसरे स्थान पर
- तमिलनाडु शीर्ष पर
- यह दर्शाता है कि भारत में नवाचार मुख्यतः औद्योगिक, तकनीकी और स्टार्टअप केंद्रित राज्यों में केंद्रित है।
- पिछले पाँच वर्षों में पेटेंट फाइलिंग में लगभग 146% वृद्धि दर्ज की गई है, जो “मेड इन इंडिया” से “इनवेंटेड इन इंडिया” की ओर संरचनात्मक परिवर्तन को पुष्ट करती है।
- कुल आवेदनों में से लगभग 69% पेटेंट घरेलू आवेदकों द्वारा दाखिल किए गए, जो स्वदेशी नवाचार क्षमता में वृद्धि का संकेत है।
-
पेटेंट के बारे में:
पेटेंट एक कानूनी अधिकार है, जो किसी आविष्कारक को उसके नए आविष्कार पर दिया जाता है। इसके तहत वह व्यक्ति/संस्था निर्धारित अवधि (आमतौर पर 20 वर्ष) तक अपने आविष्कार का विशेष उपयोग, निर्माण और बिक्री अधिकार रखता है।
पेटेंट का उद्देश्य:
-
-
- नवाचार और रचनात्मकता को प्रोत्साहन देना
- बौद्धिक संपदा अधिकारों (IPR) की सुरक्षा करना
- तकनीकी विकास को बढ़ावा देना
- आविष्कारकों को व्यावसायिक लाभ प्रदान करना
- नवाचार और रचनात्मकता को प्रोत्साहन देना
-
भारत में पेटेंट के लिए कानूनी ढांचा:
भारत में पेटेंट प्रणाली पेटेंट अधिनियम, 1970 द्वारा शासित है, जिसे 2005 में TRIPS समझौते के अनुरूप संशोधित किया गया। यह भारत की अंतरराष्ट्रीय व्यापार और IPR प्रतिबद्धताओं को दर्शाता है।
संस्थागत संरचना:
-
-
- पेटेंट, डिजाइन और ट्रेडमार्क महानियंत्रक (CGPDTM): वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के अंतर्गत प्रमुख संस्था
- राष्ट्रीय IPR नीति, 2016: “रचनात्मक भारत, अभिनव भारत” के लक्ष्य के साथ नवाचार को प्रोत्साहन
- पेटेंट, डिजाइन और ट्रेडमार्क महानियंत्रक (CGPDTM): वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के अंतर्गत प्रमुख संस्था
-
सरकारी प्रोत्साहन एवं सुधार:
-
-
- स्टार्टअप्स, MSMEs और महिला उद्यमियों के लिए 80% तक शुल्क छूट
- त्वरित परीक्षण (Expedited Examination) के माध्यम से तेज पेटेंट जांच प्रक्रिया
- लगभग 95% पेटेंट आवेदन डिजिटल माध्यम से दाखिल
- SIPP (Start-up Intellectual Property Protection) योजना के तहत कानूनी सहायता
- स्टार्टअप्स, MSMEs और महिला उद्यमियों के लिए 80% तक शुल्क छूट
-
आर्थिक महत्व:
-
-
- भारत की वैश्विक रैंकिंग: छठा सबसे बड़ा पेटेंट फाइलर
- मजबूत IPR व्यवस्था से FDI आकर्षण में वृद्धि
- भारत का सेवा-आधारित अर्थव्यवस्था से ज्ञान-आधारित अर्थव्यवस्था (Knowledge Economy) की ओर परिवर्तन
- नवाचार आधारित उद्योगों और स्टार्टअप्स को बढ़ावा
- भारत की वैश्विक रैंकिंग: छठा सबसे बड़ा पेटेंट फाइलर
-
प्रमुख चुनौतियाँ:
-
-
- R&D व्यय कम: GDP का लगभग 0.7% (अमेरिका ~3.5%, चीन ~2.4%)
- व्यावसायीकरण की कमी: केवल 10–15% पेटेंट ही उत्पादों में परिवर्तित होते हैं
- मानव संसाधन की कमी: पेटेंट परीक्षकों की संख्या अपर्याप्त, जिससे लंबित मामलों में वृद्धि
- R&D व्यय कम: GDP का लगभग 0.7% (अमेरिका ~3.5%, चीन ~2.4%)
-
आगे की राह:
भारत को अपने अनुसंधान एवं विकास (R&D) निवेश को बढ़ाकर GDP के 2% तक ले जाने पर विशेष ध्यान देना होगा, जिससे उच्च गुणवत्ता वाले नवाचार को प्रोत्साहन मिल सके। इसके साथ ही विश्वविद्यालयों और उद्योगों के बीच सहयोग को सुदृढ़ करना आवश्यक है, ताकि शोध को व्यावहारिक उत्पादों और तकनीकों में परिवर्तित किया जा सके। पेटेंट के प्रभावी व्यावसायीकरण (commercialization) हेतु एक मजबूत पारिस्थितिकी तंत्र विकसित करना भी महत्वपूर्ण होगा, जिससे आविष्कार आर्थिक मूल्य में बदल सकें। इसके अतिरिक्त, IPR प्रशासन में डिजिटल तकनीकों और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) के उपयोग को बढ़ाकर प्रक्रियाओं को अधिक पारदर्शी, तेज और कुशल बनाया जा सकता है।
निष्कर्ष:
वित्त वर्ष 2025–26 के पेटेंट आंकड़े केवल सांख्यिकीय वृद्धि नहीं हैं, बल्कि यह भारत की बदलती वैज्ञानिक और नवाचार मानसिकता का प्रतिबिंब हैं। यदि भारत R&D निवेश बढ़ाता है, पेटेंट गुणवत्ता सुधारता है और व्यावसायीकरण को मजबूत करता है, तो यह 2047 के “विकसित भारत” के लक्ष्य को प्राप्त करने में एक निर्णायक भूमिका निभा सकता है।

